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Times Now Navbharat Explainer: चार साल में दोगुने से ज्यादा क्यों बढ़ी फीफा वर्ल्ड कप ट्रॉफी की कीमत, समझिए पूरा गणित

FIFA World Cup 2026: मैदान पर खिलाड़ियों के लिए अमूल्य फीफा वर्ल्ड कप ट्रॉफी का बाजार भाव पिछले चार साल में दोगुने से ज्यादा हो गया है। क्या आपको पता है कि फीफा वर्ल्ड कप के ट्रॉफी की कीमत पिछले चार साल में क्यों इतनी बढ़ गई है?

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फीफा वर्ल्ड कप ट्रॉफी की कीमत (FIFA/X/AP)

FIFA World Cup 2026: फुटबॉल को दुनिया का सबसे लोकप्रिय खेल कहा जाता है। हर चार साल में होने वाले फीफा विश्व कप का इंतजार दुनियाभर के अरबों फैन्स करते हैं। इस बार का टूर्नामेंट और भी ज्यादा खास है। फुटबॉल के 23वें संस्करण का आयोजन पहली बार तीन देशों अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको की साझा मेजबानी में हो रहा है। 11 जून से शुरू हुए इस महाकुंभ में पहली बार 48 टीमें हिस्सा ले रही हैं। 19 जुलाई को फाइनल के बाद कोई एक टीम फीफा वर्ल्ड कप की चमचमाती ट्रॉफी उठाएगी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मैदान पर खिलाड़ियों के लिए अमूल्य इस ट्रॉफी का बाजार भाव पिछले चार साल में दोगुने से ज्यादा हो गया है।

क्यों दोगुनी हो गई ट्रॉफी की कीमत

क्या आपको पता है कि फीफा वर्ल्ड कप के ट्रॉफी की कीमत पिछले चार साल में क्यों इतनी बढ़ गई है? दरअसल, इसकी सबसे बड़ी वजह है सोने की कीमतों में आई ऐतिहासिक तेजी। फीफा विश्व कप ट्रॉफी मुख्य रूप से सोने से बनी होती है। वित्तीय बाजार डेटा प्रदाता एलएसईजी के मुताबिक, आज ट्रॉफी में मौजूद सोने का मूल्य बढ़कर लगभग 7.13 लाख डॉलर यानी 6.73 करोड़ रुपये पहुंच गया है। यही आंकड़ा दिसंबर 2022 में कतर विश्व कप के दौरान सिर्फ 2.77 लाख डॉलर था। इसका मतलब यह हुआ कि चार साल से भी कम समय में मेटल वैल्यू 157 प्रतिशत बढ़ गई है। एलएसईजी मेटल्स रिसर्च के वरिष्ठ धातु विश्लेषक देबाजित साहा कहते हैं, "सोने की कीमतों में हाल के उच्चतम स्तरों से कुछ नरमी आई है, लेकिन दीर्घकालिक रुझान अब भी बेहद उल्लेखनीय बना हुआ है। खिलाड़ियों के लिए विश्व कप ट्रॉफी का महत्व अमूल्य है, लेकिन इसमें मौजूद सोने का मूल्य दिलचस्प आंकड़ा पेश करता है कि वर्षों में कीमती धातु की कीमत कितनी तेजी से बढ़ी है।"

FIFA World Cup Trophy

फीफा वर्ल्ड कप ट्रॉफी (FIFA)

क्यों बढ़ी सोने की इतनी कीमत

पिछले दो साल में भू-राजनीतिक तनाव काफी तेजी से बढ़ा है। मिडिल ईस्ट में अस्थिरता, रूस-यूक्रेन युद्ध और अमेरिका-चीन के बीच ट्रेड वॉर की आशंका ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश की ओर धकेला है। इसके अलावा वैश्विक आर्थिक विकास की रफ्तार भी काफी सुस्त पड़ी है। ऐसे में केंद्रीय बैंकों ने भी रिकॉर्ड स्तर पर सोना खरीदा है। इसके अलावा डॉलर में कमजोरी और महंगाई की चिंता ने सोने को 2024-2026 के बीच नई ऊंचाई दी। इसका नतीजा यह हुआ कि सोना काफी महंगा हो गया है और उसी का असर 18 कैरेट गोल्ड से बनी विश्व कप ट्रॉफी पर पड़ा है।

कितना सोना है ट्रॉफी में?

आंकड़ों में थोड़ा अंतर जरूर है, लेकिन मोटे तौर पर फीफा विश्व कप ट्रॉफी का कुल वजन 6.142 से 6.175 किलोग्राम के बीच माना जाता है। यह अंदर से खोखली है। इसमें करीब 4.93 से 5.092 किलोग्राम शुद्ध सोना इस्तेमाल हुआ है। ट्रॉफी का बेस मैलाकाइट स्टोन की दो परतों से बना है। सबसे निचले हिस्से में 13 सेंटीमीटर व्यास का सोने का बेस है, जहां 1974 के बाद खिताब जीतने वाली टीमों के नाम उकेरे जाते हैं। बहुत कम लोग जानते हैं कि फाइनल जीतने वाली टीम को जो ट्रॉफी दी जाती है, वह असली नहीं होती। फीफा की ऑरिजनल ट्रॉफी ज्यूरिख स्थित फीफा म्यूजियम में सुरक्षित रहती है। सेरेमनी के बाद विजेता टीम को ब्रॉन्ज से बनी गोल्ड प्लेटेड रेप्लिका दी जाती है। इसे फीफा वर्ल्ड कप विनर्स ट्रॉफी कहा जाता है। हर विजेता टीम को अलग विनर्स ट्रॉफी मिलती है, जिसे वे हमेशा अपने पास रख सकते हैं।

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फीफा ट्रॉफी (FIFA/X)

साल 1974 में पहली बार दी गई थी यह ट्रॉफी

मौजूदा डिजाइन की ट्रॉफी पहली बार 1974 में वेस्ट जर्मनी को दी गई थी। इटली के मूर्तिकार सिल्वियो गज़ानिया ने इसे डिजाइन किया था। दुनिया भर से आए 53 डिजाइनों में उनका डिजाइन चुना गया। इसमें दो इंसानी आकृतियों को पृथ्वी को उठाए हुए दिखाया गया है, जो जीत के उत्साह और एथलीटों की शक्ति का प्रतीक है। 1974 से 2022 के बीच अर्जेंटीना ने तीन बार 1978, 1986, 2022, इटली और जर्मनी ने दो-दो बार, ब्राजील ने 1994, 2002, फ्रांस ने 1998, 2018 और स्पेन ने 2010 में खिताब जीता। नई ट्रॉफी में सबसे ज्यादा तीन बार अर्जेंटीना का नाम उकेरा गया है। 2022 में आखिरी बार लियोनेल मेसी की टीम का नाम इसमें जोड़ा गया था।

1974 में कितनी थी कीमत?

जब 1974 में पहली बार यह ट्रॉफी दी गई थी, तब इसमें लगे सोने की कीमत करीब 25,000 डॉलर थी। 52 साल में यह आंकड़ा 28 गुना बढ़कर 7.13 लाख डॉलर पहुंच गया है। 2018 में रूस विश्व कप के समय इसकी कीमत 1.61 लाख डॉलर थी। 2022 में 2.77 लाख डॉलर और अब 2026 में 7.13 लाख डॉलर। फीफा विश्व कप अकेली ऐसी बड़ी खेल ट्रॉफी है जो सोने से बनी है। यूएफा चैंपियंस लीग और यूरोपा लीग की ट्रॉफियां स्टर्लिंग सिल्वर से बनती हैं। एलएसईजी के अनुसार चैंपियंस लीग ट्रॉफी की मेटल वैल्यू 16,950 डॉलर और यूरोपा लीग की 22,600 डॉलर है। अमेरिका की इंडियापोलिस 500 मोटर रेस की बोर्ग-वार्नर ट्रॉफी सबसे भारी है। 1.62 मीटर ऊंची इस ट्रॉफी में 69 किलोग्राम स्टर्लिंग सिल्वर है, जिसकी कीमत 1.56 लाख डॉलर है। लेकिन मेटल वैल्यू के मामले में फीफा ट्रॉफी सबसे आगे है।

Aditya Sahu
आदित्य साहूauthor

आदित्य साहू टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में स्पोर्ट्स और ट्रेडिंग कंटेंट लिखतें हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स की डिग्री हासिल करने के बाद वह पिछले 10 सालों से मीडिया में सक्रिय हैं। स्पोर्ट्स इवेंट की रियल टाइम कवरेज, डाटा टॉपिक्स और अनोखे कंटेंट आइडियाज को आकर्षक और एंगेजिंग तरीके से प्रस्तुत करना आदित्य की खासियत है। उनकी कॉपी राइटिंग और इंटरेस्टिंग हेडलाइन बनाने की क्षमता उन्हें डिजिटल दुनिया में अलग पहचान देती है। 15,000 से अधिक बायलाइन स्टोरी पब्लिश कर चुके आदित्य का लक्ष्य हर खबर को यूनिक एंगल और स्टोरीटेलिंग के रोचक अंदाज में पेश करना है।

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