अध्यात्म

Hasanamba Temple Opening Date 2026: साल 2026 में कब खुलेंगे हसनंबा मंदिर के कपाट, क्यों सिर्फ 12 दिन ही होते हैं देवी के दर्शन

Hasanamba Temple Opening Date 2026: कर्नाटक का हसनंबा मंदिर कब खुलेगा 2026 में। जानें हसनंबा मंदिर में दर्शन किस की तारीख से शुरू होंगे। साथ ही पढ़ें मंदिर की पौराणिक कथा, महत्व और कैसे हो सकते हैं दर्शन।

Image

साल में सिर्फ एक बार क्यों खुलता है हसनंबा मंदिर, क्यों कब 12 दिन ही होते हैं दर्शन ( Image: Wikipedia)

Hasanamba Temple Opening Date 2026 in Hindi: भारत में देवी मां के कई प्रसिद्ध मंदिर हैं, लेकिन कर्नाटक का हसनंबा मंदिर अपनी अनोखी परंपराओं के कारण अलग पहचान रखता है। इस मंदिर के कपाट साल में केवल एक बार खोले जाते हैं। बाकी समय देवी का गर्भगृह बंद रहता है। मान्यता है कि मंदिर बंद करते समय जलाया गया दीपक अगले साल भी जलता मिलता है। इतना ही नहीं, देवी को चढ़ाए गए फूल और प्रसाद के बारे में भी कई चमत्कारी कहानियां सुनाई जाती हैं। यही वजह है कि हर साल हजारों नहीं, बल्कि लाखों श्रद्धालु मंदिर के कपाट खुलने का इंतजार करते हैं। आइए जानते हैं कि 2026 में हसनंबा मंदिर कब खुलेगा, दर्शन की आखिरी तारीख क्या है और इस मंदिर से कौन सी पौराणिक कथा जुड़ी है।

हसनंबा मंदिर 2026 में कब खुलेगा (Hasanamba Temple Opening and Closing Date 2026)

कर्नाटक के हासन जिले में स्थित हसनंबा देवी मंदिर के कपाट 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार को दोपहर 12 बजे खोले जाएंगे। हालांकि, पहले दिन विशेष धार्मिक अनुष्ठान होंगे। आम श्रद्धालुओं के लिए दर्शन 30 अक्टूबर से शुरू होंगे और 10 नवंबर 2026 तक चलेंगे।

मंदिर का वार्षिक महोत्सव 29 अक्टूबर से 11 नवंबर तक आयोजित होगा। यह जानकारी मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट और भारत सरकार के पर्यटन पोर्टल पर दी गई है।

  • हसनंबा मंदिर के कपाट खुलेंगे : 29 अक्टूबर 2026
  • आम श्रद्धालुओं के दर्शन : 30 अक्टूबर 2026 से
  • दर्शन की अंतिम तारीख 10 नवंबर 2026
  • वार्षिक महोत्सव का समापन 11 नवंबर 2026

साल में सिर्फ एक बार क्यों खुलता है हसनंबा मंदिर

हसनंबा मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि यहां देवी के दर्शन पूरे साल नहीं किए जा सकते। मंदिर के गर्भगृह के कपाट दीपावली के आसपास निर्धारित दिनों के लिए खोले जाते हैं।

स्थानीय धार्मिक परंपरा के अनुसार, देवी हसनंबा इस स्थान पर विराजमान हैं और वर्ष में एक बार भक्तों को विशेष दर्शन देती हैं। मंदिर के कपाट धार्मिक विधि-विधान के साथ खोले जाते हैं। इस दौरान जिला प्रशासन और मंदिर के पुजारी भी उपस्थित रहते हैं। कपाट खुलने पर पूरे हासन शहर में उत्सव जैसा माहौल होता है। दूर-दूर से श्रद्धालु देवी के दर्शन करने पहुंचते हैं। कई परिवारों के लिए यह साल की सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक यात्रा होती है।

कौन हैं देवी हसनंबा, जानें मंदिर की पौराणिक कथा (Hasanamba Temple Story)

हसनंबा देवी को मां शक्ति का स्वरूप माना जाता है। इस मंदिर से सप्तमातृकाओं की एक प्राचीन कथा जुड़ी है। मान्यता है कि एक बार सात मातृ शक्तियां वाराणसी से भ्रमण करते हुए हासन क्षेत्र में पहुंचीं। यहां का शांत वातावरण और प्राकृतिक सुंदरता उन्हें इतनी पसंद आई कि उन्होंने इसी क्षेत्र में रहने का निर्णय लिया।

लोककथाओं के अनुसार, वैष्णवी, माहेश्वरी और कौमारी सहित कई मातृ शक्तियों ने इस क्षेत्र में अलग-अलग स्थानों को अपना निवास बनाया। इन्हीं धार्मिक मान्यताओं से हसनंबा देवी की पूजा परंपरा जुड़ी हुई है।

एक दूसरी कथा अंधकासुर नाम के राक्षस से संबंधित है। कहा जाता है कि अंधकासुर के अत्याचारों से स्थानीय लोग परेशान थे। तब देवी ने शक्ति रूप में प्रकट होकर उसका अंत किया और क्षेत्र में शांति स्थापित की। इसीलिए भक्त देवी हसनंबा को संकट दूर करने वाली और रक्षा करने वाली माता के रूप में पूजते हैं।

हसनंबा मंदिर का चमत्कार: सालभर कैसे जलता रहता है दीपक

इस मंदिर के बारे में सबसे ज्यादा चर्चा उस दीपक की होती है, जिसे कपाट बंद करने से पहले जलाया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि जब अगले वर्ष मंदिर खोला जाता है, तब भी यह दीपक जलता हुआ मिलता है। इसे नंदा दीप कहा जाता है। भक्तों का विश्वास है कि यह देवी की दिव्य शक्ति का प्रतीक है।

देवी को चढ़ाए फूल और प्रसाद भी नहीं होते खराब

दीपक के अलावा हसनंबा मंदिर में चढ़ाए जाने वाले फूल और प्रसाद को लेकर भी अनोखी मान्यता है। कहा जाता है कि कपाट बंद करते समय देवी को चढ़ाए गए फूल अगले वर्ष भी ताजे मिलते हैं। इसी तरह चावल का प्रसाद भी खराब नहीं होता। श्रद्धालु इसे माता की कृपा मानते हैं। इन कथाओं के कारण मंदिर को लेकर लोगों की उत्सुकता और श्रद्धा दोनों बनी रहती हैं।

कितना पुराना है हसनंबा मंदिर (Hasanamba Temple History)

हसनंबा मंदिर का इतिहास लगभग 12वीं शताब्दी से जुड़ा माना जाता है। स्थानीय इतिहास और अभिलेखों में इस क्षेत्र का संबंध होयसला काल से मिलता है। मंदिर की वास्तुकला में द्रविड़ शैली की झलक दिखाई देती है। परिसर में देवी हसनंबा के अलावा दरबार गणपति और सिद्धेश्वर स्वामी के मंदिर भी हैं।

सिद्धेश्वर मंदिर की एक विशेषता भगवान शिव का वह स्वरूप है, जिसमें वे अर्जुन को पाशुपतास्त्र प्रदान करते दिखाई देते हैं।

मंदिर से जुड़ी एक अन्य लोककथा में तीन चोरों का उल्लेख मिलता है। कहा जाता है कि वे देवी की मूर्ति चुराने आए थे, लेकिन देवी के प्रकोप का सामना करना पड़ा। मंदिर परिसर में उनसे जुड़ी प्रतिमाओं के बारे में भी बताया जाता है।

हसनंबा मंदिर में दर्शन के लिए टिकट कितने का है

2026 में श्रद्धालुओं के लिए मुफ्त दर्शन के साथ विशेष दर्शन की व्यवस्था भी की गई है।

  • सामान्य दर्शन: निःशुल्क
  • विशेष दर्शन: ₹300
  • वीआईपी दर्शन: ₹1,000

दर्शन टिकट और दिन के अनुसार समय की जानकारी मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट srihassanaambatemple.com पर उपलब्ध है।

हसनंबा मंदिर कैसे पहुंचें (How to Reach Hasanamba Temple)

हसनंबा मंदिर कर्नाटक के हासन शहर में स्थित है। बेंगलुरु से इसकी दूरी लगभग 187 किलोमीटर और मैसूर से करीब 115 किलोमीटर है। बेंगलुरु एयरपोर्ट यहां पहुंचने के लिए प्रमुख हवाई विकल्प है। हासन रेलवे स्टेशन भी कई शहरों से जुड़ा हुआ है। सड़क मार्ग से बेंगलुरु और मैसूर से बस या टैक्सी ली जा सकती है।

इस साल कर्नाटक पर्यटन विभाग ने विशेष टूर पैकेज भी तैयार किए हैं। बेंगलुरु से एक दिवसीय पैकेज ₹2,300 और मैसूर से ₹2,150 प्रति व्यक्ति से उपलब्ध बताया गया है। इनमें विशेष दर्शन टिकट भी शामिल है।

Medha Chawla
मेधा चावलाauthor

मेधा चावला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन की लीड हैं। लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव रखने वाली मेधा की विशेषज्ञता हेल्थ, वेलनेस, फिटनेस, मेंटल हेल्थ, डेली लाइफ इम्प्रूवमेंट, ह्यूमन-इंटरेस्ट फीचर्स और रिसर्च-बेस्ड स्टोरीज तक फैली है। उनकी लेखन शैली पाठकों को जटिल स्वास्थ्य और जीवनशैली संबंधी विषयों को आसान, समझने योग्य और व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करती है, जिससे उनका कंटेंट व्यापक पाठक समूह से जुड़ता है। अबतक 30,000 से अधिक कंटेंट पीस लिख चुकी मेधा की कई एक्सक्लूसिव स्टोरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड सेट कर चुकी हैं।

और पढ़ें
End of Article