अध्यात्म

Shukra Pradosh Vrat: धन, वैभव और प्रेम का वरदान देता है शुक्र प्रदोष व्रत, पढ़ें इसकी पौराणिक कथा

Shukra Pradosh Vrat Katha In Hindi 2025: शुक्रवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष व्रत को शुक्र प्रदोष के नाम से जाना जाता है जो भगवान शिव को समर्पित है। मान्यताओं अनुसार इस व्रत को रखने से धन, वैभव, सौंदर्य और वैवाहिक जीवन के सुखों में वृद्धि होती है। यहां हम आपको बताएंगे इस व्रत की पौराणिक कथा।

Image

Shukra Pradosh Vrat Katha

Shukra Pradosh Vrat Katha In Hindi 2025: सनातन धर्म में शुक्र प्रदोष व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। कहते हैं जो कोई इस व्रत को सच्चे मन से रखता है उसके जीवन में कभी किसी चीज की कमी नहीं होती। विशेष रूप से अविवाहितों के लिए यह व्रत जल्दी विवाह का मार्ग प्रशस्त करता है, और विवाहितों के वैवाहिक जीवन में प्रेम बढ़ाता है। इसके अलावा जिनकी कुंडली में शुक्र ग्रह अशुभ स्थिति में हो, वे इस व्रत से उसका शुभ फल पा सकते हैं। 9 मई 2025 को ये प्रदोष व्रत रखा जाएगा। यहां आप जानेंगे इसकी कथा।

शुक्र प्रदोष व्रत कथा (Shukra Pradosh Vrat Katha)

प्राचीन काल की बात है एक नगर में तीन मित्र रहते थे। उनमें से एक राजा का बेटा, दूसरा ब्राह्मण पुत्र और तीसरा सेठ जी का पुत्र था। तीनों मित्र की शादी हो चुकी थी लेकिन सेठ पुत्र का गौना नहीं हुआ था जिस वजह से उसकी पत्नी मायके में रह रही थी। एक दिन तीनों मित्र आपस में बात कर रहे थे । ब्राह्मण-पुत्र ने नारियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि नारीहीन घर भूतों का डेरा होता है। सेठ-पुत्र ने यह वचन सुनकर अपनी पत्नी तो तुरंत ही घर लाने का निश्चय किया। इसके बाद सेठ-पुत्र अपने घर गया और अपने माता-पिता को इस बारे में जानकारी दी कि वह अपनी पत्नी को लेने के लिए जा रहा है। लेकिन माता-पिता ने उसे बताया कि शुक्र देवता डूबे हुए हैं और ऐसे में बहु-बेटियों को उनके घर से विदा कराकर लाना अशुभ होता है।

लेकिन सेठ पुत्र ने अपने माता-पिता की बात नहीं सुनीं और वह अपने सुसराल जा पहुंचा। यहां तक कि उसके सास-ससुर ने भी मना किया लेकिन वह जबरदस्ती अपनी पत्नी को विदा करा लाया। दोनों पति-पत्नी नगर से बाहर निकले ही थे कि उनकी बैलगाड़ी का पहिया टूट गया जिससे उन्हें चोट लग गई। लेकिन फिर भी सेठ पुत्र नहीं रूका। इसके बाद उन्हें मार्ग पर डाकुओं ने घेर लिया और उनका सारा धन ले लिया।

दोनों पति-पत्नी जैसे-तैसे घर पहुंचे लेकिन वहां जाते ही सेठ पुत्र को सांप ने डस लिया। जिसके बाद उसके पिता ने वैद्यों को बुलाया जिन्होंने ने 3 दिन में सेठ पुत्र की मृत्यु होने की बात कही। जब ब्राह्मण पुत्र को इस बारे में पता चला तो उसने सेठ से कहा कि आप इसे पत्नी सहित इसके ससुराल भेज दें। शुक्र के डूबे होने पर पत्नी को उसके घर से विदा करा लाने के कारण ही ये सब हुआ है इसलिए ये वही ठीक हो पायेगा। सेठ ने अपनी पुत्रवधु और पत्र को वापिस लौटा दिया। वहां पहुंचते ही सेठ-पुत्र ठीक हो गया।

Laveena Sharma
लवीना शर्माauthor

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करियर की शुरुआत न्यूज 24 से हुई। इसके बाद तमाम चैनलों में काम किया। जहां स्क्रिप्ट राइटिंग, एडिटिंग और एंकरिंग का अनुभव हासिल हुआ। रफ्तार यहीं नहीं रूकी अब चाह थी कुछ नया करने की जिसके लिए मैंने डिजिटल मीडिया में स्विच किया और मैं जनसत्ता से जुड़ गई। जनसत्ता में मैंने अध्यात्म सेक्शन लीड किया। इसके बाद पत्रिका में सेवाएं दी और अब timesnowhindi.com से जु़ड़ी हूं। यहां भी मैं अध्यात्म सेक्शन में कार्यरत हूं। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और ज्योतिष शास्त्र में मेरा शुरू से ही लगाव रहा है। मेरी कोशिश रहती है कि मैं ऐसा कंटेट लिखूं जिससे बड़े बुजुर्ग ही नहीं बल्कि आज के युवा भी कनेक्ट कर सकें।

और पढ़ें
End of Article