केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को फर्जी खबरों, भ्रामक पोस्ट और एडिट किए गए वीडियो पर सख्ती बरतने का निर्देश दिया है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने गुरुवार को जारी एडवाइजरी में कहा कि सोशल मीडिया कंपनियों को ऐसी सामग्री पर नजर रखने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरतनी होगी, जिससे लोगों में भ्रम फैले, दहशत पैदा हो या कानून-व्यवस्था बिगड़ने का खतरा हो।
यह एडवाइजरी राजधानी में चल रहे घटनाक्रमों के बीच जारी की गई है। हालांकि, मंत्रालय ने अपने निर्देश में किसी खास विरोध-प्रदर्शन का नाम नहीं लिया है। सरकार का कहना है कि सोशल मीडिया पर ऐसी सूचनाएं प्रसारित हो रही हैं, जो सार्वजनिक शांति और व्यवस्था के लिए परेशानी खड़ी कर सकती हैं।
पुराने वीडियो और फर्जी तस्वीरों पर रहेगी नजर
सरकार ने सोशल मीडिया कंपनियों को खास तौर पर उन तस्वीरों और वीडियो पर ध्यान देने को कहा है, जिन्हें पुराना होने के बावजूद किसी मौजूदा घटना का बताकर शेयर किया जा रहा है। इसके अलावा, डिजिटल तरीके से बदले गए वीडियो, AI से तैयार किए गए ऑडियो-वीडियो और सरकारी अधिकारियों या दूसरे लोगों की पहचान का गलत इस्तेमाल करने वाली सामग्री पर भी नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
ऐसी पोस्ट भी सरकार की चिंता का विषय हैं, जो हिंसा भड़का सकती हैं या किसी गैरकानूनी गतिविधि को बढ़ावा दे सकती हैं। मंत्रालय ने प्लेटफॉर्म्स को भ्रामक या AI से तैयार की गई सामग्री की पहचान कर उस पर उचित लेबल लगाने या जरूरी संदर्भ स्पष्ट करने की सलाह दी है।
सरकारी शिकायतों पर देनी होगी प्राथमिकता
एडवाइजरी में कहा गया है कि सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित करने की आशंका वाली सामग्री के संबंध में अधिकृत सरकारी एजेंसियों से मिलने वाली शिकायतों को प्राथमिकता दी जाए। सोशल मीडिया कंपनियों को यूजर्स के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए भी कहा गया है, ताकि लोग किसी जानकारी को शेयर या फॉरवर्ड करने से पहले उसके स्रोत, तारीख और वास्तविकता की जांच करें।
इसके साथ ही प्लेटफॉर्म्स को कानून प्रवर्तन एजेंसियों और अधिकृत सरकारी निकायों के साथ समय पर सहयोग करना होगा। लागू कानूनों और निर्धारित समयसीमा के अनुसार जरूरी जानकारी या सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।
शिकायतों के निपटारे की व्यवस्था होगी मजबूत
मंत्रालय ने सोशल मीडिया कंपनियों को अपने कंटेंट मॉनिटरिंग, शिकायतों को आगे भेजने और उनके निपटारे की व्यवस्था की समीक्षा कर उसे मजबूत करने को कहा है। मकसद ऐसी सामग्री पर जल्द कार्रवाई करना है, जिससे बड़े स्तर पर भ्रम, घबराहट, हिंसा या सार्वजनिक व्यवस्था में बाधा पैदा हो सकती है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन निर्देशों का उद्देश्य जिम्मेदारी के साथ सूचनाओं का प्रसार सुनिश्चित करना और सार्वजनिक शांति बनाए रखना है। हालांकि, यह कार्रवाई सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और IT Rules, 2021 समेत लागू कानूनों के दायरे में ही होनी चाहिए। एडवाइजरी के मुताबिक, इन उपायों को तत्काल प्रभाव से लागू करने के लिए कहा गया है।
