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चीन का सरकारी सुपरकंप्यूटर हुआ हैक, फाइटर जेट्स-मिसाइल का डेटा चोरी

लीक हुए डेटा में “सीक्रेट” मार्क वाले दस्तावेज, तकनीकी फाइलें और बम-मिसाइल सिस्टम से जुड़े डिजाइन शामिल हैं। यह डेटा विदेशी सरकारों और खुफिया एजेंसियों के लिए काफी अहम साबित हो सकता है।

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चीन का सरकारी सुपरकंप्यूटर हुआ हैक, फाइटर जेट्स-मिसाइल का डेटा चोरी

Photo : iStock

चीन के एक सरकारी सुपरकंप्यूटर पर बड़े साइबर हमले की खबर सामने आई है, जिसमें हैकर्स ने भारी मात्रा में संवेदनशील डेटा चोरी कर लिया। रिपोर्ट के मुताबिक, इस डेटा में फाइटर जेट्स, मिसाइल सिस्टम और युद्ध सिमुलेशन से जुड़ी गोपनीय जानकारी शामिल है, जो सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है।

10 पेटाबाइट से ज्यादा डेटा लीक होने का दावा

बताया जा रहा है कि चोरी हुआ डेटा 10 पेटाबाइट से भी ज्यादा हो सकता है। तुलना के लिए, एक सामान्य हाई-एंड लैपटॉप में करीब 1 टेराबाइट डेटा स्टोर होता है। अगर यह आंकड़ा सही साबित होता है, तो यह चीन के इतिहास की सबसे बड़ी डेटा लीक घटनाओं में से एक हो सकती है।

इस सेंटर को बनाया गया निशाना

यह साइबर हमला नेशनल सुपरकंप्यूटर सेंटर (NSCC) पर हुआ, जो चीन के तियानजिन में स्थित है। यह सेंटर देश की 6,000 से ज्यादा संस्थाओं को सपोर्ट करता है, जिनमें एयरोस्पेस, डिफेंस और एडवांस साइंस से जुड़ी बड़ी संस्थाएं शामिल हैं।

कैसे हुआ इतना बड़ा डेटा चोरी?

रिपोर्ट के अनुसार, हैकर ने एक कमजोर VPN एंट्री पॉइंट के जरिए सिस्टम में घुसपैठ की। इसके बाद उसने बॉटनेट (Botnet) का इस्तेमाल करते हुए कई महीनों तक धीरे-धीरे डेटा को छोटे-छोटे हिस्सों में बाहर निकाला। यही वजह रही कि यह गतिविधि लंबे समय तक पकड़ी नहीं जा सकी। पूरी प्रक्रिया करीब 6 महीने तक चली।

टेलीग्राम पर सामने आया डेटा

चोरी किया गया डेटा सबसे पहले Telegram पर “FlamingChina” नाम के एक अकाउंट द्वारा शेयर किया गया। इसमें एयरोस्पेस इंजीनियरिंग, सैन्य तकनीक, बायोइन्फॉर्मेटिक्स और फ्यूजन सिमुलेशन से जुड़ी फाइलों की झलक दिखाई गई।

गोपनीय दस्तावेज और मिसाइल डिजाइन शामिल

विशेषज्ञों के अनुसार, लीक हुए डेटा में “सीक्रेट” मार्क वाले दस्तावेज, तकनीकी फाइलें और बम-मिसाइल सिस्टम से जुड़े डिजाइन शामिल हैं। यह डेटा विदेशी सरकारों और खुफिया एजेंसियों के लिए काफी अहम साबित हो सकता है।

डेटा बेचने की कोशिश में हैकर्स

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि हैकर्स इस डेटा को बेचने की कोशिश कर रहे हैं। कुछ हजार डॉलर में सैंपल एक्सेस और पूरे डेटा के लिए लाखों डॉलर की मांग की जा रही है, जिसका भुगतान क्रिप्टोकरेंसी में मांगा जा रहा है।

Pradeep Pandey
प्रदीप पाण्डेयauthor

प्रदीप पाण्डेय टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट पर कंटेंट तैयार करते हैं। डिजिटल मीडिया में 10 वर्षों के अनुभव के साथ प्रदीप तकनीक की दुनिया को समझने और उसे आम पाठकों तक सरल व उपयोगी रूप में पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। प्रदीप अब तक 11,000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुके हैं। वह गैजेट रिव्यू, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टेक टिप्स और नवीनतम टेक इनोवेशन पर लगातार काम करते हैं। एआई टूल्स पर एक्सपेरिमेंट करना, नए ऐप्स टेस्ट करना और टेक से जुड़े प्रैक्टिकल सॉल्यूशंस खोजने में उनकी खास रुचि है।

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