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Budh Pradosh Vrat Puja Vidhi, Katha: बुध प्रदोष व्रत की पूजा विधि, फायदे, महिमा और व्रत कथा यहां देखें

  • Authored by: लवीना शर्मा
  • Updated May 17, 2023, 04:43 PM IST

Budh Pradosh Vrat 2023 Puja Vidhi And Katha: प्रदोष व्रत का महत्व बताते हुए महाज्ञानी सूत जी ने कहा था कि, ‘जब कलयुग में अधर्म बढ़ने लगेगा, लोग सत्य के मार्ग को छोड़कर अन्याय के रास्ते पर चल पड़ेंगे, उस समय प्रदोष व्रत एक ऐसी लौ बनकर उभरेगा जिससे लोग महादेव की आराधना कर अपने पापों से मुक्ति पा सकेंगे।’

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Budh Pradosh Vrat 2023 Puja Vidhi, Katha: बुधवार प्रदोष व्रत पूजा विधि और कथा यहां देखें

Budh Pradosh Vrat 2023 Puja Vidhi And Katha: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व (Pradosh Vrat Significance) माना जाता है। इस व्रत में भगवान शिव (Lord Shiva) की पूजा की जाती है। हिंदू पंचांग अनुसार चंद्र मास के 13वें दिन यानी त्रयोदशी को प्रदोष व्रत पड़ता है। मान्यता है जो व्यक्ति इस व्रत को सच्चे दिल से रखता है उसकी सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। प्रदोष व्रत 17 मई दिन बुधवार को रखा जाएगा। इस व्रत को त्रयोदशी व्रत (Trayodashi Vrat) के नाम से भी जाना जाता है। ये हर महीने में दो बार पड़ता है। जानिए प्रदोष वत की महिमा, नियम और विधि।

Pradosh Vrat Benefits (प्रदोष व्रत के फायदे)

हिंदू धार्मिक मान्यताओं अनुसार प्रदोष व्रत रखने से भगवान शिव की असीम कृपा प्राप्त होती है। पुराणों में इस बात का जिक्र मिलता है कि जो व्यक्ति ये व्रत रखता है उसे 2 गायों के दान के बराबर पुण्य की प्राप्ति होती है और व्यक्ति को उसके सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है। इतना ही नहीं इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति को अच्छे स्वास्थ्य और लंबी आयु की प्राप्ति होती है। ये व्रत सभी मनोकामनाओं की पूर्ति करने वाला माना गया है।

Pradosh Vrat Vidhi (प्रदोष व्रत की विधि)

  • व्रत रखने वाले लोगों को प्रदोष व्रत के दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठ जाना चाहिए।
  • इसके बाद स्नान कर साफ कपड़े पहन घर के मंदिर को साफ कर लें।
  • पूजा में बेल पत्र, अक्षत, धूप, गंगा जल इत्यादि जरूर रखें और इन सब चीजों का प्रयोग करते हुए भगवान शिव की पूजा करें।
  • इस व्रत में अन्न का सेवन न करें।
  • पूरे दिन उपवास करने के बाद सूर्यास्त से कुछ देर पहले दोबारा स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें।
  • दोबारा भगवान शिव की पूजा की तैयारी करें।
  • गाय के गोबर से मंडप बना लें। इसके बाद पांच अलग-अलग तरह के रंगों से मंडप में एक रंगोली बना लें।
  • फिर पूर्व या उत्तर पूर्व दिशा की तरफ मुंह करके कुशा के आसन पर बैठ जाएं।
  • अब भगवान शिव के 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करते हुए शिव पर जल चढ़ाएं।
  • इसके बाद जिस दिन का प्रदोष व्रत कर रहे हैं उस दिन से जुड़ी प्रदोष व्रत कथा करें।
  • अंत में शिव जी की आरती उतारें और उन्हें भोग अर्पित करें।

(डिस्क्लेमर : यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्‍स नाउ नवभारत इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है।)

लवीना शर्मा
लवीना शर्माauthor

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करियर की शुरुआत न्यूज 24 से हुई। इसके बाद तमाम चैनलों में काम किया। जहां स्क्रिप्ट राइटिंग, एडिटिंग और एंकरिंग का अनुभव हासिल हुआ। रफ्तार यहीं नहीं रूकी अब चाह थी कुछ नया करने की जिसके लिए मैंने डिजिटल मीडिया में स्विच किया और मैं जनसत्ता से जुड़ गई। जनसत्ता में मैंने अध्यात्म सेक्शन लीड किया। इसके बाद पत्रिका में सेवाएं दी और अब timesnowhindi.com से जु़ड़ी हूं। यहां भी मैं अध्यात्म सेक्शन में कार्यरत हूं। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और ज्योतिष शास्त्र में मेरा शुरू से ही लगाव रहा है। मेरी कोशिश रहती है कि मैं ऐसा कंटेट लिखूं जिससे बड़े बुजुर्ग ही नहीं बल्कि आज के युवा भी कनेक्ट कर सकें।

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