अध्यात्म

रक्षा बंधन 2025 में भद्रा कब लगेगी, देखें राखी 2025 पर भद्रा टाइम, क्यों भद्रा काल में क्यों नहीं बांधी जाती राखी

Raksha bandhan 2025 muhurat bhadra time (राखी भद्रा समय 2025, Raksha Bandhan Bhadra time 2025): रक्षा बंधन का पर्व सावन पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। ऐसे तो ये दिन शुभ होता है लेकिन भद्रा काल के समय राखी नहीं बांधी जाती। इसकी कहानी रामायण काल में रावण और शूर्पणखा से जुड़ी है। 2025 के रक्षा बंधन पर भद्रा काल सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाएगा। यानी राखी बांधने के समय पर भद्रा साया नहीं है। नोट करें Bhadra Timing on Rakhi 2025।

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रक्षा बंधन 2025 में भद्रा कब लगेगी (Pic: Canva)

Raksha bandhan 2025 bhadra time (राखी भद्रा समय 2025): राखी का त्योहार भाई और बहन के स्नेह का पवित्र बंधन है। लेकिन राखी हमेशा शुभ मुहूर्त में बांधी जाती है। इससे भाई दीर्घायु होता है। इसी के साथ ही भद्रा काल में राखी बांधना अशुभ माना जाता है। इसकी कहानी रामायण काल में रावण और शूर्पणखा से जुड़ी है। आप यहां से सटीक Bhadra Timing on Rakhi 2025, Raksha BanDhan 2025 Muhurat Bhadra Time और Raksha Bandhan Bhadra time 2025 देख सकते हैं। हालांकि 9 अगस्त को सूर्योदय से पहले भद्रा काल समाप्त हो जाएगा।

Raksha bandhan 2025 bhadra time

2025 में सावन पूर्णिमा की तिथि 8 अगस्त 2025 को दोपहर 02:12 बजे से आरंभ होगी। भद्रा काल इसके कुछ ही समय बाद आरंभ होगा। सावन पूर्णिमा की तिथि 9 अगस्त को दोपहर 01:24 बजे समाप्त होगी। लेकिन भद्राकाल इस दिन सूर्योदय से पहले 5:46 पर समाप्त हो जाएगा। इससे राखी पर भद्रा का साया नहीं होगा।

2025 में राखी बांधने का शुभ मुहूर्त

  • 04:21 am से 05:06 am ब्रह्म मुहूर्त में
  • 11:59 am से 12:54 pm तक अभिजीत मुहूर्त में
  • 05:47 प्रातःकाल से 02 बजकर 23 मिनट तक कभी भी। इस समय सर्वार्थ सिद्ध योग रहेगा।
  • 02:23 pm से 03:23 pm तक विजय मुहूर्त में
  • सायंकाल निशीथ काल में 05:43 pm से 07:22 pm तक

भद्रा कौन है

पुराणों में भद्रा देवी को शनि देव की बहन बताया गया है। माना जाता है कि जब वो क्रोधित होती हैं तो कार्य में विघ्न उत्पन्न करती हैं। इसलिए उनके समय में शुभ कार्य नहीं करने चाहिए।

वहीं ज्योतिषाचार्य सुजीत जी महाराज ने बताया कि भद्रा एक विशेष काल या समय होता है, जिसका वर्णन हिन्दू पंचांग और ज्योतिष शास्त्र में किया गया है। इसे विष्टि करण भी कहा जाता है और यह एक अशुभ समय माना जाता है। इस समय में मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश, मुहूर्त, नए कार्य की शुरुआत नहीं की जाती है। भद्रा दिन या रात किसी भी समय हो सकती है।

भद्रा काल में राखी क्यों नहीं बांधी जाती है

ज्योतिषाचार्य सुजीत जी महाराज बताते हैं कि रावण की बहन शूर्पणखा ने भद्रा काल में उसको राखी बांधी थी। यही कारण है कि रावण की मृत्यु हुई। यहां बात राखी के धागे की है। वह सामान्य बंधन नहीं है। इस बंधन के पीछे शुभ मुहूर्त का महत्व है। सुरक्षा का प्रश्न है। भाई और बहन दोनों के जीवन से संबंध है। इसलिए भद्रा मुक्त समय में राखी बाधें। भगवान शिव की प्रसन्नता आवश्यक है। विष्णु और शिव पूजा इस दिन साथ ही होती है। सुख व प्रेम की इस सृष्टि का संतुलन देखना आवश्यक होता है तो ऐसी स्थिति में भद्रा काल में राखी नहीं बाधी जाती।

Medha Chawla
मेधा चावलाauthor

मेधा चावला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन की लीड हैं। लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव रखने वाली मेधा की विशेषज्ञता हेल्थ, वेलनेस, फिटनेस, मेंटल हेल्थ, डेली लाइफ इम्प्रूवमेंट, ह्यूमन-इंटरेस्ट फीचर्स और रिसर्च-बेस्ड स्टोरीज तक फैली है। उनकी लेखन शैली पाठकों को जटिल स्वास्थ्य और जीवनशैली संबंधी विषयों को आसान, समझने योग्य और व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करती है, जिससे उनका कंटेंट व्यापक पाठक समूह से जुड़ता है। अबतक 30,000 से अधिक कंटेंट पीस लिख चुकी मेधा की कई एक्सक्लूसिव स्टोरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड सेट कर चुकी हैं।

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