अध्यात्म

Vastu Shastra: क्या टूटी चप्पल को सिलवाकर पहनना चाहिए? जानिए क्या कहता है वास्तु

Vastu Tips: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पैरों और जूतों का संबंध शनि ग्रह से माना जाता है। शनि कर्म, अनुशासन और जीवन के संघर्षों के कारक ग्रह माने जाते हैं।

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क्यों टूटी चप्पल पहनने से रुक सकती है आपकी तरक्की (AI Image)

Vastu Tips: हम अकसर बहुत सी चीजें सिर्फ इसीलिए करते हैं क्योंकि ऐसा ही किया जाता रहा है। ऐसी ही कुछ आदतों में से एक है टूटी चप्पलों को दोबारा सिलवाकर पहनना। हमें लगता है कि फटी पुरानी चप्पलों की मरमम्त करवा ली जाए तो ये कुछ दिन और चल जाएगा। हालांकि ऐसा करना आपको भारी पड़ सकता है। दरअसल ज्योतिष और वास्तु शास्त्र में इसे शुभ नहीं माना गया है। मान्यता है कि टूटे हुए जूते-चप्पल न केवल व्यक्ति की छवि को प्रभावित करते हैं, बल्कि जीवन में नकारात्मक ऊर्जा का कारण भी बन सकते हैं।

शनि ग्रह से जुड़ा माना जाता है पैरों का संबंध

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पैरों और जूतों का संबंध शनि ग्रह से माना जाता है। शनि कर्म, अनुशासन और जीवन के संघर्षों के कारक ग्रह माने जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि जब कोई व्यक्ति फटे या टूटे हुए जूते-चप्पल पहनता है, तो वह अनजाने में शनि से जुड़ी नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित कर सकता है।

वैसे तो इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है, लेकिन पारंपरिक मान्यताओं में इसे आर्थिक परेशानियों और कार्यों में बाधा से जोड़कर देखा जाता है।

क्या कहता है वास्तु

वास्तु शास्त्र मानता है कि हर वस्तु में ऊर्जा होती है और टूटी हुई चीजें घर में नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करती हैं। टूटी चप्पल को घर के भीतर रखना या पहनना वास्तु दोष उत्पन्न करता है। यह स्थिति घर में अशांति, मानसिक तनाव और कलह का कारण बन सकती है।

चप्पलें बाहर की गंदगी, धूल और नकारात्मकता को घर तक लाती हैं। यदि वे टूटी हुई हों, तो यह प्रतीक है कि आप उन बाहरी बाधाओं और नकारात्मकताओं को बिना किसी रुकावट के अपने जीवन और घर में प्रवेश दे रहे हैं।

वास्तु के अनुसार, फटे-पुराने जूते-चप्पल, दरिद्रता की देवी अलक्ष्मी को आमंत्रित करती हैं, जो धन की देवी मां लक्ष्मी की विरोधी हैं। टूटी चप्पल धन के आगमन को बाधित करती है और अनावश्यक खर्चों में वृद्धि करती है।

आर्थिक स्थिति पर भी पड़ सकता है असर

लोक मान्यताओं के अनुसार फटे हुए जूते-चप्पल आर्थिक तंगी और धन के अनावश्यक खर्च का संकेत माने जाते हैं। माना जाता है कि जब व्यक्ति अपनी रोजमर्रा की वस्तुओं का सम्मान नहीं करता, तो उसका असर जीवन की व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। यही कारण है कि कई लोग नए काम, इंटरव्यू या शुभ अवसरों पर साफ और अच्छे जूते पहनने को महत्व देते हैं।

आत्मविश्वास पर भी पड़ता है प्रभाव

टूटे हुए जूते-चप्पल केवल धार्मिक या वास्तु दृष्टि से ही नहीं, बल्कि व्यवहारिक रूप से भी सही नहीं माने जाते। वे व्यक्ति की प्रस्तुति और आत्मविश्वास को प्रभावित कर सकते हैं। साफ-सुथरे और व्यवस्थित फुटवियर व्यक्ति के व्यक्तित्व को निखारते हैं और सकारात्मक प्रभाव छोड़ते हैं।

क्या करें पुराने जूते-चप्पलों का?

यदि जूते-चप्पल उपयोग के योग्य नहीं हैं, तो उन्हें घर में जमा करके रखने के बजाय हटा देना बेहतर माना जाता है। कुछ लोग उन्हें जरूरतमंदों को दान करते हैं, जबकि पूरी तरह खराब हो चुके फुटवियर का उचित तरीके से निस्तारण किया जा सकता है।

Suneet Singh
सुनीत सिंह author

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे ... और देखें

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