अध्यात्म

कल का पंचांग 07-07-2026: तिथि, नक्षत्र, योग चौघड़िया, और मुहूर्त की सम्पूर्ण जानकारी

कल का पंचांग 07-07-2026 में विशेष योग, तिथि और करण के आधार पर किन कार्यों को करना शुभ होगा, इस पर फोकस किया गया है। पूजा-पाठ, स्नान होम, दान आदि के लिए पंचांग के अनुसार कार्य करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति सुलभ ही हो जाती है. ऐसा सनातन में कहा गया है

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kal ka panchang 7 july

कल का पंचांग (kal ka Panchang in Hindi)

कल का दिन हिन्दू पंचांग के अनुसार विशेष धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व रखता है। कल कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि है, जो 13:27:31 तक प्रभावी रहेगी। नक्षत्र उत्तराभाद्रपद है जो 16:25:02 तक रहेगा। करण क्रमशः बव 13:27:31 तक, बालव रहेगा। कल का योग शोभन है, जो 14:30:20 तक प्रभावी रहेगा। कल का दिन मंगलवार है।

कल सूर्य और चंद्र से जुड़ी गणनाएँ

कल का सूर्योदय प्रातः 05:28:57 पर और सूर्यास्त संध्या 19:22:40 पर होगा। कल का चंद्रमा मीन राशि में है और 11:58:00 तक वहीं रहेगा। चन्द्रोदय का समय 23:47:00 पर और चंद्रास्त 11:58:00 (अगले दिन भोर में) होगा। वर्तमान ऋतु वर्षा है।

हिंदू मास एवं संवत्सर

कल शक संवत 1948 पराभव, विक्रम संवत 2083, तथा काली संवत 5127 चल रहा है। प्रविष्टे / गत्ते है। पूर्णिमांत आषाढ मास और अमांत ज्येष्ठ मास है। दिन काल 13:53:43 का है।

हिंदू मास एवं संवत्सर

कल दुष्टमुहूर्त , राहुकाल 15:54:14 से 17:38:27 तक, यमगण्ड 10:06:51 से 11:02:26 तक, तथा गुलिक काल 10:06:51 से 11:02:26 तक के बीच रहेगा।

कल का शुभ मुहूर्त

कल का अभिजीत मुहूर्त 11:58:01 से 12:53:35 तक रहेगा।

दिशा शूल कल उत्तर दिशा में है, यात्रा से बचें।

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कल का चंद्रबल और ताराबल

कल वृषभ, मिथुन, कन्या, तुला, मकर, मीन राशि वालों को चंद्रबल प्राप्त है। अश्विनी, कृत्तिका, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा, मूल, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद, रेवती सहित 20+ नक्षत्रों को ताराबल प्राप्त है।

आपका दिन मंगलमय हो!

नक्षत्र:

अश्विनी, भरणी, कृत्तिका, रोहिणी, मृगशीर्ष, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, मघा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, शततारका, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद, रेवती। ये 27 नक्षत्र हैं और इसी क्रम में आते हैं। अर्थात चंद्रमा एक नक्षत्र से दूसरे नक्षत्र में एक ही क्रम में भ्रमण करता है। चंद्रमा जिस नक्षत्र में होता है वही उस दिन का नक्षत्र होता है।

वार:

सोमवार, मंगलवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार, शनिवार, रविवार

योग:

विष्कुम्भा, प्रीति, आयुष्मान, सौभाग्य, शोभन, अतिगण्ड, सुकर्मा, धृति, शूल, गण्ड, वृद्धि, ध्रुव, व्यागत, हर्षण, वज्र, सिद्धि, व्यतिपात, वारियान, परिघ, शिव, सिद्ध, साध्य, शुक्ल, ब्रह्मा, इन्द्र, वैधता

करण:

किंस्तुघन, भाव, बल्व, कौलव, तैतुल, गरज, वणिज, विष्टि (भद्रा), शकुनि, चतुष्पाद, नागव।

पक्ष:

कृष्ण पक्ष: जैसे-जैसे चंद्रमा का आकार छोटा होता जाता है, यह पक्ष पूर्णिमा से अमावस्या में बदल जाता है

शुक्ल पक्ष: चंद्रमा का आकार बढ़ता है। यह दल अमावस्या से पूर्णिमा तक परिवर्तित हो जाता है

महीने:

चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद, आश्विन, कार्तिक, मार्गशीर्ष, पौष, माघ, फाल्गुन।
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