Saraswati Puja October 2026: शारदीय नवरात्र में मां सरस्वती की प्रधान पूजा 17 अक्टूबर 2026, शनिवार को होगी। इससे एक दिन पहले, 16 अक्टूबर, शुक्रवार को सरस्वती आवाहन किया जाएगा। आवाहन में देवी को पूजन के लिए आमंत्रित किया जाता है, जबकि अगले दिन उनकी मुख्य पूजा होती है। इसलिए दोनों तारीखों का अपना महत्व है।
मां सरस्वती को विद्या, ज्ञान, वाणी और कला की देवी माना जाता है। सही बात समझने, सोच को स्पष्ट रखने और अपनी वाणी में मधुरता लाने का भाव भी इस पूजा से जुड़ा है। शारदीय नवरात्र में मां शारदा की उपासना करते समय पुस्तकों और ज्ञान से जुड़े साधनों को भी आदर दिया जाता है। आइए जानते हैं सरस्वती आवाहन और प्रधान पूजा की तारीख, मुहूर्त और पूजन से जुड़ी परंपरा।
अक्टूबर 2026 में सरस्वती पूजा कब है
नवरात्र के दौरान होने वाली चार दिवसीय सरस्वती पूजा में पहला दिन आवाहन और दूसरा दिन प्रधान पूजा का होता है। वर्ष 2026 में आवाहन 16 अक्टूबर को होगा। इसके अगले दिन, 17 अक्टूबर को मां सरस्वती की मुख्य पूजा की जाएगी।
यहां तारीख समझते समय एक बात ध्यान रखने की है। नवरात्र में सरस्वती पूजन की इस परंपरा में नक्षत्रों का विशेष महत्व होता है। आवाहन मूल नक्षत्र में किया जाता है और प्रधान पूजा पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में होती है। इसलिए केवल नवरात्र का दिन गिनकर पूजा की तारीख तय नहीं की जाती है।
सरस्वती आवाहन क्या है और कब होगा
आवाहन का सरल अर्थ है आमंत्रित करना। पूजा की शुरुआत में भक्त मां सरस्वती का ध्यान करते हैं और उनसे पूजन स्वीकार करने की प्रार्थना करते हैं। यह देवी के स्वागत का दिन होता है।
सरस्वती आवाहन शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को होगा। पंचांग के अनुसार, मूल नक्षत्र में आवाहन का मुहूर्त दोपहर 3:33 बजे से शाम 5:50 बजे तक है।
| सरस्वती आवाहन से जुड़ी जानकारी | तारीख और समय |
|---|---|
| आवाहन का दिन | शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 |
| आवाहन मुहूर्त | दोपहर 3:33 से शाम 5:50 बजे तक |
| मूल नक्षत्र प्रारंभ | 16 अक्टूबर, सुबह 6:47 बजे |
| मूल नक्षत्र समाप्त | 17 अक्टूबर, सुबह 9:47 बजे |
सरस्वती प्रधान पूजा का मुहूर्त क्या है
सरस्वती प्रधान पूजा इस उपासना का मुख्य दिन है। इस दिन मां शारदा की पूजा करके विद्या, सद्बुद्धि और सीखने की क्षमता के लिए प्रार्थना की जाती है।
शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 को प्रधान पूजा होगी। पंचांग के अनुसार, पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में पूजा का मुहूर्त दोपहर 3:32 बजे से शाम 5:49 बजे तक रहेगा।
| सरस्वती प्रधान पूजा से जुड़ी जानकारी | तारीख और समय |
|---|---|
| प्रधान पूजा का दिन | शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 |
| पूजा मुहूर्त | दोपहर 3:32 से शाम 5:49 बजे तक |
| पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र प्रारंभ | 17 अक्टूबर, सुबह 9:47 बजे |
| पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र समाप्त | 18 अक्टूबर, दोपहर 12:48 बजे |
नवरात्र में पुस्तकों की पूजा क्यों की जाती है
इस पूजा की खास परंपरा है पुस्तकों को देवी के स्वरूप के रूप में स्थापित करना। इसका भाव यह है कि ज्ञान को केवल जरूरत की वस्तु न समझा जाए। उसे सम्मान दिया जाए और उसका उपयोग अच्छे काम में किया जाए।
पढ़ाई करने वाले अपनी पुस्तकें पूजन में रखते हैं। संगीत और कला से जुड़े लोग अपनी परंपरा के अनुसार वाद्य या सीखने के साधन भी रख सकते हैं। पुस्तकें साफ स्थान पर व्यवस्थित करके रखें। फूल, जल या प्रसाद रखते समय ध्यान दें कि उनके पन्ने खराब न हों।
घर पर मां सरस्वती की पूजा कैसे करें
स्नान के बाद साफ वस्त्र पहनें और पूजा की जगह व्यवस्थित करें। चौकी पर स्वच्छ कपड़ा बिछाकर मां सरस्वती की तस्वीर या प्रतिमा रखें। पास में पूजन के लिए चुनी गई पुस्तकें रख सकते हैं।
इसके बाद दीपक जलाएं। देवी को फूल और अपनी परंपरा के अनुसार प्रसाद अर्पित करें। शांत मन से मां शारदा का ध्यान करें। सरस्वती वंदना पढ़ें या ‘ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः’ मंत्र का जप करें। अंत में आरती करके पूजा संपन्न करें।
