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Pradosh Vrat 2026: कब और कैसे किया जाता है प्रदोष व्रत, जानें प्रदोष व्रत की संपूर्ण पूजा विधि और सामग्री

Pradosh Vrat 2026 (Pradosh Vrat Puja Vidhi): आज 12 जून 2026 को शुक्रवार के दिन प्रदोष व्रत किया जा रहा है। ऐसे में आपको इस व्रत की संपूर्ण पूजा विधि और सामग्री जान लेनी चाहिए।

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प्रदोष व्रत की पूजा विधि

Pradosh Vrat 2026 (Pradosh Vrat Puja Vidhi): सनातन धर्म में प्रदोष व्रत भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। आज 12 जून 2026, शुक्रवार को ज्येष्ठ अधिकमास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर शुक्र प्रदोष व्रत रखा जा रहा है। प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से सभी प्रकार के कष्ट दूर होते हैं तथा सुख, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यता है कि प्रदोष व्रत का श्रद्धापूर्वक पालन करने से व्यक्ति को अनेक यज्ञों और दान के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। आइए जानते हैं प्रदोष व्रत की पूजा विधि (Pradosh Vrat Puja Vidhi) और पूजा सामग्री।

प्रदोष व्रत कब रखा जाता है? (Pradosh Vrat 12 June 2026)

हिंदू कैलेंडर के अनुसार,प्रत्येक माह की त्रियोदशी तिथि को प्रदोष व्रत किया जाता है। यह व्रत त्रयोदशी तिथि में प्रदोष काल के दौरान भगवान शिव की विशेष पूजा के लिए शुभ माना जाता है। यह व्रत सप्ताह के अलग-अलग दिनों में अलग-अलग फल देने वाला होता है। आज शुक्रवार को पड़ने वाला प्रदोष व्रत दांपत्य सुख, सौभाग्य, वैभव और पारिवारिक खुशहाली प्रदान करने वाला माना जाता है।

प्रदोष व्रत की पूजा विधि (Pradosh Vrat Puja Vidhi)

प्रदोष व्रत के दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें। दिनभर यथाशक्ति उपवास रखें तथा भगवान शिव का ध्यान करें। शाम को प्रदोष काल में शिव मंदिर जाएं या घर में शिवलिंग स्थापित कर पूजा करें। इस दौरान शिवलिंग पर गंगाजल, जल, दूध, दही, शहद और घी से अभिषेक करें। इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, सफेद पुष्प, अक्षत और चंदन अर्पित करें। पूजा के दौरान 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जप करें तथा शिव चालीसा, प्रदोष व्रत कथा और शिव आरती का पाठ करें।

प्रदोष व्रत की पूजा सामग्री (Pradosh Vrat Ki Puja Samagri)

प्रदोष व्रत की पूजा के लिए लाल या पीला गुलाल, सफेद चंदन, सफेद मिठाई, बेलपत्र, अक्षत, कलावा, धागा, कपूर, धूपबत्ती, दीपक (चिराग), ताजे फल और पुष्प की आवश्यकता होती है। भगवान शिव की पूजा में ये सभी चीजें शुभ मानी जाती हैं। इसके साथ ही शिवलिंग का अभिषेक करने के लिए जल या गंगाजल भी अवश्य रखें, जिससे पूजा पूर्ण विधि-विधान से संपन्न हो सके।

प्रदोष व्रत में कौन से देवता की पूजा की जाती है

प्रदोष व्रत के दिन शिव परिवार (भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और नंदी महाराज) की पूजा का विशेष महत्व है। इस दिन शिवलिंग का जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक और बेलपत्र अर्पित करने से भगवान शिव जल्दी प्रसन्न होते हैं। मान्यता है कि शिव परिवार की आराधना करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।

gulshan kumar
गुलशन कुमारauthor

गुलशन कुमार टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के हेल्थ सेक्शन से जुड़े हैं। फिटनेस और योग के प्रति उनकी रुचि उन्हें हेल्थ जर्नलिज्म की ओर लेकर आई, जहां वे आम लोगों की जीवनशैली, सेहत और वेलनेस से जुड़े विषयों पर लगातार काम कर रहे हैं। गुलशन अबतक 2,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। उनके लेखों में आसान भाषा में दी गई जानकारी, रिसर्च-बेस्ड टिप्स और रोजमर्रा की सेहत से जुड़े विषयों की स्पष्ट समझ दिखाई देती है। हेल्थ अवेयरनेस को बढ़ावा देना, फिटनेस को सरल तरीके से समझाना और बेहतर लाइफस्टाइल के लिए उपयोगी सुझाव देना—गुलशन की लेखन शैली की खासियत है।

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