Shani Dev Anger Reason: ज्योतिष शास्त्र में शनि देव को न्याय के देवता कहा जाता है। वे कर्मों के अनुसार फल देते हैं।अच्छे कर्मों पर कृपा, बुरे पर कठोर दंड देते हैं। यदि शनि महाराज नाराज हो जाएं, तो साढ़ेसाती, ढैय्या या शनि दोष के रूप में जीवन में असहनीय कष्ट आते हैं। ऐसे में आर्थिक हानि, स्वास्थ्य समस्या, पारिवारिक कलह और मानसिक तनाव होता है। हालांकि सवाल यह है कि शनि देव किन लोगों से सबसे ज्यादा नाराज रहते हैं? प्राचीन ग्रंथों जैसे स्कंद पुराण और बृहत्संहिता के अनुसार, कुछ कार्य शनि को इतना क्रोधित करते हैं कि वे ऐसे व्यक्ति को डबल कष्ट देते हैं। आइए जानते हैं कि वे कौन से काम हैं?
बुजुर्गों और गुरुओं का अपमान करने वाले
शनि देव बुजुर्गों के रक्षक माने जाते हैं। यदि कोई व्यक्ति अपने माता-पिता, दादा-दादी या गुरुजनों का अपमान करता है, तो शनि की कृपा कभी नहीं मिलती है। ऐसे लोग हमेशा कष्ट झेलते रहते हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, बुजुर्गों को तंग करने वाले पर शनि की वक्र दृष्टि पड़ती है, जिससे जीवन में अकेलापन और स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ती हैं। यदि आप भी कभी आवेश में ऐसा करते हैं, तो तुरंत तौबा कर लें।
जरूरतमंदों, असहायों और महिलाओं को सताने वाले
न्याय के देवता शनि गरीबों और असहायों की रक्षा करते हैं। जो लोग मजदूरों, भिखारियों या जरूरतमंदों की उपेक्षा करते हैं या उन्हें परेशान करते हैं, उन्हें शनि भारी कष्ट देते हैं। खासकर महिलाओं, विकलांगों या अनाथों को दुख पहुंचाने वाले व्यक्ति पर शनि की नाराजगी सबसे तेज होती है। इससे व्यापार में घाटा, दुर्घटनाएं और पारिवारिक विघटन जैसी समस्याएं आती हैं। शनि का मूल मंत्र ‘जैसी करनी वैसी भरनी’ है। ऐसे में आपको अपने कर्मों का फल मिलता है।
झूठे, धोखेबाज और पीठ पीछे बुराई करने वाले
झूठ बोलना, धोखा देना या झूठी गवाही देना शनि को सबसे ज्यादा भाता नहीं है। ऐसे लोग जो दूसरों की पीठ पीछे बुराई करते हैं या छल से लाभ कमाते हैं, उन्हें शनि की कुदृष्टि का सामना करना पड़ता है। इन लोगों को आर्थिक संकट, कानूनी मुकदमे और विश्वासघात का सामना करना पड़ता है। ज्योतिष के अनुसार, शनिदेव धोखेबाजों को कभी माफ नहीं करते हैं।
जानवरों को तंग करने वाले
शनि देव जीवों के प्रति दया के पक्षधर हैं। सड़क पर कुत्तों को मारना, गायों को पीटना या किसी भी प्राणी को कष्ट पहुंचाना शनि की नाराजगी का कारण बनता है। ऐसे व्यवहार से शनि दोष लग जाता है, जो स्वास्थ्य और सुख में बाधा डालता है। पशु-पक्षियों को दाना-पानी देना शनि को प्रसन्न करने का सरल उपाय है।
व्यभिचारी और अनैतिक कार्य करने वाले
परस्त्री गमन, व्यभिचार या अनैतिक यौन संबंध शनि को बेहद क्रोधित करते हैं। ऐसे पापी कर्मों से शनि व्यक्ति को गंभीर रोग, दुर्घटनाओं और पारिवारिक कलह का शिकार बनाते हैं। ज्योतिष के अनुसार, शनि ब्रह्मचर्य और नैतिकता के रक्षक हैं।
आलसी और कर्तव्यहीन व्यक्ति
शनि मेहनत और कर्मठता के देवता हैं। जो लोग आलस्य करते हैं, कामचोरी करते हैं या कर्तव्य से भागते हैं, उन्हें शनि डबल कष्ट देते हैं। साढ़ेसाती के दौरान ये कष्ट और बढ़ जाते हैं।
शनि की नाराजगी से बचने के सरल उपाय
शनि की नाराजगी से बचने के लिए आप कुछ उपायों को कर सकते हैं। शनि मंदिर में तेल चढ़ाएं और ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ मंत्र का 108 बार जाप करें। शनिवार को काले तिल, सरसों का तेल, लोहे की वस्तु या जूते-चप्पल का दान करें। प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करें। जरूरतमंदों को भोजन दें, जानवरों को पानी पिलाएं।
डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।
