Mirror Direction according Vastu Shastra: वास्तु शास्त्र में शीशा (मिरर) को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यह ऊर्जा को प्रतिबिंबित करता है। सही जगह पर लगाया शीशा घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाता है, धन-समृद्धि लाता है। वहीं, गलत जगह पर लगाने से नकारात्मक ऊर्जा फैलती है, जिससे स्वास्थ्य समस्या, मानसिक तनाव, झगड़े और आर्थिक हानि हो सकती है। प्राचीन वास्तु ग्रंथों जैसे मानसार और वास्तु रत्नाकर में स्पष्ट निर्देश हैं कि शीशा दिशा, कमरे और स्थिति के अनुसार लगाना चाहिए। आइए जानते हैं कि घर में किन जगहों पर शीशा कभी नहीं लगाना चाहिए।
दक्षिण या पश्चिम दीवार पर
वास्तु के अनुसार दक्षिण और पश्चिम दिशा नकारात्मक ऊर्जा की दिशाएं हैं। इन दीवारों पर शीशा लगाने से घर में आने वाली सकारात्मक ऊर्जा बाहर निकल जाती है और नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। इससे परिवार में कलह, स्वास्थ्य समस्या और धन हानि होती है। विशेष रूप से दक्षिण-पश्चिम दिशा में शीशा लगाना पूरी तरह वर्जित है, क्योंकि यह पृथ्वी तत्व से जुड़ी दिशा है और शीशा जल तत्व का प्रतिनिधि है। इस कारण दोनों में टकराव होता है।
मुख्य द्वार के सामने
घर के मुख्य द्वार के ठीक सामने शीशा लगाना वास्तु में बड़ा दोष माना जाता है। इससे घर में प्रवेश करने वाली सकारात्मक ऊर्जा बाहर प्रतिबिंबित हो जाती है। परिणामस्वरूप परिवार में अवसरों की कमी, आर्थिक तंगी और मेहमानों का कम आना होता है। वास्तु विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि मुख्य दरवाजे पर चमकदार वस्तुएं या शीशा कभी न लगाएं, क्योंकि यह ऊर्जा को ब्लॉक करता है।
दो शीशे एक-दूसरे के आमने-सामने
दो शीशों को एक-दूसरे के सामने लगाना वास्तु में बहुत अशुभ है। इससे अनंत प्रतिबिंब बनते हैं, जो नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाते हैं और घर में भ्रम, तनाव तथा रिश्तों में दरार पैदा करते हैं। यह विशेष रूप से बेडरूम या हॉल में वर्जित है, क्योंकि इससे नींद प्रभावित होती है और परिवार में असंतोष बढ़ता है।
बेडरूम में बिस्तर के सामने या बगल में
बेडरूम में बिस्तर के ठीक सामने या बगल में शीशा लगाना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। वास्तु के अनुसार सोते समय शीशे में अपना प्रतिबिंब देखने से नींद की कमी, थकान, सिरदर्द और पति-पत्नी में झगड़े होते हैं। यदि अलमारी में शीशा हो तो रात में उसे ढककर रखें।
टूटे, धब्बेदार या पुराने शीशे का उपयोग
वास्तु के अनुसार टूटा, क्रैक वाला या धब्बेदार शीशा कभी नहीं लगाना चाहिए। यह नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है और परिवार में टूटन, हानि तथा स्वास्थ्य समस्या लाता है। हमेशा साफ, चमकदार और नए शीशे का उपयोग करें।
रसोई या अग्निकोण (दक्षिण-पूर्व) में
रसोई में शीशा लगाना वास्तु दोष पैदा करता है, क्योंकि रसोई अग्नि तत्व है और शीशा जल तत्व का प्रतीक है । इससे भोजन में समस्या, स्वास्थ्य हानि और परिवार में तनाव होता है।
यहां लगाएं शीशा
वास्तु में शीशा उत्तर या पूर्व दीवार पर लगाना सबसे शुभ माना जाता है, क्योंकि इससे सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। यदि घर में पहले से गलत जगह पर शीशा हो तो वास्तु विशेषज्ञ से सलाह लेकर दोष निवारण करें। सही वास्तु से घर में शांति और समृद्धि बनी रहती है।
डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी वास्तु शास्त्र पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।
