26 मई 2025 पंचांग (Panchang 26 May 2025 In Hindi): 26 मई 2025 को ज्येष्ठ अमावस्या रहेगी। जिसकी शुरुआत दोपहर 12 बजकर 11 मिनट से होगी और समाप्ति 27 मई 2025 को सुबह 8 बजकर 31 मिनट पर होगी। पंचांग अनुसार इस दिन सोमवती अमावस्या मनाई जाएगी। तो वहीं महिलाएं वट सावित्री व्रत रहेंगी। इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:51 से दोपहर 12:46 तक रहेगा। ये मुहूर्त शुभ कार्यों को करने के लिए उत्तम माना जाता है। चलिए अब जान लेते हैं इस दिन का पूरा पंचांग।
26 मई 2025 पंचांग (26 May 2025 Panchang)
संवत- विक्रम संवत 2082
माह- ज्येष्ठ, कृष्ण पक्ष
तिथि- चतुर्दशी 12:12 pm तक फिर अमावस्या
पर्व- दर्श अमावस्या व्रत, वट सावित्री पूजा व व्रत, सोमवती अमावस्या
दिवस-सोमवार
सूर्योदय- 05:09 am
सूर्यास्त- 7:08pm
नक्षत्र- भरणी 08:25 am तक फिर कृतिका
चन्द्र राशि- मेष 01:41 pm तक फिर वृष
सूर्य राशि- वृष
करण- शकुनि 12:12 pm तक फिर चतुष्पद
योग- शोभन07:03 am तक फिर अतिगण्ड
26 मई 2025 शुभ मुहूर्त (26 May 2025 Shubh Muhurat)
अभिजीत-11:53 am से 12:43 pm
विजय मुहूर्त-02:23 pm से 03:25 pm तक
गोधुली मुहूर्त--06:26 pm से 07:27 pm तक
ब्रम्ह मुहूर्त-4:06 am से 05:09 am तक
अमृत काल-06:02 am से 07:42 am तक
निशीथ काल मुहूर्त-रात्रि 11:41 से 12:22 तक रात
संध्या पूजन- 06:20pm से 07:08pm तक
दिशा शूल- पूर्व दिशा। इस दिशा में यात्रा से बचें। दिशाशूल के दिन उस दिशा की यात्रा करने से बचते हैं, यदि आवश्यक है तो एक दिन पहले प्रस्थान निकालकर फिर उसको लेकर यात्रा करें।
अशुभ मुहूर्त- राहुकाल-सायंकाल 07:30 बजे से 09 बजे तक
क्या करें- ज्येष्ठ माह दर्श अमावस्या व वट सावित्री व्रत है। यह व्रत बहुत ही पुण्यदायी होता है। सुहागन महिलाएं बरगद की पूजा पाठ करके विधिवत नियम पूर्वक यह व्रत रखती हैं। गर्मी में गुड़, जल सहित थर्मस या घड़ा व सप्त अन्न का दान करना बहुत फलित होता है। मन का निर्मल व सात्विक होना बहुत ही आवश्यक है। घर की छत पर विहंगों को दाना -पानी दें। गौ शाला जाएं, वहां गौ माता को रोटी, गुड़, चारा, पालक इत्यादि खिलाने से अखण्ड पुण्य की प्राप्ति होती है। अमावस्या को बटुक भैरव स्तोत्रम का पाठ करें। अमावस्या को भगवान शंकर की उपासना से कष्ट समाप्त होता है। महिलाएं वट सावित्री व्रत फलाहार व एकदम नियम पूर्वक रहें। मीठा व जल का दान -पुण्य अनन्त गुना फ़लदायी होता है। बालक, वृद्ध व रोगी महिलाएं व्रत से बचें व केवल पूजा पाठ करें। महिलाएं पति का चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें। वट सावित्री व्रत में पूजन के बाद प्रसाद के रूप में चने की सब्जी व पूड़ी बनती है। अमावस्या को पितृ दोष के शमन के लिए काशी के पिशाच मोचन मन्दिर में त्रिपिंडी श्राद्ध पूजा भी होती है। विवाहित महिलाएं अपने पति का चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लें, पति उनको स्वर्ण आभूषण उपहार में दें।
क्या न करें- वट सावित्री पूजा के दिन असत्य से बचें।
