आज क्या है? क्या आज प्रदोष व्रत है? दिसंबर का अंतिम प्रदोष आज है क्या?
- Authored by: Mohit Tiwari
- Updated Dec 17, 2025, 09:21 AM IST
Pradosh Vrat December 2025: आज षौष माह के कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि है। इसके साथ ही प्रदोष काल में भी त्रयोदशी तिथि व्याप्त रहने वाली है। इस कारण आज दिसंबर का प्रदोष व्रत रखा जाएगा। इस कारण साल 2025 का अंतिम प्रदोष व्रत आज है। आइए जानते हैं आज प्रदोष व्रत के दिन शुभ मुहूर्त और पूजा विधि क्या है?
क्या आज प्रदोष व्रत है
Pradosh Vrat December 2025: आज 17 दिसंबर 2025 दिन बुधवार है। हिंदू पंचांग के अनुसार, आज पौष मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि है और यह साल का अंतिम प्रदोष व्रत का दिन है। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है, जो बुधवार को पड़ने से बहुत फलदायी माना जाता है। इस व्रत को करने से रोग, कष्ट, कर्ज और ग्रह दोषों से मुक्ति मिलती है। बुद्धि, व्यापार और संतान सुख के लिए यह अत्यंत शुभ है। साल का आखिरी प्रदोष होने से इसका महत्व और बढ़ गया है। अगर आप व्रत रख रहे हैं तो शाम को प्रदोष काल में पूजा जरूर करें। आइए जानते हैं आज के दिन का पूजन मुहूर्त क्या है?
आज का प्रदोष व्रत क्यों है इतना खास?
प्रदोष व्रत हर महीने त्रयोदशी पर रखा जाता है। आज का व्रत बुधवार को पड़ने से ‘बुध कृष्ण प्रदोष’ कहलाएगा। बुध ग्रह बुद्धि और व्यापार का कारक है, इसलिए इस व्रत से व्यापारियों, विद्यार्थियों और नौकरीपेशा लोगों को विशेष लाभ मिलेगा। पुराणों में माना जाता है कि प्रदोष काल में शिव-पार्वती का पूजन हर विपत्ति को दूर करता है। प्रदोष व्रत से आर्थिक समस्याएं, कर्ज और मानसिक तनाव दूर हो जाते हैं। संतान प्राप्ति की कामना करने वालों के लिए भी यह बहुत शुभ है। अब प्रदोष व्रत सीधे साल 2026 में पड़ेगा।
आज प्रदोष व्रत की तिथि और शुभ मुहूर्त
त्रयोदशी तिथि 16 दिसंबर रात 11:57 बजे शुरू होकर 18 दिसंबर रात 2:32 बजे तक रहेगी। प्रदोष काल 17 दिसंबर को पड़ रहा है, इसलिए व्रत आज ही रखा जाएगा। प्रदोष काल पूजा का मुख्य समय होगा, जो शाम 5:27 बजे से रात 8:11 बजे तक है। इस दौरान करीब 2 घंटे 44 मिनट का शुभ समय मिलेगा। शाम को इसी मुहूर्त में शिव पूजा करें तो फल कई गुना बढ़ जाता है।
प्रदोष व्रत पूजा विधि
सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें। दिन भर फलाहार करें। शाम को स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। पूजा स्थल पर चौकी बिछाएं और शिव-पार्वती, नंदी-गणेश की मूर्ति स्थापित करें। शिवलिंग पर पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल) से अभिषेक करें। बेलपत्र, धतूरा, भांग, फूल और अक्षत अर्पित करें। देसी घी का दीपक और धूप जलाएं। ‘ॐ नमः शिवाय’ या महामृत्युंजय मंत्र का 108 बार जप करें। शिव चालीसा और प्रदोष कथा पढ़ें। फल, मिठाई या हलवा-पूड़ी का भोग लगाएं। आरती करें और प्रसाद बांटें। रात में जागरण या भजन करें।
प्रदोष व्रत से मिलते हैं ये लाभ
प्रदोष व्रत रोग और कष्टों से मुक्ति दिलाता है। कर्ज और आर्थिक परेशानी दूर होती है। बुद्धि तेज होगी, व्यापार में लाभ होता है। संतान सुख और परिवार में खुशहाली आने के साथ ही ग्रह दोष शांत होंगे। साल का अंतिम व्रत होने से नए साल की शुरुआत शुभ होगी।