Sankranti Kab Hai October 2026 Mein (तुला संक्रांति 2026): हिंदू धर्म में संक्रांति का विशेष धार्मिक महत्व है। हर महीने सूर्य देव एक राशि से निकलकर दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं। सूर्य के इसी राशि परिवर्तन को संक्रांति कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, संक्रांति का दिन स्नान, दान, पूजा-पाठ और सूर्य उपासना के लिए महत्वपूर्ण होता है। अक्टूबर 2026 में सूर्य कन्या राशि से निकलकर तुला राशि में प्रवेश करेंगे। इसलिए इस महीने की संक्रांति को तुला संक्रांति कहा जाएगा।
इस बार तुला संक्रांति 17 अक्टूबर 2026, शनिवार को है। खास बात यह है कि यह संक्रांति शारदीय नवरात्र के दौरान पड़ रही है। आइए जानते हैं अक्टूबर में संक्रांति कब है, तुला संक्रांति का पुण्य काल और महापुण्य काल कितने बजे से कितने बजे तक रहेगा और इस दिन किन धार्मिक परंपराओं का पालन किया जाता है।
अक्टूबर 2026 में संक्रांति कब है? (October Sankranti 2026 Date)
पंचांग के अनुसार, अक्टूबर में तुला संक्रांति मनाई जाएगी। यह संक्रांति शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 को है। इस दिन सूर्य कन्या राशि से तुला राशि में प्रवेश करेंगे। ज्योतिष शास्त्र में तुला राशि के स्वामी शुक्र माने जाते हैं। सूर्य का तुला राशि में गोचर हर साल लगभग अक्टूबर के मध्य में होता है।
तुला संक्रांति का महत्व केवल सूर्य के राशि परिवर्तन तक सीमित नहीं है। यह समय मौसम में बदलाव का भी संकेत देता है। देश के कई हिस्सों में वर्षा ऋतु की विदाई और हल्की ठंड की शुरुआत होने लगती है। कृषि से जुड़ी परंपराओं में भी इस समय का विशेष स्थान है।
तुला संक्रांति 2026 का शुभ मुहूर्त (Tula Sankranti 2026 Shubh Muhurat)
द्रिक पंचांग के अनुसार, अक्टूबर 2026 में तुला संक्रांति 17 अक्टूबर, शनिवार को मनाई जाएगी। इस दिन सूर्य के तुला राशि में प्रवेश करने का समय शाम 7 बजकर 57 मिनट है। तुला संक्रांति का पुण्य काल दोपहर 12 बजकर 06 मिनट से शाम 5 बजकर 49 मिनट तक रहेगा। इसकी कुल अवधि 5 घंटे 43 मिनट होगी। वहीं, तुला संक्रांति का महापुण्य काल दोपहर 3 बजकर 55 मिनट से शाम 5 बजकर 49 मिनट तक रहेगा, जिसकी अवधि 1 घंटा 54 मिनट होगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पुण्य काल में स्नान, दान और पूजा-पाठ करना शुभ माना जाता है।
नोट करें कि ये समय नई दिल्ली के अनुसार हैं। दूसरे शहरों में स्थानीय पंचांग के अनुसार कुछ अंतर हो सकता है।
तुला संक्रांति का धार्मिक महत्व क्या है (Tula Sankranti Significance)
हिंदू परंपरा में सूर्य देव को ऊर्जा, प्रकाश और जीवन का आधार माना गया है। सूर्य की उपासना से जुड़ी कई परंपराएं वैदिक काल से चली आ रही हैं। संक्रांति के अवसर पर श्रद्धालु सूर्य देव को जल अर्पित करते हैं और परिवार के सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करते हैं।
तुला संक्रांति का संबंध सूर्य के तुला राशि में प्रवेश से है। वैदिक ज्योतिष में तुला को सूर्य की नीच राशि माना जाता है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि संक्रांति का दिन अशुभ होता है। धार्मिक दृष्टि से संक्रांति पर स्नान, दान और पूजा का अपना विशेष महत्व बना रहता है।
इस दिन श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंद लोगों को भोजन, वस्त्र और अन्य उपयोगी वस्तुएं दान करते हैं। मान्यता है कि संक्रांति पर किया गया दान पुण्यदायी होता है।
तुला संक्रांति पर पूजा कैसे करें (Tula Sankranti Puja Vidhi)
तुला संक्रांति के दिन सूर्य देव की पूजा करना शुभ माना जाता है। इसके लिए किसी विशेष या कठिन पूजा विधि की जरूरत नहीं है। घर पर भी श्रद्धा के साथ सूर्य उपासना की जा सकती है।
सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें। इसके बाद तांबे के लोटे में जल भरें। चाहें तो इसमें लाल फूल और थोड़े अक्षत डाल सकते हैं। पूर्व दिशा की ओर मुख करके सूर्य देव को अर्घ्य दें। जल अर्पित करते समय 'ॐ सूर्याय नमः' मंत्र का जाप करें।
इसके बाद सूर्य देव का ध्यान करें और परिवार के कल्याण की प्रार्थना करें। यदि घर में सूर्य देव की तस्वीर है तो उसके सामने दीपक जलाकर पूजा भी कर सकते हैं। अपनी परंपरा के अनुसार आदित्य हृदय स्तोत्र या सूर्य चालीसा का पाठ किया जा सकता है।
ध्यान रहे कि 17 अक्टूबर को संक्रांति का क्षण शाम में है। इसलिए सुबह की सूर्य पूजा और पंचांग में बताया गया संक्रांति पुण्य काल अलग-अलग हैं। संक्रांति से जुड़े विशेष दान-पुण्य के लिए निर्धारित पुण्य काल का ध्यान रखें।
तुला संक्रांति पर क्या दान करना चाहिए
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, संक्रांति पर जरूरतमंद लोगों की सहायता करना पुण्यदायी माना जाता है। इस दिन अन्न, वस्त्र, फल और अपनी सामर्थ्य के अनुसार धन का दान किया जा सकता है।
कई परिवारों में संक्रांति पर गेहूं, गुड़ और अन्य अनाज दान करने की परंपरा भी है। हालांकि, दान की सामग्री और विधि क्षेत्रीय रीति-रिवाजों के अनुसार अलग हो सकती है। धार्मिक दृष्टि से दान करते समय दिखावे के बजाय श्रद्धा और सेवा के भाव को अधिक महत्व दिया जाता है।
अक्टूबर की संक्रांति पर क्या करें और क्या नहीं
संक्रांति के दिन सूर्योदय के समय स्नान, सूर्य को अर्घ्य, मंत्र जाप और दान करने की परंपरा है। इस दिन जरूरतमंदों की सहायता करना और सात्विक जीवनशैली अपनाना अच्छा माना जाता है।
कुछ परिवारों में संक्रांति के दिन तामसिक भोजन से परहेज किया जाता है। हालांकि, ऐसे नियम सभी क्षेत्रों में एक समान नहीं हैं। इसलिए अपने परिवार की धार्मिक परंपराओं का पालन किया जा सकता है।
