प्रदोष व्रत कथा, Budh Pradosh Vrat Katha 2025: आज शाम जरूर पढ़ें प्रदोष व्रत कथा, पूरी होंगी सारी मनोकामनाएं
- Authored by: Mohit Tiwari
- Updated Dec 17, 2025, 10:23 AM IST
Pradosh Vrat Katha Hindi (प्रदोष व्रत कथा) पर Budh Pradosh Vrat Katha 2025: जानिए भगवान शिव से जुड़ी पौराणिक कथा, व्रत का धार्मिक महत्व और कथा पढ़ने का फल: आज 17 दिसंबर 2025 दिन बुधवार को षौष माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि है। इस कारण आज के दिन साल का अंतिम प्रदोष व्रत रखा जा रहा है। मान्यता है कि प्रदोष व्रत के दिन पूजा करने के लिए साथ ही कथा पढ़ने या सुनने मात्र से जीवन के सभी दुख दूर होकर सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। आइए जानते हैं कि आज प्रदोष व्रत की पूजा के दौरान शाम को कौन सी कथा का पाठ करें या सुनें।
प्रदोष व्रत कथा
Pradosh Vrat Katha Hindi (प्रदोष व्रत कथा व बुध प्रदोष व्रत कथा): आज 17 दिसंबर 2025 बुधवार है और साल का अंतिम प्रदोष व्रत है। बुधवार के दिन पड़ने वाले इस प्रदोष व्रत को रोग, कष्ट और कर्ज से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है। इस दिन प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। पूजा के साथ व्रत कथा का पाठ या श्रवण जरूर करना चाहिए, क्योंकि इससे व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है। आज शाम 5:27 से रात 8:11 बजे तक प्रदोष काल रहेगा। इस दौरान भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और नंदी व कार्तिकेय का पूजन करें। इसके बाद व्रत की कथा का पाठ करें, आइए जानते हैं प्रदोष व्रत कथा।
बुध प्रदोष व्रत कथा (Budh Pradosh Vrat Katha)
प्राचीन समय की बात है। एक युवक का नया-नया विवाह हुआ था। विवाह के दो दिन बाद ही उसकी पत्नी मायके चली गई। कुछ दिनों बाद युवक अपनी पत्नी को लेने ससुराल पहुंचा। उस दिन बुधवार था। जब वह पत्नी को विदा कराने लगा तो सास-ससुर ने मना कर दिया और कहा कि बुधवार को कन्या विदा करना अशुभ होता है, लेकिन युवक नहीं माना और जबरदस्ती पत्नी को विदा करा लिया। सास-ससुर भारी मन से बेटी-जमाई को विदा कर दिया।
रास्ते में पत्नी को प्यास लगी। युवक पानी की तलाश में इधर-उधर गया और पत्नी एक पेड़ के नीचे बैठ गई। जब युवक पानी लेकर लौटा तो उसने देखा कि उसकी पत्नी किसी दूसरे पुरुष के साथ हंस-बोलकर बातें कर रही है और उसी के लोटे से पानी पी रही है। वह पुरुष बिल्कुल युवक जैसा दिखता था। यह देखकर युवक को गुस्सा आ गया। जब वह पास पहुंचा तो पत्नी भी हैरान हो गई कि दोनों पुरुष एक जैसे कैसे हैं।
दोनों आपस में झगड़ने लगे। आसपास भीड़ जमा हो गई और सिपाही भी आ गए। सिपाहियों ने पत्नी से पूछा कि तुम्हारा पति कौन है। पत्नी सोच में पड़ गई। युवक मन ही मन भगवान शिव से प्रार्थना करने लगा कि ‘हे भोलेनाथ, मैंने बड़ी गलती की जो सास-ससुर की बात नहीं मानी और बुधवार को पत्नी को विदा करा लिया। अब मेरी रक्षा करें। मैं जीवन भर प्रदोष व्रत रखूंगा।’
जैसे ही उसकी प्रार्थना पूरी हुई, दूसरा पुरुष गायब हो गया। पति-पत्नी सकुशल घर पहुंच गए। उसके बाद से उन्होंने नियमित रूप से प्रदोष व्रत रखना शुरू कर दिया और जीवन सुखमय हो गया।
बुध प्रदोष व्रत कथा का महत्व
प्रदोष व्रत रखने से भगवान शिव हर संकट से बचाते हैं। कथा पढ़ने या सुनने से बुध ग्रह के दोष शांत होते हैं, बुद्धि तेज होती है और व्यापार में सफलता मिलती है। आज साल का अंतिम प्रदोष है तो कथा जरूर पढ़ें या सुनें।