अध्यात्म

रमजान के 3 अशरा कौन से हैं, जानिए इन अशरों में इबादत से क्या मिलता है सवाब?

Ramzan 2026 (Teen Ashra Kab Se Kab Tak) रमजान में तीन अशरा क्यों खास होते हैं : रमजान का महीना बेहद पाक माना जाता है। भारत में रमजान की शुरुआत 19 फरवरी से हो चुकी है। रमजान का महीना तीन अशरों में बंटा होता है। तीनों अशरों को बेहद ही खास माना जाता है। माना जाता है कि तीनों अशरों में इबादत करने से अलग-अलग सवाब मिलता है। आइए जानते हैं कि ये तीनों अशरे कौन से हैं और किसमें इबादत से क्या सवाब मिलता है?

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माह-ए-रमजान के तीन अशरा कौन से हैं?

Ramzan 2026 (Teen Ashra Kab Se Kab Tak): रमजान इस्लामिक कैलेंडर का सबसे पवित्र महीना है, जिसमें मुसलमान रोजा रखते हैं, कुरआन पढ़ते हैं और इबादत में ज्यादा समय बिताते हैं। इसी महीने में पवित्र कुरआन नाज़िल हुई थी। कुरआन की सूरह अल-बक़रा (2:185) में साफ बताया गया है कि रमजान वह महीना है जिसमें कुरआन उतारी गई, जो इंसानों के लिए हिदायत है।

रमजान को तीन हिस्सों में बांटा जाता है, जिन्हें अशरा कहा जाता है। हर अशरा 10 दिनों का होता है। पहला अशरा रहमत का, दूसरा मगफिरत का और तीसरा जहन्नम से आजादी का माना जाता है। आखिरी 10 रातें यानी तीसरा अशरा सबसे खास होता है क्योंकि इन्हीं रातों में लैलतुल कद्र आती है, जिसके बारे में सूरह अल-क़द्र (97:1-5) में बताया गया है कि यह रात हजार महीनों से बेहतर है।

रमजान के तीन अशरे क्या हैं? (What are Three Ashras of Ramzan?)

रमजान का महीना 29 या 30 दिनों का होता है और इसे 10-10 दिनों के तीन हिस्सों में बांटा गया है। हदीस में आता है कि रमजान का पहला हिस्सा रहमत का, बीच का हिस्सा मगफिरत का और आखिरी हिस्सा जहन्नम से निजात का होता है।

पहला अशरा (रहमत का अशरा) – रमजान के पहले 10 दिन रहमत यानी अल्लाह की दया के माने जाते हैं। हदीस में बताया गया है कि रमजान की शुरुआत रहमत से होती है। इस दौरान रोजेदार ज्यादा से ज्यादा इबादत करता है और अल्लाह से अपनी जिंदगी में बरकत की दुआ करता है। कुरआन में अल्लाह को रहमान और रहीम कहा गया है, यानी बहुत दयालु, इसलिए पहले अशरे में नमाज, रोजा और कुरआन की तिलावत पर खास ध्यान दिया जाता है।

दूसरा अशरा (मगफिरत का अशरा) – दूसरे 10 दिन मगफिरत यानी गुनाहों की माफी के माने जाते हैं। इस समय इंसान अपने किए हुए गुनाहों के लिए तौबा करता है और अल्लाह से माफी मांगता है।

हदीस में आता है कि जो शख्स सच्चे दिल से रोजा रखता है, उसके पिछले गुनाह माफ किए जा सकते हैं। इसलिए दूसरे अशरे में 'अस्तगफिरुल्लाह' पढ़ने और दिल से तौबा करने की खास अहमियत बताई गई है।

तीसरा अशरा (निजात का अशरा) – रमजान के आखिरी 10 दिन और रातें निजात यानी जहन्नम की आग से छुटकारे के माने जाते हैं। यही वह समय है जब इबादत अपने चरम पर होती है।

इन्हीं आखिरी 10 रातों में लैलतुल कद्र की तलाश की जाती है। कुरआन में बताया गया है कि लैलतुल कद्र हजार महीनों से बेहतर है। इस रात में फरिश्ते उतरते हैं और अल्लाह की खास रहमत होती है।

इस्लामी रिवायतों के अनुसार, पैगंबर हजरत मुहम्मद साहब आखिरी 10 रातों में इबादत को और बढ़ा देते थे। वह रातों को जागते थे, ज्यादा नमाज पढ़ते थे और अपने घरवालों को भी इबादत के लिए जगाते थे। इससे साफ है कि इन रातों की अहमियत कितनी ज्यादा है।

माह-ए-रमजान के तीन अशरा

माह-ए-रमजान के तीन अशरा

रमजान 2026 में तीनों अशरे कब से कब तक रहेंगे? (Ramzan 2026 Mein Teen Ashra Kab Se Kab Tak)

रमजान की शुरुआत चांद दिखने पर निर्भर करती है। 2026 में भारत में रमजान का महीना 19 फरवरी के से शुरू हो चुका है। इस दौरान भारत में तीन अशरे इस प्रकार से हैं।

पहला अशरा: 19 फरवरी से 28 फरवरी 2026 तक

दूसरा अशरा: 1 मार्च से 10 मार्च 2026 तक

तीसरा अशरा: 11 मार्च से 20 मार्च 2026 तक

अंतिम तारीख चांद दिखने पर तय होगी, इसलिए स्थानीय मस्जिद या चांद कमेटी की घोषणा मान्य होगी। सूरह अल-बक़रा (2:185) में रमजान में कुरआन के नाज़िल होने की बात कही गई है। सूरह अल-क़द्र में लैलतुल कद्र को हजार महीनों से बेहतर बताया गया है। हदीसों में रमजान को तीन हिस्सों में बांटकर रहमत, मगफिरत और निजात का जिक्र मिलता है। सहीह हदीस में आता है कि पैगंबर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) आखिरी 10 दिनों में कमर कस लेते थे, रातों को जागते थे और अपने घरवालों को भी इबादत के लिए जगाते थे।

लैलतुल कद्र 2026 कब है? (Lailatul Qadr 2026 Date in India)

लैलतुल कद्र रमजान की आखिरी 10 रातों में से किसी एक विषम रात (21, 23, 25, 27 या 29) में मानी जाती है। इस रात को हजार महीनों से बेहतर बताया गया है। मुसलमान खास तौर पर 27वीं रात को ज्यादा इबादत करते हैं, लेकिन असली तारीख अल्लाह ही बेहतर जानता है। इसलिए आखिरी 10 की हर विषम रात में इबादत करने की सलाह दी जाती है।

आखिरी 10 रातों का महत्व (Importance of Last 10 Nights of Ramzan)

  • इन्हीं रातों में कुरआन नाज़िल हुई।
  • लैलतुल कद्र इसी दौरान आती है।
  • दुआएं कबूल होने का खास समय माना जाता है।
  • गुनाहों की माफी का बड़ा मौका होता है।
  • पैगंबर हजरत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) इन रातों में इबादत और बढ़ा देते थे और इतिकाफ करते थे।

आखिरी 10 रातों में इबादत का तरीका (Ramadan KI Last 10 raat mei Ibadat Ka tarika)

अगर आप रमजान की अंतिम रातों में लाभ चाहते हैं तो इन कार्यों को जरूर करें। पांच वक्त की नमाज के साथ तरावीह पढ़ें। तहज्जुद की नमाज पढ़ने की कोशिश करें। रोज कुरआन की तिलावत करें। लैलतुल कद्र की दुआ पढ़ें ‘अल्लाहुम्मा इन्नका अफुव्वुन तुहिब्बुल अफ्व फअफु अन्नी।’ सदका और जकात दें। अगर संभव हो तो आखिरी 10 दिनों में इतिकाफ करें।

Mohit Tiwari
मोहित तिवारीauthor

मोहित तिवारी को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रतिष्ठित न्यूजपेपर में फील्ड रिपोर्टिंग से की थी। मोहित ने प्रिंट, टीवी और डिजिटल तीनों प्लेटफॉर्म पर काम किया है। देश-विदेश, लाइफस्टाइल, धर्म और आध्यात्मिक विषयों में गहरी रुचि रखने वाले मोहित ने ज्योतिष का भी व्यापक अध्ययन किया है। मोहित के आलेख लाइफस्टाइल, हेल्थ, न्यूज, धर्म, ज्योतिष आदि विषयों पर गहरी शोध और प्रामाणिकता पर आधारित होते हैं और इन विषयों पर वह 12,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं।

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