Karwa Chauth Aarti Lyrics: करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए खास महत्व रखता है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ निर्जला व्रत रखती हैं। सुबह सरगी खाने के बाद शुरू हुआ यह व्रत शाम को पूजा, करवा चौथ की कथा और चांद के दर्शन के साथ पूरा होता है। पूजा में आरती का भी विशेष महत्व है। कई घरों में गणेश जी, करवा माता, भगवान शिव-पार्वती और चंद्रमा की आरती की जाती है।
अगर आप भी इस करवा चौथ व्रत पर हैं, तो यहां पढ़ें गणेश जी की आरती, करवा माता की आरती, चंद्रमा की आरती और शिव-पार्वती की आरती के लिरिक्स।
करवा चौथ पर कौन सी आरती करनी चाहिए
करवा चौथ की पूजा में सबसे पहले भगवान गणेश का स्मरण किया जाता है। इसके बाद करवा माता और मां पार्वती सहित भगवान शिव की पूजा की जाती है। चंद्रमा निकलने पर उन्हें अर्घ्य दिया जाता है और कई परिवारों में चंद्रमा की आरती भी की जाती है।
हालांकि, आरती का क्रम हर परिवार में एक जैसा नहीं होता। आप अपने घर की परंपरा के अनुसार आरती कर सकती हैं।
करवा चौथ पर गणेश जी की आरती
करवा चौथ की पूजा शुरू करने से पहले गणेश जी की आरती करना शुभ माना जाता है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा जाता है। भक्त उनसे पूजा में आने वाली बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना करते हैं।
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
एकदंत दयावंत, चार भुजाधारी।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
पान चढ़े, फूल चढ़े और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
करवा चौथ पर करवा माता की आरती लिरिक्स (Karwa Mata ki Aarti Lyrics)
करवा चौथ पर करवा माता की आरती का विशेष महत्व है। महिलाएं आरती के दौरान माता से अपने पति की लंबी उम्र, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं। पूजा के समय दीपक जलाकर श्रद्धा से करवा माता की आरती गा सकती हैं।
ॐ जय करवा मैया, माता जय करवा मैया।
जो व्रत करे तुम्हारा, पार करो नइया॥
ॐ जय करवा मैया॥
सब जग की हो माता, तुम हो रुद्राणी।
यश तुम्हारा गावत, जग के सब प्राणी॥
ॐ जय करवा मैया॥
कार्तिक कृष्ण चतुर्थी, जो नारी व्रत करती।
दीर्घायु पति होवे, दुख सारे हरती॥
ॐ जय करवा मैया॥
होए सुहागिन नारी, सुख संपत्ति पावे।
गणपति जी बड़े दयालु, विघ्न सभी नाशे॥
ॐ जय करवा मैया॥
करवा मैया की आरती, व्रत कर जो गावे।
हित-सुख-संपत्ति पावे, मनवांछित फल पावे॥
ॐ जय करवा मैया॥
करवा चौथ की चंद्र देव की आरती (Karwa Chauth Chandra Dev aarti lyrics)
ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा ।
दुःख हरता सुख करता, जय आनन्दकारी ।
रजत सिंहासन राजत, ज्योति तेरी न्यारी ।
दीन दयाल दयानिधि, भव बन्धन हारी ।
जो कोई आरती तेरी, प्रेम सहित गावे ।
सकल मनोरथ दायक, निर्गुण सुखराशि ।
योगीजन हृदय में, तेरा ध्यान धरें ।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, सन्त करें सेवा ।
वेद पुराण बखानत, भय पातक हारी ।
प्रेमभाव से पूजें, सब जग के नारी ।
शरणागत प्रतिपालक, भक्तन हितकारी ।
धन सम्पत्ति और वैभव, सहजे सो पावे ।
विश्व चराचर पालक, ईश्वर अविनाशी ।
सब जग के नर नारी, पूजा पाठ करें ।
ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा ।
भगवान शिव की आरती के लिरिक्स
करवा चौथ पर मां पार्वती के साथ भगवान शिव की पूजा भी की जाती है। शिव-पार्वती को वैवाहिक सुख, प्रेम और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। उनकी आरती के दौरान महिलाएं अपने दांपत्य जीवन में सुख-शांति और प्रेम बनाए रखने की प्रार्थना करती हैं।
ॐ जय शिव ओंकारा आरती
कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।
सदा वसन्तं हृदयाविन्दे भवत् भवानी सहितं नमामि॥
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥
(ॐ जय शिव ओंकारा...)
एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे।
हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे॥
(ॐ जय शिव ओंकारा...)
दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखत त्रिभुवन जन मोहे॥
(ॐ जय शिव ओंकारा...)
अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी।
चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी॥
(ॐ जय शिव ओंकारा...)
श्वेतांबर पीतांबर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक ब्रह्मादिक भूतादिक संगे॥
(ॐ जय शिव ओंकारा...)
कर के बीच कुंडल पद बीच कमरा।
भक्तजन को संकट क्षण में दूर करै॥
(ॐ जय शिव ओंकारा...)
डमरू माँ त्रिशूल धरता जगकर्ता।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका॥
(ॐ जय शिव ओंकारा...)
त्रिगुण शिवजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे॥
(ॐ जय शिव ओंकारा...)
ॐ जय शिव ओंकारा॥
मां पार्वती की आरती के लिरिक्स
करवा चौथ पर मां पार्वती की पूजा का भी विशेष महत्व है। उन्हें अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य जीवन की कामना से पूजा जाता है। कई घरों में मां पार्वती की आरती के साथ पूजा संपन्न की जाती है।
जय पार्वती माता, जय पार्वती माता।
ब्रह्म सनातन देवी, शुभ फल की दाता।
॥ जय पार्वती माता... ॥
अरिकुल पद्म विनाशिनि, जय सेवक त्राता।
जग जीवन जगदंबा, हरिहर गुण गाता।
॥ जय पार्वती माता... ॥
सिंह को वाहन साजे, कुण्डल हैं साथा।
देव वधू जस गावत, नृत्य करत ताथा।
॥ जय पार्वती माता... ॥
सतयुग रूपशील अतिसुन्दर, नाम सती कहलाता।
हेमांचल घर जन्मी, सखियन संग राता।
॥ जय पार्वती माता... ॥
शुम्भ-निशुम्भ विदारे, हेमांचल स्थाता।
सहस्र भुजा तनु धरि के, चक्र लियो हाथा।
॥ जय पार्वती माता... ॥
"सृष्टि रूप तुम धारण करके, सब जग को उबजातीं।
मनसा रूप ध्यावत, मनवांछित फल पातीं॥"
॥ जय पार्वती माता... ॥
देवन अरज करत हम, चित ध्यान लाता।
तेरी कृपा रहे तो, मन नहिं भलमाता।
॥ जय पार्वती माता... ॥
मैया जी की आरती, भक्ति भाव से जो नर गाता।
नित्य सुखी रह करके, धन संपति पाता।
॥ जय पार्वती माता... ॥
करवा चौथ की पूजा में आरती कब करें
करवा चौथ पर शाम को शुभ समय में पूजा करें और व्रत कथा सुनें या पढ़ें। इसके बाद गणेश जी, करवा माता और शिव-पार्वती की आरती परिवार की परंपरा के अनुसार की जा सकती है। चंद्रमा निकलने पर अर्घ्य देकर चंद्र देव का स्मरण करें। फिर अपने रीति-रिवाज के अनुसार व्रत खोलें।
पूजा के दौरान आरती की थाली में दीपक, फूल और अन्य पूजा सामग्री रख सकती हैं।
