Sawan 2025 Lord Shiva Puja Vidhi: सावन के पहले दिन कैसे करें भोलेनाथ की पूजा? देखें, शिव पूजन विधि से शिव चालीसा और आरती तक सबकुछ यहां
Sawan 2025 Lord Shiva Puja Vidhi, Chalisa, Mantra, Rudrabhishek, Aarti in Text: सावन का आज पहला दिन है। आज से हर रोज भक्त भोलेनाथ को प्रसन्न करने की हर कोशिश करेंगे। आज से भोलेबाबा की पूजा, रुद्राभिषेक, व्रत की शुरुआत हो जाती है। अगर आपको भी भोले नाथ की भक्ति में लीन होना है तो आप यहां से भगवान शिव के पूजा की विधि, मंत्र, रुद्राभिषेक, जल चढ़ाने के नियम, महत्व, शिव चालीसा, भजन, आरती लिरिक्स समेत सभी जानकारी ले सकते हैं।
Sawan 2025 Lord Shiva Puja Vidhi: सावन के पहले दिन कैसे करें भोलेनाथ की पूजा? देखें, शिव पूजन विधि से शिव चालीसा और आरती तक सबकुछ यहां
शिवलिंग पर चल चढ़ाने के नियम
भगवान शिव का मंत्र-
सावन 2025 की शुभकामनाएं संदेश
शिव जी की आरती-
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥ ओम जय शिव ओंकारा॥
एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे।
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हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे॥ ओम जय शिव ओंकारा॥
दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
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त्रिगुण रूप निरखत त्रिभुवन जन मोहे॥ ओम जय शिव ओंकारा॥
अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी।
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त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी॥ ओम जय शिव ओंकारा॥
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघंबर अंगे।
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सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे॥ ओम जय शिव ओंकारा॥
कर के मध्य कमण्डल चक्र त्रिशूलधारी।
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जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता॥ ओम जय शिव ओंकारा॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
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प्रणवाक्षर के मध्ये ये तीनों एका॥ ओम जय शिव ओंकारा॥
पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा।
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भांग धतूरे का भोजन, भस्मी में वासा॥ ओम जय शिव ओंकारा॥
जटा में गंग बहत है, गल मुण्डन माला।
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शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला॥ ओम जय शिव ओंकारा॥
काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
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नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी॥ ओम जय शिव ओंकारा॥
त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोइ नर गावे।
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कहत शिवानन्द स्वामी, मनवान्छित फल पावे॥
ओम जय शिव ओंकारा॥ स्वामी ओम जय शिव ओंकारा॥
कैसे करें भगवान शिव की पूजा?
Shiv Mantra: भगवान शिव का रुद्र मंत्र
- यह शिव जी का रूद्र मंत्र है। माना जाता है कि प्रतिदिन इस मंत्र का जाप करने से व्यक्ति की हर इच्छा पूरी हो सकती है।
Live: सावन के गीत: लिरिक्स
मन मेरा मंदिर शिव मेरी पूजा
शिव से बड़ा नहीं कोई दूजा
बोल सत्यम शिवम बोल तू सुन्दरम
मन मेरे शिव की महिमा के गुण गाये जा
पार्वती जब सीता बन कर
जय श्री राम के सम्मुख आई
राम ने उनको माता कहकर
शिव शंकर की महिमा गायी
शिव भक्ति में सब कुछ सूझा
शिव से बड़ा नहीं कोई दूजा
बोल सत्यम शिवम बोल तू सुन्दरम
मन मेरे शिव की महिमा के गुण गाये जा
तेरी जटा से निकली गंगा
और गंगा ने भीष्म दिया है
तेरे भक्तों की शक्ति ने
सारे जगत को जीत लिया है
तुझको सब देवोँ ने पूजा
शिव से बड़ा नहीं कोई दूजा
बोल सत्यम शिवम बोल तू सुन्दरम
मन मेरे शिव की महिमा के गुण गाये जा
मन मेरे मंदिर शिव मेरी पूजा
शिव से बड़ा नहीं कोई दूजा
बोल सत्यम शिवम बोल तू सुन्दरम
मन मेरे शिव की महिमा के गुण गाये जा
ओम नमः शिवाय नमो
ओम नमः शिवाय नमो ….
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Sawan 2025 Lord Shiva Puja Vidhi LIVE: सावन भजन लिरिक्स (सुबह सुबह ले शिव का नाम)
सुबह सुबह ले शिव का नाम, कर ले बन्दे ये शुभ काम।
सुबह सुबह ले शिव का नाम, शिव आयेंगे तेरे काम।
सुबह सुबह ले शिव का नाम, कर ले बन्दे ये शुभ काम।
ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय ।।
खुद को राख लपेटे फिरते, औरों को देते धन धाम।
खुद को राख लपेटे फिरते, औरों को देते धन धाम।
देवो के हित विष पी डाला, नील कंठ को कोटि प्रणाम, नील कंठ को कोटि प्रणाम।
सुबह सुबह ले शिव का नाम, शिव आयेंगे तेरे काम।
सुबह सुबह ले शिव का नाम, कर ले बन्दे ये शुभ काम।
ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय ।।
शिव के चरणों में मिलते हैं सारी तीरथ चारो धाम।
शिव के चरणों में मिलते हैं सारी तीरथ चारो धाम।
करनी का सुख तेरे हाथों, शिव के हाथों में परिणाम, शिव के हाथों में परिणाम।
सुबह सुबह ले शिव का नाम, शिव आयेंगे तेरे काम ॥
सुबह सुबह ले शिव का नाम, कर ले बन्दे ये शुभ काम।
ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय ।।
शिव के रहते कैसी चिंता, साथ रहे प्रभु आठों याम।
शिव के रहते कैसी चिंता, साथ रहे प्रभु आठों याम
शिव को भजले सुख पायेगा, मन को आएगा आराम, मन को आएगा आराम।
सुबह सुबह ले शिव का नाम, शिव आयेंगे तेरे काम ॥
सुबह सुबह ले शिव का नाम, कर ले बन्दे ये शुभ काम।
ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय
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Sawan 2025 Lord Shiva Puja Vidhi LIVE: भगवान शिव का रुद्र मंत्र
- यह शिव जी का रूद्र मंत्र है। माना जाता है कि प्रतिदिन इस मंत्र का जाप करने से व्यक्ति की हर इच्छा पूरी हो सकती है।
Sawan 2025 Lord Shiva Puja Vidhi LIVE: पढ़ें, शिव चालीसा
श्री गणेश गिरिजा सुवन , मंगल मूल सुजान।
कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥
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॥चौपाई॥
जय गिरिजा पति दीन दयाला। सदा करत संतन प्रतिपाला॥
भाल चंद्रमा सोहत नीके। कानन कुण्डल नागफनी के॥
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अंग गौर शिर गंग बहाए। मुण्डमाल तन छार लगाए॥
वस्त्र खाल बाघंबर सोहे। छवि को देख नाग मुनि मोहे॥
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मैना मातु की ह्वै दुलारी। बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥
कर त्रिशूल सोहत छवि भारी। करत सदा शत्रुन क्षयकारी॥
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नन्दि गणेश सोहै तहं कैसे। सागर मध्य कमल हैं जैसे॥
कार्तिक श्याम और गणराऊ। या छवि को कहि जात न काऊ॥
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देवन जबहीं जाय पुकारा। तब ही दुख प्रभु आप निवारा॥
किया उपद्रव तारक भारी। देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी॥
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तुरत षडानन आप पठायउ। लवनिमेष महं मारि गिरायउ॥
आप जलंधर असुर संहारा। सुयश तुम्हार विदित संसारा॥
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त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई। सबहिं कृपा कर लीन बचाई॥
किया तपहिं भागीरथ भारी। पुरब प्रतिज्ञा तसु पुरारी॥
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दानिन महं तुम सम कोउ नाहीं। सेवक स्तुति करत सदाहीं॥
वेद नाम महिमा तव गाई। अकथ अनादि भेद नहिं पाई॥
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प्रगट उदधि मंथन में ज्वाला। जरे सुरासुर भये विहाला॥
कीन्ह दया तहँ करी सहाई। नीलकण्ठ तब नाम कहाई॥
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पूजन रामचंद्र जब कीन्हा। जीत के लंक विभीषण दीन्हा॥
सहस कमल में हो रहे धारी। कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी॥
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एक कमल प्रभु राखेउ जोई। कमल नयन पूजन चहं सोई॥
कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर। भये प्रसन्न दिए इच्छित वर॥
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जय जय जय अनंत अविनाशी। करत कृपा सब के घटवासी॥
दुष्ट सकल नित मोहि सतावै । भ्रमत रहे मोहि चैन न आवै॥
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त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो। यहि अवसर मोहि आन उबारो॥
लै त्रिशूल शत्रुन को मारो। संकट से मोहि आन उबारो॥
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मातु पिता भ्राता सब कोई। संकट में पूछत नहिं कोई॥
स्वामी एक है आस तुम्हारी। आय हरहु अब संकट भारी॥
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धन निर्धन को देत सदाहीं। जो कोई जांचे वो फल पाहीं॥
अस्तुति केहि विधि करौं तुम्हारी। क्षमहु नाथ अब चूक हमारी॥
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शंकर हो संकट के नाशन। मंगल कारण विघ्न विनाशन॥
योगी यति मुनि ध्यान लगावैं। नारद शारद शीश नवावैं॥
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नमो नमो जय नमो शिवाय। सुर ब्रह्मादिक पार न पाय॥
जो यह पाठ करे मन लाई। ता पार होत है शम्भु सहाई॥
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ॠनिया जो कोई हो अधिकारी। पाठ करे सो पावन हारी॥
पुत्र हीन कर इच्छा कोई। निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई॥
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पण्डित त्रयोदशी को लावे। ध्यान पूर्वक होम करावे ॥
त्रयोदशी ब्रत करे हमेशा। तन नहीं ताके रहे कलेशा॥
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धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे। शंकर सम्मुख पाठ सुनावे॥
जन्म जन्म के पाप नसावे। अन्तवास शिवपुर में पावे॥
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कहे अयोध्या आस तुम्हारी। जानि सकल दुःख हरहु हमारी॥
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॥दोहा॥
नित्त नेम कर प्रातः ही, पाठ करौं चालीसा।
तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश॥
मगसर छठि हेमन्त ॠतु, संवत चौसठ जान।
अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण॥
