अध्यात्म

6 या 7 जनवरी, सकट चौथ कब है? जानिए 2026 में सकट माता की पूजा का सही दिन, तिथि, तारीख और पूजन मुहूर्त

Sakat Chauth 2026 (सकट चौथ व्रत, तिथि, पूजा मुहूर्त और महत्व) : माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी सकट चौथ का व्रत रखा जाता है। इस दिन भगवान गणेश और सकट माता की पूजा की जाती है। यह व्रत संतान की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए रखा जाता है। साल 2025 में इस व्रत की तारीख को लेकर लोगों में थोड़ा सा संशय व्याप्त है। आइए जानते हैं कि साल 2026 में सकट चौथ का व्रत कब रखा जाएगा।

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सकट चौथ 2026 का व्रत कब रखा जाएगा?

Sakat Chauth 2026 (सकट चौथ व्रत, तिथि, पूजा मुहूर्त और महत्व) : हिंदू धर्म में माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को सकट चौथ का व्रत रखा जाता है। यह व्रत संतान की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली के लिए किया जाता है। सकट चौथ को तिल-कुटा चौथ, तिलवा चौथ, माघी चौथ और वक्रतुंडी चतुर्थी जैसे नामों से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान गणेश और सकट माता व चंद्र देव की पूजा की जाती है। इस दिन महिलाएं संतान की रक्षा और तरक्की की कामना से व्रत को पूरी श्रद्धा से रखती हैं। साल 2026 में सकट चौथ को लेकर संशय है कि यह 6 जनवरी को मनाई जाएगी या 7 जनवरी को? आइए जानते कि सकट चौथ का व्रत किस दिन रखा जाएगा?

कब है सकट चौथ 2026?

द्रिक पंचांग के अनुसार, माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि का आरंभ 6 जनवरी 2026, मंगलवार को सुबह 08:01 बजे से होगा और समापन 7 जनवरी 2026 को सुबह 06:52 बजे होगा। सकट चौथ का व्रत चतुर्थी तिथि में चंद्रोदय के समय किया जाता है, क्योंकि इस दिन चंद्रमा की पूजा अनिवार्य मानी जाती है। 6 जनवरी 2026 को चंद्रोदय रात्रि 08:54 बजे चतुर्थी तिथि में होगा। वहीं, 7 जनवरी को चंद्रोदय पंचमी तिथि में होगा। इस कारण 6 जनवरी को ही सकट चौथ का व्रत किया जाएगा।

सकट चौथ पर बनेंगे ये शुभ योग

इस वर्ष सकट चौथ पर कई शुभ योगों का संयोग बन रहा है, जो व्रत और पूजा को और भी फलदायी बनाएगा।

  • सर्वार्थ सिद्धि योग: सुबह 07:15 बजे से दोपहर 12:17 बजे तक
  • प्रीति योग: प्रातःकाल से रात्रि 08:21 बजे तक रहेगा। इसके बाद आयुष्मान योग आरंभ हो जाएगा।
  • नक्षत्र: अश्लेषा नक्षत्र सुबह से दोपहर 12:17 बजे तक रहेगा। उसके बाद मघा नक्षत्र आरंभ हो जाएगा।
ये योग व्रत रखने वालों को संतान सुख, बाधाओं से मुक्ति और जीवन में सुख-शांति प्रदान कराते हैं।

भद्रा का रहेगा प्रभाव

सकट चौथ के दिन भद्रा का प्रभाव भी रहेगा, लेकिन यह बहुत कम समय का है।

  • भद्रा प्रारंभ: सुबह 07:15 बजे
  • भद्रा समाप्त: सुबह 08:01 बजे (कुल 46 मिनट)
भद्रा में धरती पर इसका प्रभाव रहता है, इसलिए इस समय कोई शुभ कार्य न करें। भद्रा समाप्त होने के बाद ही पूजा शुरू करें।

सकट चौथ की पूजा विधि

  • सुबह स्नान-ध्यान के बाद व्रत का संकल्प लें।
  • भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
  • गणपति को दूर्वा, मोदक, तिल के लड्डू और अन्य प्रिय वस्तुएं अर्पित करें।
  • सकट चौथ व्रत कथा पढ़ें या सुनें।
  • शाम को चंद्रोदय के समय चंद्र देव की पूजा करें। चंद्रमा को दूध या खीर का भोग लगाएं और दर्शन करें।
  • रात्रि में गणेश जी की आरती करें।
व्रत में दिनभर फलाहार करें और अगले दिन सुबह पारण करें।

सकट चौथ पर करें इन चीजों का दान

इस दिन दान का विशेष महत्व होता है। इस दिन काले तिल या तिल से बनी मिठाइयां (लड्डू आदि) दान करें। इसके साथ ही शुद्ध घी, गुड़, गरम कपड़े, अन्न और धन का दान भी कर सकते हैं। सकट चौथ के दिन जरूरतमंदों को भोजन कराएं। ऐसा करने से संतान की रक्षा होती है और घर में सुख-समृद्धि बढ़ती है।

Mohit Tiwari
मोहित तिवारीauthor

मोहित तिवारी को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रतिष्ठित न्यूजपेपर में फील्ड रिपोर्टिंग से की थी। मोहित ने प्रिंट, टीवी और डिजिटल तीनों प्लेटफॉर्म पर काम किया है। देश-विदेश, लाइफस्टाइल, धर्म और आध्यात्मिक विषयों में गहरी रुचि रखने वाले मोहित ने ज्योतिष का भी व्यापक अध्ययन किया है। मोहित के आलेख लाइफस्टाइल, हेल्थ, न्यूज, धर्म, ज्योतिष आदि विषयों पर गहरी शोध और प्रामाणिकता पर आधारित होते हैं और इन विषयों पर वह 12,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं।

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