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Maa Skandamata Vrat Katha In Hindi: नवरात्रि के पांचवें दिन होती है मां स्कंदमाता की पूजा, पढ़ें इनकी व्रत कथा

  • Authored by: लवीना शर्मा
  • Updated Apr 13, 2024, 11:09 AM IST

Navratri 2024 5th Day, Maa Skandamata Vrat Katha In Hindi (मां स्कंदमाता की व्रत कथा): नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा होती है। मान्यता है इनकी पूजा से बुध ग्रह मजबूत होता है। यहां देखें मां स्कंदमाता की व्रत कथा।

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Maa Skandamata Vrat Katha

Navratri 2024 5th Day, Maa Skandamata Vrat Katha In Hindi: नवरात्रि के पांचवें दिन की देवी हैं मां स्कंदमाता। कहते हैं इनकी पूजा से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। पौराणिक कथाओं अनुसार स्कंदमाता मां पार्वती का ही रौद्र रूप है। जिन लोगों को संतान प्राप्ति में बाधा आ रही है उनके लिए मां दुर्गा के इस स्वरूप की पूजा बेहद फलदायी साबित होती है। कहते हैं देवी दुर्गा के सभी रूपों में मां स्कंदमाता का स्वरूप सबसे सुंदर है जो मन मोह लेता है। यहां देखें मां स्कंदमाता की कथा।

मां स्कंदमाता की कथा (Maa Skandamata Vrat Katha In Hindi)

पौराणिक कथा के अनुसार तारकासुर नाम का एक राक्षस था जिसने भगवान ब्रह्मा जी को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या की थी। उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने उसे वरदान मांगने को कहा। तारकासुर ने ब्रह्मा जी से अमर होने का वरदान मां लिया। लेकिन ब्रह्मा जी ने तारकासुर को समझाया कि जिस किसी ने भी जन्म लिया है उसकी मृत्यु भी होगी यही प्रकृति का नियम है। इस पर तारकासुर ने भगवान शिवजी के पुत्र के हाथों मृत्यु का वरदान मांग लिया क्योंकि तारकासुर को लगता था कि शिव को सन्यासी है वो कभी विवाह नहीं करेंगे। ऐसे में उनका पुत्र भी नहीं होगा और उसकी मृत्यु भी नहीं होगी। ब्रह्मा जी ने तारकासुर को ये वरदान दे दिया।

वरदान मिल जाने के बाद तारकासुर ने अत्याचार करना शुरू कर दिया। सभी देवता राक्षस से परेशान होकर शिवजी के पास पहुंचे। फिर शिवजी ने माता पार्वती से विवाह किया। जिसके बाद भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय का जन्म हुआ। कार्तिकेय जी ने बड़ा होने पर राक्षस तारकासुर का वध किया। कार्तिकेय जी को स्कंद भी कहा जाता है। इसलिए भगवान स्कंद यानी कार्तिकेय की माता होने के कारण देवी दुर्गा को स्कंदमाता भी कहा जाने लगा।

लवीना शर्मा
लवीना शर्माauthor

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करियर की शुरुआत न्यूज 24 से हुई। इसके बाद तमाम चैनलों में काम किया। जहां स्क्रिप्ट राइटिंग, एडिटिंग और एंकरिंग का अनुभव हासिल हुआ। रफ्तार यहीं नहीं रूकी अब चाह थी कुछ नया करने की जिसके लिए मैंने डिजिटल मीडिया में स्विच किया और मैं जनसत्ता से जुड़ गई। जनसत्ता में मैंने अध्यात्म सेक्शन लीड किया। इसके बाद पत्रिका में सेवाएं दी और अब timesnowhindi.com से जु़ड़ी हूं। यहां भी मैं अध्यात्म सेक्शन में कार्यरत हूं। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और ज्योतिष शास्त्र में मेरा शुरू से ही लगाव रहा है। मेरी कोशिश रहती है कि मैं ऐसा कंटेट लिखूं जिससे बड़े बुजुर्ग ही नहीं बल्कि आज के युवा भी कनेक्ट कर सकें।

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