अध्यात्म

Pana Sankranti 2024 Date: पना संक्रांति कहां मनाई जाती है, इस दिन क्या करते हैं

  • Authored by: लवीना शर्मा
  • Updated Apr 13, 2024, 06:52 AM IST

Pana Sankranti 2024 Date: हिंदू पंचांग अनुसार जिस दिन भगवान सूर्य मेष राशि में प्रवेश करते हैं उस दिन मेष संक्रांति मनाई जाती है। जिसे ओडिशा में पना संक्रांति के नाम से जाना जाता है। जानिए इस साल पना संक्रांति कब है, क्यों और कैसे मनाया जाता है ये पर्व।

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Pana Sankranti 2024 Date

Pana Sankranti 2024 Date And Time: पना संक्रांति का पर्व ओडिशा में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। इस बार ये पर्व 13 अप्रैल को मनाया जा रहा है। इस अवसर पर ओडिशा के लोग एक-दूसरे को पना संक्रांति और नए वर्ष की शुभकामनाएं भी देते हैं। इस पर्व में दही, सत्तू, फल और अन्य चीजों से बने शर्बत पीने का विधान है। ये पर्व देश के अलग-अलग हिस्सों में भिन्न-भिन्न नामों से जाना जाता है। उत्तर भारत में इसे बैसाखी (Baisakhi 2024) कहते हैं तो केरल में विशु (Vishu 2024) और तमिलनाडु में इसे पुथांडु (Puthandu Festival 2024) के नाम से मनाया जाता है। वहीं असम के लोग इस पर्व को बिहू (Bihu 2024) के नाम से मनाते हैं।

पना संक्रांति का महत्व (Pana Sankranti Ka Mahatva)

पना संक्रांति सौर वर्ष के पहले दिन मनाई जाती है। ओडिया की परंपरा के अनुसार पना संक्रांति के दिन ही हनुमान भगवान का जन्मदिन हुआ था। इसलिए इस दिन यहां हनुमान जयंती भी मनाई जाती है। इस दिन भगवान सूर्य उत्तरायण का आधा सफर पूरा कर लेते हैं। अन्य संक्रांति की तरह ही इस दिन भी स्नान-दान, पितरों का तर्पण और मधुसूदन भगवान की पूजा का महत्व बताया गया है।

पना संक्रांति पर क्या करते हैं (Pana Sankranti Par Kya Karte Hai)

इस दिन सूर्य की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। कहते हैं पना संक्रांति के दिन सूर्य की पूजा करने से व्यक्ति को जीवन में सूर्य देवता का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसलिए इस दिन सूर्य को अर्घ्य जरूर देना चाहिए। कहते हैं सूर्य की पूजा करने से व्यक्ति को मान-सम्मान की प्राप्ति होती है।

पना संक्रांति पर करें ये दान (Pana Sankranti Daan)

मेष संक्रांति के दिन दान पुण्य का भी विशेष महत्व माना जाता है। कहते हैं कि इस दिन दान करने से सूर्य देवता प्रसन्न होते हैं। लेकिन दान करने से पहले पवित्र नदी में स्थान जरूर करें। लेकिन अगर नदियों में स्नान नहीं कर सकते हैं तो घर में स्नान के पानी में ही गंगाजल डालकर स्नान करें।

लवीना शर्मा
लवीना शर्माauthor

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करियर की शुरुआत न्यूज 24 से हुई। इसके बाद तमाम चैनलों में काम किया। जहां स्क्रिप्ट राइटिंग, एडिटिंग और एंकरिंग का अनुभव हासिल हुआ। रफ्तार यहीं नहीं रूकी अब चाह थी कुछ नया करने की जिसके लिए मैंने डिजिटल मीडिया में स्विच किया और मैं जनसत्ता से जुड़ गई। जनसत्ता में मैंने अध्यात्म सेक्शन लीड किया। इसके बाद पत्रिका में सेवाएं दी और अब timesnowhindi.com से जु़ड़ी हूं। यहां भी मैं अध्यात्म सेक्शन में कार्यरत हूं। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और ज्योतिष शास्त्र में मेरा शुरू से ही लगाव रहा है। मेरी कोशिश रहती है कि मैं ऐसा कंटेट लिखूं जिससे बड़े बुजुर्ग ही नहीं बल्कि आज के युवा भी कनेक्ट कर सकें।

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