सौरव गांगुली(फोटो क्रेडिट BCCI)
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बार फिर सौरव गांगुली का समर्थन करते हुए कहा कि पूर्व भारतीय कप्तान को अब तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) का अध्यक्ष बन जाना चाहिए था।ममता ने अपने चिरपरिचित अंदाज में कहा कि ‘उन्हें रोकना इतना आसान नहीं है।' शनिवार को ईडन गार्डन्स में विश्व कप विजेता ऋचा घोष के सम्मान समारोह के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने गांगुली और इस युवा क्रिकेटर दोनों की सराहना की। उन्होंने इसके बाद लंबे समय तक विवादों में रहे विषय पर कहा,'हम हमेशा चाहते थे कि गांगुली लंबे समय तक भारत के कप्तान बने रहें।'
ममता बनर्जी ने आगे कहा,'एक और बात जो मुझे कहनी चाहिए, अगर मैं यह कहूं तो गांगुली को बुरा लग सकता है, लेकिन मैं थोड़ी मुखर हूं और हमेशा कड़वा सच बोलती हूं, मैं इसे कभी नहीं बदल पाई। आज आईसीसी अध्यक्ष किसको होना चाहिए था? कोई और नहीं, बल्कि सौरव गांगुली को। भले ही वह अभी आईसीसी अध्यक्ष नहीं बने हों, लेकिन मुझे पूरा विश्वास है कि एक दिन वह जरूर बनेंगे। उन्हें रोकना इतना आसान नहीं है।'
आईसीसी अध्यक्ष के पद पर वर्तमान में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पुत्र जय शाह काबिज हैं जो बीसीसीआई सचिव के रूप में चार साल के कार्यकाल के बाद दिसंबर 2024 में सबसे कम उम्र के आईसीसी अध्यक्ष बने थे। गांगुली की जगह रोजर बिन्नी के बीसीसीआई अध्यक्ष पद पर आने के दो साल बाद शाह इस वैश्विक पद पर आसीन हुए। गांगुली और शाह ने अक्टूबर 2019 से सितंबर 2022 तक बीसीसीआई में साथ काम किया था। इस दौरान पूर्व कप्तान के प्रशासनिक कार्यकाल को स्थिर लेकिन राजनीतिक रूप से तनावपूर्ण माना गया था।
उस समय रिपोर्टों में सुझाव दिया गया था कि बोर्ड के भीतर की राजनीति ने गांगुली के बीसीसीआई से जाने में भूमिका निभाई होगी। गांगुली और शाह दोनों ने हालांकि सार्वजनिक रूप से सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखे हैं। गांगुली 2015 में बंगाल क्रिकेट संघ के अध्यक्ष बने और चार साल बाद वह बीसीसीआई के अध्यक्ष बने थे। पर इस साल सितंबर में वह बंगाल क्रिकेट संघ के अध्यक्ष पद पर लौट आए।
(भाषा)
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