अध्यात्म

पापमोचिनी एकादशी पर जरूर करें तुलसी से जुड़ा काम, मां लक्ष्मी बना देंगी धनवान

Papmochani Ekadashi Par Tulsi Puja Kaise Kare: तुलसी जी को 'हरिप्रिया' भी कहा जाता है, क्योंकि प्रभु श्रीहरि को तुलसी अति प्रिय है। एकादशी के दिन तुलसी पूजा का महत्व और भी ज्यादा बढ़ जाता है। यहां से आप पापमोचिनी एकादशी पर तुलसी के उपाय और पूजा के नियम के बारे में जान सकते हैं।

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पापमोचिनी एकादशी पर तुलसी के उपाय और पूजा के नियम (pc: pinterest)

Papmochani Ekadashi Par Tulsi Puja Kaise Kare: हिंदू धर्म में एकादशी का खास महत्व है। चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को पापमोचिनी एकादशी कहते हैं। पापमोचिनी का अर्थ है पापों से मुक्ति देने वाली। कहते हैं कि इस एकादशी का व्रत करने से पिछले पापों से मुक्ति मिलती है, मन शुद्ध होता है और भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं। इस दिन तुलसी पूजन का भी विशेष महत्व होता है। यहां से आप पापमोचिनी एकादशी पर तुलसी से जुड़े उपाय और तुलसी पूजा के बारे में बता रहे हैं।

पापमोचिनी एकादशी पर तुलसी के क्या उपाय करने चाहिए?

1. पापमोचिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के लिए चरणामृत और पंजीरी का भोग तैयार करें। उसमें तुलसी के पत्ते जरूर डालें। इसके बाद ही भगवान विष्णु को भोग लगाएं। इससे आर्थिक समस्याएं समाप्त हो जाती है।

2. पापमोचिनी एकादशी के दिन ही आपको तुलसी के पौधे पर शाम के समय में घी का दीपक जलाना है। साथ ही भगवान विष्णु के मंत्र का जाप करें। 11 बार तुलसी के पौधे की परिक्रमा भी करें। ऐसा करने से घर में सुख शांति बनी रहती है।

3. अच्छे दांपत्य जीवन के लिए पापमोचिनी एकादशी के दिन माता तुलसी को लाल चुनरी चढ़ाएं। लाल चुनरी तुलसी को चढ़ाने से मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।

तुलसी माता के मंत्र-

1. तुलसी गायत्री मंत्र-

ॐ तुलसीदेव्यै च विद्महे, विष्णुप्रियायै च धीमहि, तन्नो वृन्दा प्रचोदयात्।।

2. तुलसी स्तुति-

महाप्रसाद जननी सर्व सौभाग्यवर्धिनी,

आधि व्याधि हरा नित्यं तुलसी त्वं नमोस्तुते।।

3. तुलसी नामाष्टक मंत्र-

वृंदा वृंदावनी विश्वपूजिता विश्वपावनी।

पुष्पसारा नंदनीय तुलसी कृष्ण जीवनी।।

एतभामांष्टक चैव स्त्रोतं नामर्थं संयुतम।

य: पठेत तां च सम्पूज्य सौश्रमेघ फलंलमेता।।

एकादशी के दिन तुलसी की पूजा कैसे करनी चाहिए?

पापमोचिनी एकादशी पर सुबह- सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करें और इसके बाद साफ-सुथरे कपड़े विशेषकर पीले रंग के वस्त्र पहनें। भगवान विष्णु को भोग लगाते समय उसमें 'तुलसी दल' जरूर शामिल करें, क्योंकि बिना तुलसी के श्रीहरि का भोग अधूर माना जाता है। विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा के बाद तुलसी के पास घी का दीपक जलाएं। तुलसी जी को सिंदूर, लाल चुनरी, और शृंगार का सामान अर्पित करें। संध्या के समय तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जलाएं और 5, 7, या 11 बार परिक्रमा करें। परिक्रमा करते समय 'ओम नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें। आखिर में तुलसी चालीसा का पाठ और तुलसी माता की आरती करें। तुलसी माता की आरती के बाद भगवान विष्णु की आरती भी करनी चाहिए।

Srishti
सृष्टिauthor

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और साहित्य में गहरी रुचि है। यही वजह है कि उनके लेखों में परंपरा, आस्था और जीवनशैली की सहज समझ खूबसूरती से दिखाई देती है। वह धार्मिक कथाओं, ग्रंथों से जुड़े विषयों, आध्यात्मिक ट्रेंड्स और समकालीन जीवनशैली पर 5,000 से अधिक लेख लिख चुकी हैं। मॉडर्न लाइफस्टाइल और पारंपरिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाते हुए वह ऐसे कंटेंट गढ़ती हैं, जो प्रेरक होने के साथ-साथ जानकारीपूर्ण भी होता है।

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