स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। 'हम बैजबॉल को पूरी तरह से छोड़ेंगे नहीं।' ये शब्द इंग्लैंड के नए कप्तान जो रूट के हैं। पूर्व हेड कोच ब्रेंडन मैकुलम का कॉन्ट्रैक्ट समाप्त होने और बेन स्टोक्स के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास के बाद इंग्लैंड क्रिकेट से बैजबॉल एरा समाप्त हो गया। लेकिन रूट ने पाकिस्तान के खिलाफ पहले टेस्ट मैच से पहले अपने बयान से नई हुंकार भरी है। इंग्लैंड और पाकिस्तान के बीच तीन टेस्ट मैच की सीरीज का पहला मुकाबला बुधवार से खेला जाएगा। यह बैजबॉल एरा के खत्म होने के बाद इंग्लैंड का पहला टेस्ट मैच होगा।
जून 2022 से जुलाई 2026 तक चले इस दौर ने टेस्ट खेलने का नजरिया पूरी तरह से बदल दिया। कोच ब्रेंडन मैकुलम और बेन स्टोक्स की जोड़ी ने इंग्लैंड को हार के डर से मुक्त करा कर एक ऐसी आक्रामक शैली दी, जिसने दुनिया भर के क्रिकेट फैंस को रोमांचित किया। आइए जानते हैं बैजबॉल के पूरे सफर के बारे में।
2022 के मिड से हुई शुरुआत
मई 2022 में जब ब्रेंडन मैकुलम इंग्लैंड टेस्ट टीम के कोच और बेन स्टोक्स कप्तान बने, तब इस युग की नींव रखी गई। थे तो ये दो अलग-अलग व्यक्ति, लेकिन इन सोच एक जैसी रही। उस समय इंग्लैंड की टीम दबाव में थी और अपने पिछले 17 टेस्ट में से सिर्फ 1 जीत पाई थी। इसके बाद टीम ने अटैकिंग क्रिकेट की रणनीति अपनाई, जिसका मुख्य उद्देश्य मैच ड्रॉ कराने की मानसिकता को पूरी तरह खत्म कर मैच का नतीजा निकालने पर ध्यान केंद्रित किया।
टीम के प्रदर्शन में आया बदलाव
यही वजह रही कि इंग्लैंड ने बैजबॉल एरा में कुल 49 टेस्ट मैच खेले और मात्र दो मैच ड्रॉ रहा। जून 2022 से जुलाई 2026 के बीच खेले गए इन मैचों में इंग्लैंड ने 27 मैच जीते और 20 मुकाबले गंवाए। इस दौरान उनकी जीत का प्रतिशत 55.1% रहा। सबसे बड़ा बदलाव रन बनाने की गति में आया। बैजबॉल से पहले टीम का रन रेट लगभग 3.09 रन प्रति ओवर था, जो इस दौर में बढ़कर 4.54 लगभग 5 रन प्रति ओवर हो गया।
बैजबॉल का वर्ल्ड क्रिकेट पर असर
इंग्लैंड की इस शैली ने विश्व टेस्ट क्रिकेट पर गहरा असर डाला। अन्य टीमों ने यह महसूस किया कि केवल रक्षात्मक खेलने के बजाय तेजी से रन बनाकर विपक्षी टीम पर दबाव डालना भी जरूरी है। यही वजह रही कि इन चार सालों में हुए 169 टेस्ट मैचों में से सिर्फ 15 मैच ही ड्रॉ पर समाप्त हुए, जबकि इससे पहले के चार सालों में हुए 159 टेस्ट मैच में से 22 मैच ड्रॉ रहे थे।
सबसे अच्छा और खराब प्रदर्शन
बैजबॉल के दौरान इंग्लैंड ने जून 2022 में ट्रेंट ब्रिज में न्यूजीलैंड के खिलाफ 299 रन का स्कोर 50 ओवर में चेज कर सभी को हैरान कर दिया। इसके बाद उसी साल रावलपिंडी में खेले गए टेस्ट मैच के पहले दिन 75 ओवर में चार विकेट के नुकसान पर 504 रन बनाकर सभी को चौंका दिया। फिर एजबेस्टन में भारत के खिलाफ 378 रनों का टारगेट हासिल कर अपनी रणनीति का लोहा मनवा दिया। हालांकि, बैजबॉल का खराब प्रदर्शन फरवरी 2023 में न्यूजीलैंड के खिलाफ वेलिंग्टन में फॉलोऑन देने के बाद 1 रन से मिली करीबी हार रही। वहीं, जुलाई 2026 में न्यूजीलैंड के हाथों 160 रनों की शिकस्त सबसे निराशानजनक पल थे।
कैसे-क्यों हो गया पतन
इस दौर का पतन अति-आक्रामकता और परिस्थितियों के अनुसार खुद को न ढाल पान की जिद के कारण हुआ। 2024 में राजकोट में रूट का खराब समय पर रिवर्स स्कूप खेलकर आउट होना और 2025 की एशेज में पिच की मांग के बावजूद क्रीज पर समय न बिताना हार के कारण बने। विरोधियों ने भांप लिया था कि इंग्लैंड के बल्लेबाज दबाव में धैर्य खोकर विकेट आसानी से दे देंगे। अंत में 2026 में न्यूजीलैंड से हार के बाद स्टोक्स को संन्यास लेना पड़ा और मैकलुम को हटा दिया गया।
हालांकि, इंग्लैंड अब पाकिस्तान के खिलाफ तीन टेस्ट मैच की सीरीज से नई शुरुआत करेगा, लेकिन रूट के बयान के बाद यह तो तय माना जा रहा है कि इंग्लैंड फिलहाल बैजबॉल को पूरी तरह से नहीं छोड़ेगा, लेकिन वह परिस्थितियों के हिसाब से खेलने को बाध्य जरूर होंगे।
