अध्यात्म

कहां हुआ था भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह, क्या है वहां की खासियत?

Lord Shiv-Parvati Vivah Sthal: भगवान शिव और माता पार्वती का रिश्ता बेहद पवित्र पावन और अटूट है। मां भगवती भगवान शिव के बाएं भाग में विराजमान होती हैं। माना जाता है कि फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी और चतुर्दशी तिथि मिलन के अवसर पर भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भगवान शिव का विवाह कहां हुआ था? अगर नहीं तो आइए जानते हैं कि भगवान शिव का माता पार्वती से विवाह कहां हुआ था और यह जगह क्यों खास है?

भगवान शिव और पावर्ती का विवाह कहां हुआ था

भगवान शिव और पावर्ती का विवाह कहां हुआ था

Lord Shiv-Parvati Vivah Sthal: आदिदेव और देवों के महादेव भगवान शिव का विवाह स्वयं आदिशक्ति भवानी मां पार्वती के साथ हुआ था। मान्यता है कि उन्होंने फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी और चतुर्दशी तिथि के मिलन पर सात फेरे लिए थे। भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह एक मात्र ऐसा अनोखा विवाह है, जिसमें देव, दैत्य, दानव, भूत आदि सब शामिल हुए थे। शिवमहापुराण के अनुसार, भगवान शिव और पार्वती का विवाह भारत की देवभूमि उत्तराखंड में हुआ था। जहां भगवान शिव का माता पार्वती से विवाह हुआ, वो मंदिर आज त्रियुगीनारायण के नाम से जाना जाता है।

मान्यताओं के अनुसार, उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित त्रियुगीनारायण मंदिर न सिर्फ एक प्राचीन धार्मिक स्थल है, बल्कि भारतीय पौराणिक कथाओं में दर्ज सबसे पवित्र विवाह स्थलों में से एक माना जाता है। यह मंदिर आज भी विवाह, प्रेम और दांपत्य सुख की कामना करने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है। करीब 1980 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर शांत पहाड़ियों, देवदार के वृक्षों और अलौकिक वातावरण से घिरा हुआ है। बीते कुछ वर्षों में यह स्थान धार्मिक आस्था के साथ-साथ डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए भी तेजी से लोकप्रिय हुआ है।

त्रियुगीनारायण मंदिर

त्रियुगीनारायण मंदिर

तीन युगों से जल रही विवाह की साक्षी अग्नि

त्रियुगीनारायण मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां स्थित अखंड धुनी है। मंदिर के सामने बने हवन कुंड में यह दिव्य अग्नि निरंतर जलती रहती है। मान्यता के अनुसार, भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह इसी अग्नि के चारों ओर संपन्न हुआ था।

कहा जाता है कि यह अग्नि त्रेतायुग से लेकर आज तक कभी बुझी नहीं है। श्रद्धालु यहां लकड़ियां अर्पित करते हैं और इस पवित्र अग्नि से प्राप्त राख को प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यह प्रसाद प्रेम, वैवाहिक सुख और मानसिक शांति प्रदान करता है।

सभी देवी-देवाता हुए थे उपस्थित

पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, शिव-पार्वती विवाह में समस्त देवी-देवताओं की उपस्थिति रही थी। भगवान ब्रह्मा ने विवाह विधि संपन्न कराई, जबकि भगवान विष्णु ने माता पार्वती के भाई की भूमिका निभाते हुए उनका कन्यादान किया था।

इसी कारण यह मंदिर भगवान विष्णु को भी समर्पित माना जाता है और यहां शिव-पार्वती के साथ-साथ विष्णु पूजा का भी विशेष महत्व है।

क्यों कहलाता है त्रियुगीनारायण मंदिर?

इस मंदिर का नाम ‘त्रियुगीनारायण’ इसलिए पड़ा क्योंकि मान्यता है कि यह स्थान सतयुग, त्रेतायुग और द्वापर युग, तीनों युगों से अस्तित्व में है। तीनों युगों का साक्षी होने के कारण इसे अत्यंत पवित्र और सिद्ध स्थल माना जाता है।

मौजूद हैं पवित्र कुंड

मंदिर परिसर में कई प्राकृतिक जल स्रोत मौजूद हैं, जिनमें ब्रह्म कुंड, विष्णु कुंड, रुद्र कुंड और सरस्वती कुंड प्रमुख हैं। इन कुंडों का जल अत्यंत पवित्र माना जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इन कुंडों में स्नान करने से वैवाहिक जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और संतान सुख की कामना पूरी होती है। यही वजह है कि यहां आने वाले अधिकांश श्रद्धालु वैवाहिक जीवन से जुड़ी मन्नतें लेकर पहुंचते हैं।

केदारनाथ जैसी है वास्तुकला

त्रियुगीनारायण मंदिर की वास्तुकला पत्थरों से निर्मित है और इसकी शैली काफी हद तक केदारनाथ मंदिर से मिलती-जुलती है। माना जाता है कि इसका निर्माण आदि शंकराचार्य की परंपरा से प्रेरित होकर किया गया था। सादगी और आध्यात्मिकता इस मंदिर की पहचान है।

डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए है खास

बीते कुछ वर्षों में त्रियुगीनारायण मंदिर डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए भी चर्चा में रहा है। यहां विवाह करने वाले जोड़े मानते हैं कि शिव-पार्वती के विवाह स्थल पर शादी करने से दांपत्य जीवन में प्रेम, समझ और स्थायित्व बना रहता है। सरकारी अनुमति और सीमित रीति-रिवाजों के साथ यहां विवाह संपन्न कराए जाते हैं, जिससे धार्मिक मर्यादा भी बनी रहती है।

डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी शास्त्रों और मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।

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Mohit Tiwari
Mohit Tiwari author

मोहित तिवारी को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रतिष्ठित न्यूजपेपर में फील्ड रिपोर्टिंग से की थी। मोहित ... और देखें

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