टेक एंड गैजेट्स

अमेरिकी सीनेटर बर्नी सैंडर्स की बड़ी चेतावनी, बैंक अकाउंट खाली कर सकते हैं AI एजेंट, तुरंत रोकना होगा

AI एजेंट्स के बैंक अकाउंट तक पहुंचने की खबर से अमेरिका में चिंता बढ़ी गई है। बर्नी सैंडर्स ने चेतावनी दी है और हर हाल ही में एआई एजेंट्स को रोकने के लिए कहा है।

Image

क्या AI एजेंट आपके पैसे भी ट्रांसफर कर सकता है?Photo- FB/U.S. Senator Bernie Sanders

अभी तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लोगों का काम आसान बनाने वाली तकनीक माना जा रहा था, लेकिन अब यही तकनीक बैंकिंग सुरक्षा के लिए नई चुनौती बनती दिख रही है। अमेरिका के प्रमुख बैंकों में ग्राहकों के अकाउंट तक पहुंचने वाले थर्ड-पार्टी AI एजेंट्स को लेकर चिंता बढ़ गई है। अमेरिकी सीनेटर बर्नी सैंडर्स ने भी इस मुद्दे पर कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि AI एजेंट्स को बिना अनुमति बैंक खातों में जाकर अपने हिसाब से काम करने की छूट नहीं दी जा सकती।

ध्यान देने वाली बात यह है कि AI एजेंट्स के बैंक खातों तक पहुंचने की खबर का मतलब यह नहीं है कि सभी बैंक अकाउंट हैक हो गए हैं या ग्राहकों का पैसा चोरी हो चुका है। रिपोर्टों में मुख्य चिंता इन टूल्स की पहुंच, उनके अधिकारों और उनके निर्देशों से आगे बढ़कर काम करने की आशंका को लेकर है।

बर्नी सैंडर्स ने क्यों जताई चिंता?

तस्वीर में बर्नी सैंडर्स के सोशल मीडिया पोस्ट में कहा गया है कि AI एजेंट्स को बिना यूजर की अनुमति के बैंक अकाउंट में जाकर स्वतंत्र रूप से काम करने की इजाजत नहीं दी जा सकती। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इस तकनीक पर नियंत्रण नहीं रखा गया, तो इससे आम लोगों के बैंक खातों से लेकर वैश्विक वित्तीय व्यवस्था तक को खतरा हो सकता है। सैंडर्स लंबे समय से शक्तिशाली AI सिस्टम पर सख्त नियम बनाने की मांग करते रहे हैं। सितंबर 2026 में उन्होंने उन्नत AI पर नियंत्रण और निगरानी से जुड़ा एक विधेयक भी पेश किया था।

Bank of America समेत बड़े बैंक क्यों रोक रहे AI एजेंट्स?

Axios की 22 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, Bank of America, JPMorgan Chase, Morgan Stanley और Wells Fargo जैसे बड़े अमेरिकी बैंक थर्ड-पार्टी AI एजेंट्स से जुड़े जोखिमों को रोकने की कोशिश कर रहे हैं। कुछ मामलों में AI टूल्स ने ग्राहकों के लॉगिन क्रेडेंशियल का इस्तेमाल करके उनके बैंक अकाउंट तक पहुंच बनाई। कुछ एजेंट्स के बारे में यह भी बताया गया कि उन्होंने यूजर के निर्देशों से आगे बढ़कर काम करने के संकेत दिए।

यहां एक अहम अंतर समझना जरूरी है। कुछ ग्राहकों ने खुद अपने लॉगिन और पासवर्ड AI टूल्स को दिए थे, लेकिन बैंकिंग नियमों के मुताबिक ऐसा करना प्रतिबंधित हो सकता है। बैंकों को यह पहचानने में भी मुश्किल हो रही है कि अकाउंट पर गतिविधि खुद ग्राहक कर रहा है या कोई AI एजेंट। इसी वजह से कई बैंक ऐसे बाहरी टूल्स की पहुंच सीमित कर रहे हैं।

क्या AI एजेंट आपके पैसे भी ट्रांसफर कर सकता है?

AI एजेंट सामान्य चैटबॉट से अलग होता है। चैटबॉट आमतौर पर सवालों के जवाब देता है, जबकि AI एजेंट को किसी काम को पूरा करने के लिए कई चरणों में कार्रवाई करने की क्षमता दी जा सकती है। उदाहरण के लिए, ऐसा एजेंट खर्चों का हिसाब रखने, बिलों की जानकारी जुटाने या खरीदारी में मदद करने के लिए इस्तेमाल हो सकता है।

लेकिन अगर उसे बैंक अकाउंट का लॉगिन, पेमेंट करने या पैसे ट्रांसफर करने की अनुमति मिल जाए, तो गलती या गलत निर्देश की स्थिति में आर्थिक नुकसान हो सकता है। इसलिए बैंक AI एजेंट्स को केवल अकाउंट की जानकारी देखने की अनुमति देने और पैसे से जुड़ी कार्रवाई पर रोक लगाने जैसे विकल्पों पर भी विचार कर रहे हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि हर AI एजेंट खतरनाक है, बल्कि उसे दिए गए अधिकारों और सुरक्षा व्यवस्था का महत्व बढ़ गया है।

भारत में भी AI साइबर हमलों को लेकर चेतावनी

यह चिंता सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं है। भारत की साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In ने 15 अक्टूबर 2026 की एडवाइजरी में बताया कि कुछ AI एजेंट परीक्षण के दौरान तय सीमा से आगे निकलकर भारतीय संगठनों के लाइव सिस्टम तक पहुंच गए। कुछ मामलों में इन एजेंट्स ने कारोबारी रिकॉर्ड, निजी डेटा और गोपनीय जानकारी तक पहुंच बनाई। एजेंसी ने यह भी बताया कि साइबर अपराधी आर्थिक लाभ के लिए AI टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं।

आम यूजर अपने बैंक अकाउंट को कैसे सुरक्षित रखें?

फिलहाल सबसे जरूरी है कि बैंक का यूजरनेम, पासवर्ड, OTP या अन्य गोपनीय जानकारी किसी अनजान AI टूल के साथ साझा न करें। किसी AI एजेंट को बैंक अकाउंट से जोड़ने से पहले उसकी अनुमति और सुरक्षा सेटिंग्स को अच्छी तरह समझें। जहां संभव हो, मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन चालू रखें और ट्रांजैक्शन अलर्ट पर नजर रखें। किसी संदिग्ध गतिविधि का पता चलने पर तुरंत बैंक से संपर्क करें। AI का इस्तेमाल वित्तीय कामों को आसान बना सकता है, लेकिन बैंक अकाउंट पर अंतिम नियंत्रण यूजर के पास रहना चाहिए। यही बर्नी सैंडर्स की चेतावनी का मुख्य संदेश
Pradeep Pandey
प्रदीप पाण्डेयauthor

प्रदीप पाण्डेय टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट पर कंटेंट तैयार करते हैं। डिजिटल मीडिया में 10 वर्षों के अनुभव के साथ प्रदीप तकनीक की दुनिया को समझने और उसे आम पाठकों तक सरल व उपयोगी रूप में पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। प्रदीप अब तक 11,000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुके हैं। वह गैजेट रिव्यू, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टेक टिप्स और नवीनतम टेक इनोवेशन पर लगातार काम करते हैं। एआई टूल्स पर एक्सपेरिमेंट करना, नए ऐप्स टेस्ट करना और टेक से जुड़े प्रैक्टिकल सॉल्यूशंस खोजने में उनकी खास रुचि है।

और पढ़ें
End of Article