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Surya Grahan 2022 Sutak: सूर्य ग्रहण के समय इन कार्यों को करने से बचें

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  • Updated Oct 25, 2022, 05:15 PM IST

Surya Grahan Sutak Time And Precautions: सूर्य ग्रहण और सूतक के समय क्या करें और क्या न करें जानिए यहां

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Surya Grahan Sutak: सूर्य ग्रहण के सूतक में ये चीजें न करें

Surya Grahan Sutak Time: सूतक ग्रहण से पहले शुरू होने वाली वो अवधि है जिस दौरान सभी तरह के शुभ कार्य बंद कर दिये जाते हैं। चंद्र ग्रहण का सूतक ग्रहण लगने से 9 घंटे पहले शुरू होता है तो सूर्य ग्रहण का सूतक 12 घंटे पहले। 25 अक्टूबर को साल का आखिरी सूर्य ग्रहण लग रहा है। जिसका सूतक शुरू हो चुका है। जानिए सूतक काल में किन बातों का रखना चाहिए ध्यान।

सूर्य ग्रहण सूतक टाइम: सूर्य ग्रहण की शुरुआत 25 अक्टूबर को शाम 4 बजकर 28 मिनट से होगी और इसकी समाप्ति शाम 5 बजकर 30 मिनट पर। इस ग्रहण का सूतक काल भी माना जाएगा। सूतक समय 25 अक्टूबर को सुबह 03:17 से शाम 05:42 तक रहेगा।

क्या है सूतक? सूतक सूर्य ग्रहण और चन्द्र ग्रहण से पूर्व की एक निश्चित समयावधि को कहते हैं। हिन्दु मान्यताओं के अनुसार सूतक काल के समय पृथ्वी का वातावरण दूषित होता है। सूतक के अशुभ दोषों से अपने आप को सुरक्षित रखने के लिए इस दौरान अतिरिक्त सावधानी रखनी चाहिये।

सूतक के दौरान क्या करें और क्या न करें

  • ग्रहण एवं सूतक के दौरान सभी प्रकार के ठोस और तरल खाद्य पदार्थों का सेवन वर्जित माना जाता है। लेकिन बच्चों, रोगियों और वृद्धों के लिये भोजन मात्र एक प्रहर यानी तीन घण्टे के लिये ही वर्जित है।
  • गर्भवती स्त्रियों को ग्रहण काल में घर से बाहर न निकलने का सुझाव दिया जाता है। मान्यता है कि राहु व केतु के दुष्प्रभाव के कारण गर्भ में पल रहे शिशु को स्वास्थ्य दिक्कतें आ सकती हैं। ग्रहणकाल में गर्भवती स्त्रियों को वस्त्र आदि काटने या सिलने की मनाही होती है। मान्यता अनुसार इन गतिविधियों का भी शिशु पर दुष्प्रभाव पड़ता है।
  • सूतक और ग्रहण काल के समय तेल मालिश करना, पानी पीना, मल-मूत्र विसर्जन, बालों में कंघी करना, दातुन करना अथवा यौन गतिविधियों में लिप्त होना प्रतिबन्धित माना जाता है।
ग्रहण के दौरान मंत्र जाप करें- तमोमय महाभीम सोमसूर्यविमर्दन। हेमताराप्रदानेन मम शान्तिप्रदो भव॥१॥

ग्रहण के बाद क्या करें- ग्रहण शुरू होने से पहले ही गेहूँ, चावल, अन्य अनाज में कुश घास तथा तुलसी दल डालकर रख दें। इससे ग्रहण का दुष्प्रभाव खाने-पीने की चीजों पर नहीं पड़ता है। ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान आदि करके ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा देनी चाहिये।

लवीना शर्मा
लवीना शर्माauthor

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करियर की शुरुआत न्यूज 24 से हुई। इसके बाद तमाम चैनलों में काम किया। जहां स्क्रिप्ट राइटिंग, एडिटिंग और एंकरिंग का अनुभव हासिल हुआ। रफ्तार यहीं नहीं रूकी अब चाह थी कुछ नया करने की जिसके लिए मैंने डिजिटल मीडिया में स्विच किया और मैं जनसत्ता से जुड़ गई। जनसत्ता में मैंने अध्यात्म सेक्शन लीड किया। इसके बाद पत्रिका में सेवाएं दी और अब timesnowhindi.com से जु़ड़ी हूं। यहां भी मैं अध्यात्म सेक्शन में कार्यरत हूं। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और ज्योतिष शास्त्र में मेरा शुरू से ही लगाव रहा है। मेरी कोशिश रहती है कि मैं ऐसा कंटेट लिखूं जिससे बड़े बुजुर्ग ही नहीं बल्कि आज के युवा भी कनेक्ट कर सकें।

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