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Nag Panchami Vrat Katha: नाग पंचमी के व्रत में जरूर पढ़ें नाग देव की कहानी, ये कथा पढ़ सिद्ध हो जाएगा नाग पंचमी का पूजन

Nag Panchami Vrat Katha, Kahani (नाग पंचमी की कहानी): नाग पंचमी के त्योहार पर पूजन के साथ व्रत कथा पढ़ने का भी विधान है। आज नाग पंचमी पर पढ़ें नाग पंचमी व्रत कथा, नाग पंचमी की कथा क्या है, कहानी हिंदी में।

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Nag Panchami Vrat Katha, Kahani (नाग पंचमी की कहानी)

Nag Panchami Vrat Katha, नाग पंचमी व्रत कथा : नाग पंचमी सनातन परंपरा में नाग देवता को समर्पित विशेष पर्व माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु नाग देवता की पूजा करते हैं और उनसे परिवार की सुख-शांति तथा सुरक्षा की कामना करते हैं। आज 17 अगस्त को नाग पंचमी मनाई जा रही है, पंचांग के अनुसार पंचमी तिथि की शुरुआत 16 अगस्त की शाम 4:52 बजे हुई थी और इसका समापन 17 अगस्त की शाम 5:00 बजे होगा। नाग पंचमी के दिन पूजा के लिए सुबह 5:51 बजे से 8:29 बजे तक का समय शुभ बताया गया है। पूजन के साथ नाग पंचमी के दिन कथा का पाठ करने का भी महत्व है, यहां पढ़ें नाग पंचमी की कथा।

Nag Panchami Vrat Katha (नाग पंचमी की कहानी)

नाग पंचमी से जुड़ी कई लोक और पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। इनमें एक कथा बहन और नाग के बीच बने अनोखे भाई-बहन के रिश्ते की है।

कहा जाता है कि एक नगर में एक सेठ के सात बेटे थे और सभी विवाहित थे। सबसे छोटे बेटे की पत्नी बेहद सरल, दयालु और संस्कारी थी। एक दिन घर की बड़ी बहू ने सभी बहुओं से मिट्टी लाने के लिए साथ चलने को कहा।

सभी महिलाएं मिट्टी खोद रही थीं, तभी वहां एक सांप दिखाई दिया। बड़ी बहू उसे मारने के लिए आगे बढ़ी, लेकिन छोटी बहू ने उसे रोक दिया। उसने कहा कि सांप को नुकसान न पहुंचाया जाए। इसके बाद उसने सांप से कहा कि वह थोड़ी देर में वापस आएगी।

काम में व्यस्त होने के कारण वह अपना वादा भूल गई। अगले दिन उसे अपनी बात याद आई तो वह उसी जगह पहुंची। सांप को वहीं देखकर उसने उसे प्रणाम किया और भाई कहकर संबोधित किया।

सांप ने उसकी बात स्वीकार कर उसे बहन मान लिया। उसने कहा कि अब वह उसका भाई है और वह निडर होकर उससे अपनी इच्छा बता सकती है। छोटी बहू ने कहा कि उसका कोई सगा भाई नहीं है, इसलिए उसे भाई के रूप में पाकर वह खुश है।

कुछ समय बाद नाग मनुष्य का रूप लेकर उसके घर पहुंचा और खुद को छोटी बहू का भाई बताया। परिवार को पहले संदेह हुआ, लेकिन उसके समझाने के बाद उन्होंने उसे उसके साथ जाने की अनुमति दे दी।

रास्ते में नाग ने अपनी बहन को सच्चाई बता दी और कहा कि उसे डरने की जरूरत नहीं है। वह उसे अपने घर ले गया। वहां का वैभव देखकर छोटी बहू हैरान रह गई।

एक दिन नाग की माता ने उसे अपने भाई को ठंडा दूध देने के लिए कहा। गलती से छोटी बहू ने गर्म दूध दे दिया, जिससे नाग का मुंह जल गया। उसकी मां नाराज हुई, लेकिन नाग ने अपनी बहन की गलती को समझते हुए उसे माफ कर दिया।

जब छोटी बहू के वापस लौटने का समय आया तो नाग परिवार ने उसे सोना, चांदी, आभूषण और दूसरे कीमती सामान देकर विदा किया। घर पहुंचने पर उसकी जेठानी को इस धन को देखकर ईर्ष्या होने लगी। उसने छोटी बहू से और धन लाने की बात कही।

नाग भाई ने अपनी बहन की इच्छा पूरी की। बाद में उसने उसे एक बेहद सुंदर रत्नों का हार भी दिया। उस हार की चर्चा राजा की रानी तक पहुंची और रानी ने उसे अपने पास मंगवा लिया।

छोटी बहू ने अपने नाग भाई को याद किया और अपनी समस्या बताई। कथा के अनुसार, नाग ने ऐसा चमत्कार किया कि रानी के गले में हार सांप बन गया, जबकि छोटी बहू के पहनने पर वह फिर से रत्नों का हार बन गया।

राजा को जब पूरी बात पता चली तो उसने छोटी बहू को बुलाया। उसने हार पहनकर दिखाया और उसके गले में वह फिर आभूषण बन गया। राजा उसकी बात से संतुष्ट हुआ और उसे पुरस्कार दिया।

जब छोटी बहू के पति ने उसके धन को लेकर सवाल किया, तब नाग देवता फिर प्रकट हुए और उसकी बहन के चरित्र पर संदेह न करने की चेतावनी दी। कथा में इसी भाई-बहन के रिश्ते और नाग देवता के प्रति श्रद्धा को नाग पंचमी की परंपरा से जोड़ा जाता है।

नाग पंचमी की कहानी, Nag Panchami ki Kahani

नाग पंचमी से जुड़ी एक प्रसिद्ध पौराणिक कथा राजा परीक्षित के पुत्र जनमेजय से भी संबंधित है। माना जाता है कि राजा परीक्षित की मृत्यु तक्षक नाग के दंश से हुई थी। इसके बाद जनमेजय ने नागों से बदला लेने के लिए एक विशाल यज्ञ शुरू किया।

कथा के अनुसार, इस यज्ञ में बड़ी संख्या में नाग अग्नि में खिंचे चले आ रहे थे। तभी आस्तिक मुनि वहां पहुंचे और उन्होंने यज्ञ को रोक दिया। इस तरह नागों का विनाश रुक गया।

मान्यता है कि यह घटना श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि से जुड़ी है। इसी वजह से इस दिन नाग देवता की पूजा करने की परंपरा मानी जाती है। नाग पंचमी की कथाओं का मूल भाव केवल नागों की पूजा नहीं, बल्कि प्रकृति, जीव-जंतुओं के प्रति सम्मान, वचन निभाने और रिश्तों में विश्वास से भी जुड़ा माना जाता है।

Avni Bagrola
अवनी बागरोलाauthor

अवनी बागरोला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के लाइफस्टाइल सेक्शन में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। फैशन, ब्यूटी, ट्रेंड्स, पर्सनल स्टाइलिंग और मॉडर्न लाइफस्टाइल से जुड़े कंटेंट पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें जेन Z और स्टाइल-सेवी ऑडियंस के बीच खास पहचान दिलाती है। अवनी की लेखन शैली सरल, ट्रेंडी और यूज़र-फ्रेंडली है, जो पाठकों को तेजी से बदलते फैशन व लाइफस्टाइल ट्रेंड्स को समझने में मदद करती है। अब तक 3000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुकी अवनी क्रिएटिव अप्रोच, अपडेटेड नॉलेज और रियल-टाइम ट्रेंड सेंस के लिए जानी जाती हैं।

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