अध्यात्म

क्यों पूजा में दीपक जलाना है जरूरी, जानिए क्या है इसका महत्व?

Puja Mein Deepak Ka Mahatva: शास्त्रों में पूजा के समय दीपक जलाना काफी आवश्यक माना जाता है। मान्यता है कि दीपक जलाए बिना की गई पूजा सफल नहीं होती है। इसके साथ ही दीपक जलाने के भी नियम भी बताए गए हैं, जिनको अपनाने से पूजा सफल होती है और सभी प्रकार की मनोकमानाएं पूरी होती हैं।

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क्यों जरूरी है पूजा में दीपक

Puja Mein Deepak Ka Mahatva: पूजा में दीपक जलाना केवल रस्म नहीं, बल्कि शास्त्रों द्वारा निर्धारित अनिवार्य अंग है। स्कंद पुराण, पद्म पुराण, अग्नि पुराण, ब्रह्मवैवर्त पुराण और वास्तु ग्रंथों में के अनुसार बिना दीपक के कोई पूजा, यज्ञ या अनुष्ठान सफल नहीं होता है। दीपक को परम ब्रह्म का स्वरूप माना जाता है, जो अज्ञान के अंधकार को नष्ट कर ज्ञान का प्रकाश फैलाता है और हमारी प्रार्थना को देवलोक तक पहुंचाता है। आइए जानते हैं कि दीपक कैसे जलाना चाहिए?

कैसा होना चाहिए दीपक?

शास्त्रों में मिट्टी का साफ-सुथरा दीपक सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इसके साथ ही पांच प्रकार के अनाजों जैसे गेहूं, चावल, मूंग, उड़द और ज्वार के आटे से बना दीपक भी पूजा लिया जाता है। धातुओं में पीतल का दीपक आयु और धन वृद्धि के लिए उत्तम है, उसके बाद तांबा और चांदी शुभ हैं। टूटा-फूटा या गंदा दीपक कभी प्रयोग न करें, क्योंकि इससे पूजा का फल नष्ट हो जाता है।

कैसी होनी चाहिए दीपक की बाती?

ब्रह्मवैवर्त पुराण, देवी भागवत और अग्नि पुराण में केवल दो पदार्थों का ही विधान है। इसमें शुद्ध देशी गाय का घी और शुद्ध तिल का तेल पूजा में प्रयोग में लाना चाहिए। इसके अलावा सरसों का तेल विशेष प्रकार के उपायों में प्रयोग किया जाता है। बाती के लिए लाल मौली (कलावा) सबसे उत्तम है, जो मां लक्ष्मी को शीघ्र प्रसन्न करती है। इसके साथ ही रूई की बाती भी प्रयोग में लाई जा सकती है।

दिशा का महत्व और फल

पूर्व दिशा की ओर लौ रखने से आयु, विद्या और सूर्य कृपा प्राप्त होती है, जबकि उत्तर दिशा की ओर लौ रखने से धन-धान्य में वृद्धि होती है और कुबेर प्रसन्न होते हैं। पूजा करते समय घी का दीपक दाहिनी ओर और तेल का दीपक बाईं ओर रखें। मुख्य द्वार पर दोनों ओर दो दीपक जलाने से मां लक्ष्मी स्थायी रूप से निवास करती हैं।

शरीर की नाड़ियों के जाग्रत करता है दीपक

तिल तेल का दीपक मूलाधार एवं स्वाधिष्ठान चक्र को शुद्ध करता है तथा सूर्य नाड़ी को जागृत करता है। वहीं शुद्ध गाय के घी का दीपक मणिपुर और अनाहत चक्र को पूर्णतः शुद्ध करता है तथा इड़ा, पिंगला और सुषुम्ना तीनों प्रमुख नाड़ियों को जागृत करता है।

कितने मुख का होना चाहिए दीपक

शास्त्रों में विभिन्न मुखों वाले दीपक का विधान है। इसमें एक मुखी सामान्य पूजा और ईश्वर कृपा के लिए, दो मुखी मां सरस्वती और विद्या के लिए, तीन मुखी गणेश जी और विघ्न नाश के लिए, सात मुखी मां लक्ष्मी के लिए, नौ मुखी कर्ज मुक्ति और दुर्गा पूजा के लिए, ग्यारह मुखी हनुमान जी और शत्रु नाश के लिए तथा सोलह मुखी भगवान विष्णु की कृपा के लिए जलाया जाता है।

ये बरतें सावधानियां

दीपक को कभी मुंह से या हाथ से न बुझाएं। जलते दीपक से धूप-अगरबत्ती न जलाएं, बिना स्नान किए दीपक न छुएं। टूटे दीपक प्रयोग न करें और दीपक को भूमि पर न रखें। पूजा के अंत में कपूर जलाकर घर में घुमाएं और आचमन का जल छिड़कें, ताकि पूजा का फल पूरे परिवार को मिले।

दीप प्रज्वलन मंत्र

ॐ दीपज्योतिः परब्रह्म दीपज्योतिर्जनार्दनः।

दीपो हरतु मे पापं संध्या दीप नमोऽस्तु ते॥

शुभं करोतु कल्याणं आरोग्यं धनसंपदा।

शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तुते॥

शास्त्रों के अनुसार जब एक छोटा सा दीपक जब शास्त्रोक्त विधि से जलाया जाता है, तो वह दरिद्रता, रोग, कलह और नकारात्मकता का नाश कर देवकृपा, धन, आरोग्य और मनोवांछित फल प्रदान करता है।

डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी शास्त्र पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।

Mohit Tiwari
मोहित तिवारीauthor

मोहित तिवारी को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रतिष्ठित न्यूजपेपर में फील्ड रिपोर्टिंग से की थी। मोहित ने प्रिंट, टीवी और डिजिटल तीनों प्लेटफॉर्म पर काम किया है। देश-विदेश, लाइफस्टाइल, धर्म और आध्यात्मिक विषयों में गहरी रुचि रखने वाले मोहित ने ज्योतिष का भी व्यापक अध्ययन किया है। मोहित के आलेख लाइफस्टाइल, हेल्थ, न्यूज, धर्म, ज्योतिष आदि विषयों पर गहरी शोध और प्रामाणिकता पर आधारित होते हैं और इन विषयों पर वह 12,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं।

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