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Shlok Sanskrit On Ram Navami: भगवान राम के संस्कृत श्लोक यहां देखें

  • Authored by: लवीना शर्मा
  • Updated Apr 17, 2024, 11:57 AM IST

Shri Ram Shlok In Sanskrit: राम नवमी पर भगवान राम की असीम कृपा पाना चाहते हैं तो इन संस्कृत श्लोकों का जरूर करें जाप। हर मनोकामना होगी पूर्ण।

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Sri Ram Navami Sanskrit Shlok, Mantra

Shri Ram Shlok In Sanskrit And Hindi (राम नमवी संस्कृत श्लोक): राम नवमी का पावन त्योहार इस साल 17 अप्रैल को मनाया जा रहा है। इस शुभ अवसर पर राम भक्त राम जी की विधि विधान पूजा करते है और उनके मंत्रों का जाप करते हैं। साथ ही एक-दूसरे को राम नवमी की शुभकामनाएं भी देते हैं। इस पावन त्योहार के मौके पर हम आपके लिए लेकर आए हैं श्री राम जी के लोकप्रिय श्लोक जिन्हें पढ़ने से आपके आत्मविश्वास में वृद्धि होने के साथ-साथ कई परेशानियों से भी मुक्ति मिल जाएगी। यहां देखें श्री राम जी के संस्कृत श्लोक।

Ram Navami Sanskrit Shlok (राम जी के श्लोक मंत्र)

-राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे।

सह्स्रनाम तत्तुल्यं राम नाम वरानने।।

हिंदी अनुवाद- शिव जी ने देवी पार्वती से कहा, हे सुमुखी ! राम जी का नाम एकबार लेना भगवान विष्णु के सहस्रनाम के बराबर है। इसलिए मैं सदैव राम जी के नाम का ध्यान करता हूं।

ram navami shlok

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-रामो विग्रहवान् धर्मस्साधुस्सत्यपराक्रमः।

राजा सर्वस्य लोकस्य देवानां मघवानिव।।

हिंदी अनुवाद- भगवान श्रीराम धर्म के मूर्त स्वरूप हैं, वे बड़े साधु व सत्यपराक्रमी हैं। जिस प्रकार इंद्र देवताओं के नायक है, उसी प्रकार भगवान श्रीराम हम सबके नायक है। (Ram Navami Ki Katha In Hindi)

-ध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बद्धपद्मासनस्थं

पीतं वासो वसानं नवकमलदलस्पर्धिनेत्रं प्रसन्नम्।

वामाङ्कारूढसीतामुखकमलमिलल्लोचनं नीरदाभं

नानालङ्कारदीप्तं दधतमुरुजटामण्डलं रामचन्द्रम् ।।

हिंदी अनुवाद :- जो धनुष-बाण धारण किये हुए हैं, बद्धपद्मासन में विराजमान हैं, पीताम्बर वस्त्र पहने हुए हैं, जिनके प्रसन्न नयन नवीन कमलदल से स्पर्धा करते हैं तथा वाम भाग में विराजमान सीताजी के मुखकमल से मिले हुए हैं; उन आजानुबाहु, मेघश्याम, नाना प्रकार के अलंकारों से विभूषित तथा विशाल जटाजूटधारी श्रीरामचन्द्रजी का ध्यान करें।

ram ji ke shlok

ram ji ke shlok

-विजेतव्या लङ्का चरणतरणीयो जलनिधिः

विपक्षः पौलस्त्यो रणभुवि सहायाश्च कपयः।

तथाप्येको रामः सकलमवधीद्राक्षसकुलं

क्रियासिद्धिः सत्त्वे भवति महतां नोपकरणे॥

हिंदी अनुवाद :- लंका पर विजय पाने के लिए श्री राम को समुद्र पार करना पड़ा। रावण शक्तिशाली था और श्री राम की सेना वानरों की थी। आपदाओं के विरुद्ध श्री राम ने सभी राक्षसों का संहार किया। व्यक्ति की सफलता अपने क्षमताओं पर निर्भर करती है।

-चरितं रघुनाथस्य शतकोटिप्रविस्तरम् ।

एकैकमक्षरं पुंसां महापातकनाशनम् ||

हिंदी अनुवाद :- श्री रघुनाथ जी का चरित्र सौ करोड़ विस्तार वाला है और उसका एक एक अक्षर भी मनुष्यों के महान् पापों को नाश करने वाला है।

Sri ram navami slokas

Sri ram navami slokas

-रामस्य चरितं श्रुत्वा धारयेयुर्गुणाञ्जनाः,

भविष्यति तदा ह्येतत् सर्वं राममयं जगत।।

हिंदी अनुवाद :- प्रभु श्रीराम के चरित्र को सुनकर जब मनुष्य अपने जीवन में उन गुणों को धारण करेंगे, तो यह संसार राममय हो जायेगा।

-माता रामो मत्पिता रामचंद्र: !

स्वामी रामो मत्सखा रामचंद्र: !

सर्वस्वं में रामचंद्रो दयालुर्नान्यं

जाने नैव जाने न जाने !!

हिंदी अनुवाद :- श्रीराम ही मेरी माता हैं ! श्रीराम ही मेरे पिता हैं ! श्रीराम ही मेरे स्वामी हैं ! श्रीराम ही मेरे सखा (मित्र) हैं ! दयामय राम जी ही मेरे सर्वस्व हैं !उनके सिवा मैं किसी को नहीं जानता बिलकुल नहीं जानता।

ram navami shlok mantra

ram navami shlok mantra

-आनृशंस्यमनुक्रोशः श्रुतं शीलं दमः शमः।

राघवं शोभयन्त्येते षड्गुणाः पुरुषोत्तमम्॥

हिंदी अनुवाद :- अहिंसा, दया, वेदशास्त्रों का ज्ञान, सुशीलता, आत्मसंयम और शान्त चित्त, ये छः गुण राघव (मर्यादा पुरुषोत्तम) को शोभा देते हैं।

श्लोक पढ़ने के फायदे

राम जी के श्लोक पढ़ने से मानसिक शांति मिलती है। साथ ही ध्यान और एकाग्रता को बढ़ाने में भी मदद मिलती है। राम जी के श्लोक शक्तिशाली उपकरण के रूप में कार्य करते हैं।

लवीना शर्मा
लवीना शर्माauthor

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करियर की शुरुआत न्यूज 24 से हुई। इसके बाद तमाम चैनलों में काम किया। जहां स्क्रिप्ट राइटिंग, एडिटिंग और एंकरिंग का अनुभव हासिल हुआ। रफ्तार यहीं नहीं रूकी अब चाह थी कुछ नया करने की जिसके लिए मैंने डिजिटल मीडिया में स्विच किया और मैं जनसत्ता से जुड़ गई। जनसत्ता में मैंने अध्यात्म सेक्शन लीड किया। इसके बाद पत्रिका में सेवाएं दी और अब timesnowhindi.com से जु़ड़ी हूं। यहां भी मैं अध्यात्म सेक्शन में कार्यरत हूं। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और ज्योतिष शास्त्र में मेरा शुरू से ही लगाव रहा है। मेरी कोशिश रहती है कि मैं ऐसा कंटेट लिखूं जिससे बड़े बुजुर्ग ही नहीं बल्कि आज के युवा भी कनेक्ट कर सकें।

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