भारत-इंग्लैंड टेस्ट सीरीज के नए नाम का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। पहले द ग्रेट सुनील गावस्कर ने इसका नाम पटौदी से बदलकर तेंदुलकर-एंडरसन ट्रॉफी किए जाने पर सवाल उठाया था तो अब उन्होंने तेंदुलकर का नाम एंडरसन के बाद लिखे जाने पर सवाल खड़ा किया है। भारत और इंग्लैंड के बीच पांच टेस्ट मैचों की सीरीज से ठीक पहले, इस बहुप्रतीक्षित ट्रॉफी का दोनों दिग्गजों के हाथों से अनावरण कराया गया। गावस्कर ने कहा कि तेंदुलकर की उपलब्धि एंडरसन से कहीं आगे है, भले ही अल्फाबेटिकल ऑर्डर में 'ए' 'टी' से पहले आता हो।
गावस्कर ने मिड-डे के लिए अपने कॉलम में लिखा, "ECB को पूरी छूट है कि वो इस सीरीज़ का नाम अपनी मर्जी से रखे, लेकिन हमारी तरह हर भारतीय क्रिकेट फैंस को यह नहीं पचेगा कि एंडरसन का नाम तेंदुलकर से पहले आता है।" उन्होंने यह भी तर्क दिया कि सचिन तेंदुलकर, कपिल देव के साथ, भारत के सबसे महान क्रिकेटरों में गिने जाते हैं। टेस्ट क्रिकेट में रन और शतकों के मामले में तेंदुलकर अव्वल हैं, और वनडे क्रिकेट में भी उन्होंने सबसे ज़्यादा रन बनाए हैं। जबकि एंडरसन टेस्ट में विकेटों की सूची में तीसरे स्थान पर हैं, लेकिन वनडे में उनका रिकॉर्ड तेंदुलकर के मुकाबले कहीं नहीं टिकता।
उन्होंने आगे लिखा 'तेंदुलकर एक विश्व कप जीतने वाली टीम का हिस्सा हैं, जबकि एंडरसन ने तो वर्ल्ड कप भी नहीं जीता है। वह एक शानदार गेंदबाज़ रहे हैं, लेकिन यह भी सच है कि उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन इंग्लैंड की धरती पर आए हैं। विदेशी मैदानों पर उनका रिकॉर्ड तेंदुलकर की तुलना में कहीं नहीं ठहरता। हर लिहाज से देखा जाए तो तेंदुलकर का नाम पहले आना चाहिए। ‘ए’ पहले आता है और ‘टी’ बाद में—अल्फाबेटिकल ऑर्डर का यह तर्क बेहद कमजोर है, क्योंकि तेंदुलकर ने जो देश के लिए किया है, उसकी तुलना एंडरसन के प्रदर्शन से की ही नहीं जा सकती।"
हालांकि, उन्होंने साथ में यह भी कहा कि इसे गलत न समझें, एंडरसन के लिए मेरे दिल में काफी सम्मान है, लेकिन एक भारतीय होने के नाते, मेरे लिए तेंदुलकर हमेशा उनसे ऊपर रहेंगे। मैं सभी भारतीय क्रिकेट प्रेमियों और मीडिया से आग्रह करता हूं कि वे इसे 'तेंदुलकर-एंडरसन ट्रॉफी' कहें।"
