कल क्या है 30 जनवरी 2026 को, कल कौन सा व्रत है, कल प्रदोष व्रत रखा जाएगा या वैभव लक्ष्मी का
- Authored by: मेधा चावला
- Updated Jan 29, 2026, 10:53 AM IST
Kal kya hai 30 Jaunary 2026 Ko (कल कौन सा व्रत है): 30 जनवरी 2026 को शुक्रवार का दिन है। इस दिन मां लक्ष्मी की भी पूजा होती है। हालांकि इस दिन को भगवान शिव के पूजन के लिए भी शुभ माना जा रहा है। यहां जानें कि कल क्या है, कल कौन सा व्रत रखा जाएगा। कल प्रदोष व्रत रहेगा या वैभव लक्ष्मी का व्रत होगा।
कल 30 जनवरी 2026 को क्या प्रदोष व्रत रहेगा
Kal kya hai 30 Jaunary 2026 Ko (कल कौन सा व्रत है): कैंलेंडर के अनुसार, 30 जनवरी 2026 को शुक्रवार है। पंचांग के अनुसार, 30 जनवरी शुक्रवार को शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि सुबह 11 बजकर 9 मिनट बजे तक रहेगी, उसके बाद त्रयोदशी तिथि शुरू होगी। इस तरह कल शुक्र प्रदोष व्रत रखा जा रहा है जो कि भगवान शिव को समर्पित है।
कल 30 जनवरी 2026 को रहेगा प्रदोष व्रत
दृक पंचांग के अनुसार, 30 जनवरी शुक्रवार को शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि सुबह 11:09 बजे तक रहेगी। इसके बाद माघ शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि शुरू होगी। यह तिथि प्रदोष व्रत के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। इस तरह 30 जनवरी को माघ माह का अंतिम प्रदोष व्रत पड़ रहा है। यह व्रत विशेष रूप से भगवान शिव को समर्पित है और शुक्रवार को होने के कारण इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाता है।
कल 30 जनवरी 2026 का पंचांग
सनातन धर्म में पंचांग का विशेष महत्व है, क्योंकि यह शुभ-अशुभ मुहूर्त, व्रत और पूजा के लिए मार्गदर्शन करता है। शुभ-अशुभ समय का विचार कर किया गया कोई भी काम फलित होता है और बाधाएं नहीं आती हैं। शुभ समय की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:25 बजे से 6:18 बजे तक, अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:13 बजे से 12:56 बजे तक और अमृत काल शाम 6:18 बजे से 7:46 मिनट तक रहेगा।
वहीं, योग वैधृति शुक्रवार शाम 4:58 बजे तक रहेगा। सूर्योदय 7:10 बजे पर और सूर्यास्त शाम 5:59 बजे पर होगा। यदि कोई शुभ कार्य जैसे विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश या नया कार्य करना चाहते हैं, तो राहुकाल का विशेष ध्यान रखें। 30 जनवरी को राहुकाल सुबह 11: 14 बजे से दोपहर 12:35 बजे तक रहेगा। इस दौरान कोई नया कार्य शुरू न करें।
शुक्र प्रदोष व्रत का क्या महत्व होता है
शुक्र प्रदोष व्रत का महत्व बहुत अधिक है। यह व्रत देवाधिदेव महादेव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त करने के लिए किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि प्रदोष काल में शिवलिंग पर दूध, बेलपत्र, धतूरा और भांग चढ़ाकर पाठ करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। व्रत रखने वाले भक्त संयमपूर्वक दिन व्यतीत करते हैं और शाम को प्रदोष काल में पूजा-अर्चना करते हैं। शुक्रवार होने से यह व्रत शुक्र ग्रह के दोषों को दूर करने और वैवाहिक सुख, धन-समृद्धि के लिए भी विशेष फलदायी माना जाता है।
30 जनवरी 2026 को चंद्रमा का गोचर
शुक्रवार को चंद्रमा मिथुन राशि में गोचर करेंगे और नक्षत्र आर्द्रा रहेगा, जो 31 जनवरी की सुबह 3:27 बजे तक प्रभावी रहेगा।
शुक्रवार को करें लक्ष्मी पूजन
शुक्रवार को लक्ष्मी जी का प्रिय दिवस माना जाता है। इसलिए विष्णुप्रिया के पूजन के लिए भी शुक्रवार खास महत्व रखता है। इस दिन वैभव लक्ष्मी का व्रत रखकर शाम को मां कमला की पूजा की जाती है। साथ ही सुख और स्वास्थ्य का वरदान मांगा जाता है।