Chandra Grahan Ka Duniya Par Kya Asar hoga: बीती 17 फरवरी को साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण लगा था और इसके कुछ दिन बाद ही इजरायल, ईरान, अमेरिका और मिडिल ईस्ट के कई देशों में जंग छिड़ गई है। ईरान के सुप्रीम लीडर खामनेई की मौत के बाद अब मध्य पूर्व में इजरायल, ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता सैन्य तनाव अब कई अन्य देशों की भागीदारी के कारण व्यापक रूप ले चुका है। रूस और यूक्रेन का युद्ध पहले से ही चल रहा है, वहीं यूरोप के कुछ देश और खाड़ी क्षेत्र भी प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से इस संघर्ष से जुड़े हुए हैं। ऐसे संवेदनशील समय में 3 मार्च को लगने वाला चंद्रग्रहण वैश्विक ऊर्जा को और अस्थिर बना सकता है।
माना जाता है कि चंद्रग्रहण और सूर्यग्रहण का असर पूरे विश्व पर पड़ता है। इसके साथ ही वैश्विक घटनाओं, राजनीति, अर्थव्यवस्था आदि क्षेत्रों में ग्रहण लगने के 6 महीनों तक असर रहता है। ऐसे में आइए प्रसिद्ध एस्ट्रोलाजर नीति शर्मा से जानते हैं कि इस चंद्रग्रहण का असर ग्लोबली कैसा रहने वाला है?
आने वाले 15 दिन रहेंगे विशेष संवेदनशील
एस्ट्रोलाजर नीति शर्मा के अनुसार चंद्रग्रहण केवल एक खगोलीय घटना नहीं है, बल्कि यह सामूहिक मानसिकता और सत्ता के निर्णयों पर गहरा प्रभाव डालता है। चंद्रमा मन, भावनाओं और जनसमूह का कारक है। जब चंद्रमा पर ग्रहण लगता है तो लोगों की सोच में अस्थिरता, भय, आक्रोश और आवेग बढ़ सकता है।
युद्ध की स्थिति में यह प्रभाव और गंभीर हो जाता है। राष्ट्र प्रमुख, सैन्य अधिकारी और राजनीतिक नेतृत्व भी सामूहिक मानसिक दबाव से प्रभावित होते हैं। ऐसे समय में त्वरित और आक्रामक फैसले लिए जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि 3 मार्च के ग्रहण के बाद के 15 दिन विशेष रूप से संवेदनशील रहेंगे। इस अवधि में मिसाइल हमले, सीमाई झड़पें या अचानक सैन्य कार्रवाई की संभावना बढ़ सकती है।
राहु-मंगल योग से बढ़ेगा संघर्ष
इस समय राहु और मंगल का प्रभाव अत्यंत महत्वपूर्ण है। मंगल सेना, अग्नि, युद्ध और आक्रामकता का कारक है, जबकि राहु विस्फोट, भ्रम, अचानक घटनाओं और रणनीतिक छल का प्रतीक है। नीति शर्मा के अनुसार 23 फरवरी से सक्रिय यह योग 2 अप्रैल तक प्रभावी रहेगा। यह योग युद्ध को सीमित रखने के बजाय विस्तार देने की प्रवृत्ति रखता है। इजरायल और ईरान के बीच प्रत्यक्ष टकराव और अमेरिका की भागीदारी इस योग के अनुरूप दिखाई देती है। इसके साथ ही रूस और यूक्रेन के युद्ध में भी अचानक तेज गतिविधि देखी जा सकती है। यह समय सत्ता संघर्ष को और तेज कर सकता है, क्योंकि चंद्रमा सिंह राशि में स्थित है जो सत्ता, नेतृत्व और प्रतिष्ठा का संकेत देती है।
क्या न्यूक्लियर खतरा बढ़ेगा?
एस्ट्रोलाजर नीति शर्मा के अनुसार पूर्ण परमाणु युद्ध की स्पष्ट स्थिति नहीं बनती दिख रही, लेकिन न्यूक्लियर फैसिलिटी से जुड़ी घटनाओं को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। मार्च और अप्रैल के बीच किसी परमाणु संयंत्र के आसपास तकनीकी समस्या, साइबर अटैक या सीमित स्तर पर रेडिएशन लीकेज की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। हालांकि हिरोशिमा और नागासाकी जैसी सीधी परमाणु बमबारी की संभावना कम मानी गई है, फिर भी वैश्विक भय और रणनीतिक दबाव में वृद्धि हो सकती है।
अभी चलेगा रूस-यूक्रेन युद्ध
रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा संघर्ष अभी थमता नहीं दिखता है। उन्होंने बताया कि 2 अप्रैल तक शांति की उम्मीद कम है। जून के बाद दो से तीन महीने का राहत काल आ सकता है। सितंबर और अक्टूबर में फिर से आक्रामकता बढ़ सकती है। इसका अर्थ है कि वर्ष का मध्य थोड़ी राहत दे सकता है, लेकिन अंतिम चरण फिर से तनावपूर्ण हो सकता है।
भारत पर क्या है इसका संभावित प्रभाव
भारत की स्वतंत्रता कुंडली का विश्लेषण करते हुए एस्ट्रोलाजर नीति शर्मा ने बताया कि वर्तमान में मंगल और राहु का प्रभाव भारत के लिए सीमाई गतिविधियों को बढ़ा सकता है। पूर्वी सीमा, विशेषकर बांग्लादेश की दिशा में गतिविधियां बढ़ सकती हैं। आसाम और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में राजनीतिक तनाव और जनआक्रोश की स्थिति बन सकती है। हालांकि वे स्पष्ट करती हैं कि भारत पूर्ण युद्ध में शामिल नहीं होगा। भारत की स्थिति अन्य देशों की तुलना में अधिक संतुलित रहेगी और कूटनीतिक स्तर पर भारत मजबूत भूमिका निभा सकता है।
अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार पर प्रभाव
ग्रहण और युद्ध की संयुक्त स्थिति का प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। इस दौरान शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव रहेगा। सोना और धातु क्षेत्र मजबूत हो सकते हैं। तेल की कीमतों में वृद्धि संभव है, जिससे महंगाई बढ़ेगी। अनाज और आवश्यक वस्तुओं के दाम बढ़ सकते हैं। बैंकिंग और वित्तीय सेक्टर में भी बदलाव देखने को मिल सकते हैं। 1 जून के बाद गुरु का गोचर भारत के लिए सकारात्मक रह सकता है। इस समय भारत की अंतरराष्ट्रीय स्थिति और मजबूत हो सकती है।
ग्रहण का सबसे अधिक पड़ेगा मन पर असर
एस्ट्रोलाजर नीति शर्मा के अनुसार चंद्रग्रहण के समय लोगों में घबराहट, भ्रम और नकारात्मक सोच बढ़ सकती है। युद्ध की खबरें मानसिक दबाव को और बढ़ा देंगी, क्योंकि चंद्रमा मन के कारक हैं। यह समय धैर्य और संतुलन का है। सामूहिक प्रार्थना और सकारात्मक ऊर्जा से नकारात्मक प्रभाव को कम किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि प्रकृति परिवर्तन के दौर से गुजरती है, और यह समय भी एक बड़े वैश्विक ट्रांसफॉर्मेशन का संकेत दे सकता है।
कर सकते हैं ये उपाय
एस्ट्रोलाजर नीति शर्मा के अनुसार ग्रहण और युद्धकालीन तनाव से बचाव के लिए कुछ उपाय किए जा सकते हैं। इस दौरान भगवान शिव का अभिषेक कच्चे दूध, जल और काले तिल से करें। चंदन और केसर का तिलक अनाहत चक्र, नाभि, कंठ और शिखा पर लगाएं। हाइड्रेटेड रहें और इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखें। नियमित रूप से मेडिटेशन, योग और प्राणायाम करें। विश्व शांति के लिए प्रार्थना करें। वाणी और क्रोध पर नियंत्रण रखें।
डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।
