अध्यात्म

बेहद रहस्यमयी है जम्मू का 'आप शंभू मंदिर', महाराणा प्रताप सिंह भी इसके चमत्कार को देखकर रह गए थे दंग, यहां महाशिवरात्रि पर उमड़ती है भक्तों की भारी भीड़

Jammu Aap Shambhu Temple: जम्मू-कश्मीर में महाशिवरात्रि का त्योहार बड़े उत्साह और आनंद के साथ मनाया गया। जम्मू में सदियों से स्थापित ऐतिहासिक और प्रसिद्ध 'आप शंभू मंदिर' में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थी। जम्मू का ये मंदिर बेहद रहस्यमयी माना जाता है। इस मंदिर के तार महाराणा प्रताप सिंह से भी जुड़े हैं।

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Jammu Aap Shambhu Temple

Jammu Aap Shambhu Temple: महाशिवरात्रि परआईएएनएस से बात करते हुए जम्मू के आप शंभू मंदिर में आए श्रद्धालुओं ने अपनी खुशी जाहिर की। मंदिर में भोलेनाथ के दर्शन के लिए पहुंचे विक्रम ने कहा कि यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु आ रहे हैं। हम प्रार्थना करते हैं कि देश में सुख शांति और सद्भाव बना रहा। सुशील कुमार ने कहा कि हमें भोले शंकर की सेवा करते हुए 15 साल हो गए। यहां हम भंडारा लगाते हैं। महाशिवरात्रि को हम बड़े धूमधाम से मनाते हैं। वहीं, मंदिर के पुजारी ने भी इस प्राचीन 'आप शंभू मंदिर' के इतिहास को साझा किया और इसकी सदियों पुरानी महत्ता पर जोर दिया। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे मंदिर में दर्शन के लिए आते समय शांति, सौहार्द और भाईचारे को बनाए रखें।

आप शंभू मंदिर का इतिहास

मंदिर के पुजारी ने आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा कि ये बियाबान जंगल था, तब महाराणा प्रताप यहां आते थे। नीचे गांव में गुर्जर लोग रहते थे। वो अपनी गाय और भैंस को चरने के लिए जंगलों में छोड़ देते थे। उनमें से भूरे रंग भैंस यहां आकर खड़ी हो जाती थी और उसका दूध निकलना शुरू हो जाता था। भैंस घर में दूध नहीं देती थी। तब भैंस के मालिक को लगा कि कोई भैंस का दूध निकाल लेता है। इसके बाद उसने उसका पीछा करना शुरू किया। भैंस वहां पहुंची और खड़ी हो गई, तभी उसका दूध निकलना शुरू हो गया। उसने पास जाकर देखा, तो एक पत्थर पर दूध गिर रहा था और वहीं खत्म हो रहा था। उसे लगा कि ये भूत हो सकता है क्योंकि दूध पत्थर पर गिरने के बाद साइड में चला जाता है, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा था। इसके बाद उसने भैंस को पीछा किया और उस पत्थर को एक पत्थर से तोड़ने लगा। जब कोई असर नहीं हुआ तो उसने कुल्हाड़ी से पत्थर पर प्रहार किया। इसके बाद उसमें से खून निकलना शुरू हो गया। उसने घर पहुंचकर बताया कि इस तरह की घटना घटी है।

उन्होंने कहा कि जब यह बात महाराणा प्रताप सिंह तक पहुंची कि कोई असाधारण घटना घटी है और भगवान प्रकट हुए हैं, तो उन्होंने खुद उस स्थान पर जाकर देखने का फैसला किया। मौके पर पहुंचकर उन्होंने देखा और कहा कि यह तो भगवान शंकर का रूप है। उस समय यह क्षेत्र घने जंगलों से घिरा हुआ था। उन्हें लगा कि जंगल में भगवान की पूजा कौन करने आएगा। इसलिए इस शिवलिंग उन्होंने दूसरी जगह स्थानांतरित करने की कोशिश की। इसके लिए खुदाई कराई गई, लेकिन शिवलिंग का न तो आधार मिला और न ही अंत। इसे एक चमत्कार माना गया। इसके बाद उन्होंने उसी स्थान पर मंदिर का निर्माण करवाया।

Laveena Sharma
लवीना शर्माauthor

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करियर की शुरुआत न्यूज 24 से हुई। इसके बाद तमाम चैनलों में काम किया। जहां स्क्रिप्ट राइटिंग, एडिटिंग और एंकरिंग का अनुभव हासिल हुआ। रफ्तार यहीं नहीं रूकी अब चाह थी कुछ नया करने की जिसके लिए मैंने डिजिटल मीडिया में स्विच किया और मैं जनसत्ता से जुड़ गई। जनसत्ता में मैंने अध्यात्म सेक्शन लीड किया। इसके बाद पत्रिका में सेवाएं दी और अब timesnowhindi.com से जु़ड़ी हूं। यहां भी मैं अध्यात्म सेक्शन में कार्यरत हूं। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और ज्योतिष शास्त्र में मेरा शुरू से ही लगाव रहा है। मेरी कोशिश रहती है कि मैं ऐसा कंटेट लिखूं जिससे बड़े बुजुर्ग ही नहीं बल्कि आज के युवा भी कनेक्ट कर सकें।

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