केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से कंट्रोल होने वाले खिलौने बच्चों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर सरकार उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय और गृह मंत्रालय के साथ मिलकर जरूरी कदम उठा रही है। लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान मंत्री ने कहा कि जैसे ही किसी घटना की रिपोर्ट मिलती है, उस पर तुरंत कार्रवाई की जाती है।
बच्चों की सुरक्षा के लिए कानून में प्रावधान
मंत्री ने बताया कि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट Act, 2023 के तहत विशेष प्रावधान किए गए हैं। इस कानून के अनुसार किसी भी बच्चे के व्यक्तिगत डेटा को प्रोसेस करने से पहले माता-पिता या कानूनी अभिभावक की सत्यापित सहमति लेना अनिवार्य है। इसके लिए पहचान और उम्र की पुष्टि जैसे उपायों के साथ वर्चुअल टोकन जैसी तकनीकों का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।
सिंथेटिक कंटेंट से नुकसान रोकने के लिए नियम
सरकार ने हाल ही में सिंथेटिक रूप से तैयार किए गए कंटेंट से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए भी नए नियम जारी किए हैं। मंत्री ने कहा कि डिजिटल डेटा संरक्षण कानून में बच्चों की सुरक्षा को विशेष प्राथमिकता दी गई है। इस कानून के तहत बच्चों को लक्षित करके ट्रैकिंग, व्यवहार की निगरानी या टारगेटेड विज्ञापन दिखाने पर भी रोक लगाई गई है।
खिलौनों के लिए सख्त गुणवत्ता मानक
मंत्री ने बताया कि भारत में बिकने वाले सभी खिलौनों को टॉय क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर और भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के मानकों का पालन करना जरूरी है। इसके अलावा बच्चों से जुड़ा कोई भी हानिकारक या आपत्तिजनक कंटेंट आईटी एक्ट, 2000, आईटी नियमों और POCSO Act, 2012 के तहत नियंत्रित किया जाता है।
सरकार का फोकस बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा
सरकार का कहना है कि तेजी से बढ़ती तकनीक के बीच बच्चों की ऑनलाइन और डिजिटल सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। इसी वजह से AI आधारित उपकरणों और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े संभावित खतरों पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर सख्त कार्रवाई की जा रही है।
