Paush Amavasya Katha: पौष अमावस्या व्रत कथा, यहां पढ़ें गरीब ब्राह्मण और साधु की कहानी
- Authored by: Srishti
- Updated Dec 19, 2025, 05:49 AM IST
Paush Amavasya Katha In Hindi (पौष अमावस्या व्रत कथा): सनातन धर्म में पौष अमावस्या का खास महत्व माना जाता है। वैसे तो ये तिथि हर महीने आती है, लेकिन दिसंबर में पौष अमावस्या आज यानी 19 दिसंबर को है। यहां से आप पौष अमावस्या की व्रत कथा पढ़ सकते हैं।
पौष अमावस्या व्रत कथा (pic credit: canva)
Paush Amavasya Katha In Hindi (पौष अमावस्या व्रत कथा): पौष अमावस्या की पौराणिक कथा के अनुसार, एक ब्राह्मण था जो बेहद गरीब था। उसकी एक सुंदर, गुणवान और संस्कारी बेटी थी। लेकिन गरीब होने के कारण उसका विवाह नहीं हो पा रहा था। एक दिन गरीब ब्राह्मण के घर पर एक साधु आए जिनकी ब्राह्मण ने बहुत सेवा की। साधु ने ब्राह्मण की सेवा से खुश होकर उन्हें आशीर्वाद दिया। फिर ब्राह्मण ने अपनी कन्या के विवाह के लिए साधु से कोई उपाय पूछा। साधु ने कहा कि यहां से कुछ दूरी पर एक परिवार रहता है। यदि तुम्हारी कन्या हर रोज जाकर उसकी पत्नी की सेवा करें तो इसका विवाह हो जाएगा। अगले दिन सुबह उठकर कन्या उनके घर साफ सफाई करके अपने घर वापस लौटती है।
उस घर में रहने वाली स्त्री हैरान हो जाती है कि रोज-रोज कौन उसके घर में आकर सफाई करके चला जा रहा है। कुछ दिन बाद उस महिला ने ब्राह्मण की पुत्री को पकड़ लिया और पूछने लगी कि आप कौन हैं और क्यों रोज सुबह उनके घर की साफ-सफाई करती हैं। तब कन्या ने साधु द्वारा कही गई सारी बातें महिला को बता दीं। महिला ने उस कन्या की सेवा से खुश होकर जल्द उसका विवाह होने का आशीर्वाद दिया लेकिन जैसे ही महिला ने यह आशीर्वाद दिया वैसे ही उस महिला के पति की मृत्यु हो गई। लेकिन फिर भी महिला ने हार नहीं पानी और अपने आंगन में लगे पीपल के पेड़ की 108 परिक्रमा करके भगवान विष्णु से अपने पति को पाने के लिए प्रार्थना की।
कहते हैं जिस दिन ये सब हुआ उस दिन पौष अमावस्या थी। भगवान की कृपा से उसका पति फिर से जीवित हो गया और उस कन्या का भी विवाह हो गया। माना जाता है कि पौष अमावस्या के दिन जो जातक पीपल की परिक्रमा करता है उसकी हर मनोकामना पूरी हो जाती हैं।