आईसीसी टी20 विश्व कप 2022 में टीम इंडिया के सेमीफाइनल में हारकर बाहर हो जाने के बाद एक सवाल लगातार उठ रहा है कि क्या विदेशी टी20 लीग में ना खेलने का खामियाजा भारत को भुगतना पड़ा है? दरअसल, तमाम अन्य देशों के खिलाड़ी बिग बैश लीग जैसी विदेशी टी20 लीग में हिस्सा लेते हैं जिससे उन्हें ऑस्ट्रेलिया व अन्य देेशों की पिचों व माहौल का अच्छा अनुभव होता है, लेकिन भारतीय खिलाड़ियों के साथ ऐसा नहीं होता। यही सवाल कोच राहुल द्रविड़ से भी पूछा गया था लेकिन उन्होंने बीसीसीआई के फैसले के बचाव किया। अब वेस्टइंडीज के पूर्व कप्तान डेरेन सैमी ने भी यही मुद्दा उठाया है।
डेरेन सैमी ने कहा है कि भारतीय क्रिकेटरों का विदेशी लीग में नहीं खेलना भी टी20 विश्वकप में उनके खराब प्रदर्शन की एक बड़ी वजह है। गौरतलब है कि बीसीसीआई का नियम है जिसके तहत भारत के किसी भी सक्रिय खिलाड़ी को विदेशी टी20 लीग में खेलने की अनुमति नहीं है।
वेस्टइंडीज को 2012 और 2016 में टी20 विश्व कप का खिताब दिलाने वाले सैमी ने कहा कि इंग्लैंड को उसके खिलाड़ियों के विदेशी लीग विशेषकर ऑस्ट्रेलिया की बिग बैश में खेलने का फायदा मिला।
सैमी ने आईसीसी की विज्ञप्ति में कहा,‘‘विश्व भर की टी20 लीग में खेलने वाले खिलाड़ियों ने वास्तव में अपनी चमक बिखेरी। आप भारत को देखिए जिसकी सबसे बड़ी टी20 लीग है लेकिन उसके खिलाड़ियों को उन खिलाड़ियों जैसा अनुभव नहीं है जो विश्व भर में विभिन्न लीग में खेल रहे हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘आप एलेक्स हेल्स, क्रिस जॉर्डन जैसे खिलाड़ियों को देखें जो कि बिग बैश में खेलते हैं। यह कोई संयोग नहीं है कि उन्होंने (इंग्लैंड) ऑस्ट्रेलिया में अच्छा प्रदर्शन किया। इंग्लैंड की टीम सबसे संपूर्ण टीम थी और वे चैंपियन बनने के सच्चे हकदार थे। उन्होंने सभी दबाव वाले मैचों में दिखाया कि उनके पास सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडर टीम है।’’
इंग्लैंड ने रविवार को मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर पाकिस्तान को पांच विकेट से हराकर टी20 विश्वकप का खिताब जीता। वह एकमात्र टीम है जिसके पास एक ही समय में वनडे और टी20 विश्व कप के खिताब हैं।
