Vishnu Ji Ki Aarti Lyrics: भगवान विष्णु जी को जगत का पालनहार माना जाता है। कहते हैं जो कोई भी इनकी सच्चे मन से अराधना करता है उसके जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। साथ ही रोजाना पूजा के समय भगवान विष्णु जी की आरती करने से घर में सुख समृद्धि का वास रहता है। श्री हरी विष्णु जी की भक्ति करने से मां लक्ष्मी भी प्रसन्न होती हैं। जिससे घर में धन-धान्य की कभी कमी नहीं होती। यहां देखें भगवान विष्णु की आरती।
श्री हरि विष्णु जी की आरती (Om Jai Jagdish Hare Aarti Lyrics)
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥
जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।
सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय...॥
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय...॥
तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी॥
पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय...॥
तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय...॥
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय...॥
दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय...॥
विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय...॥
तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥ ॐ जय...॥
जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय...॥
