अध्यात्म

Guru Purnima 2023: गुरु पूर्णिमा क्यों मनाते हैं, जानिए क्या है इसका इतिहास

  • Authored by: लवीना शर्मा
  • Updated Jul 3, 2023, 08:13 AM IST

Guru Purnima 2023 Importance: आषाढ़ महीने की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। इस दिन गुरुओं की पूजा का विधान है। जानिए गुरु पूर्णिमा की पूजा विधि और महत्व।

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Guru Purnima 2023: गुरु पूर्णिमा कब है?

Guru Purnima 2023 Importance: आषाढ़ महीने की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। इस दिन गुरुओं की पूजा का विधान है। मान्यता है गुरु पूर्णिमा के दिन ही वेदव्यास जी का जन्म हुआ था। इसी वजह से इसे व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं। हिंदू धर्म में वेदव्यास जी को प्रथम गुरु का दर्जा दिया गया है। कहते हैं सबसे पहले मनुष्य को वेदों की शिक्षा व्यास जी ने ही दी थी। महर्षि वेदव्यास जी ने श्रीमद्भागवत, ब्रह्मसूत्र, महाभारत, मीमांसा के अलावा 18 पुराणों की रचना की है। जानिए गुरु पूर्णिमा 2023 कब है, इसकी पूजा विधि और महत्व क्या है।

गुरु पूर्णिमा तिथि और मुहूर्त (Guru Purnima 2023 Date And Time)

हिन्दू वर्ष के चौथे महीने आषाढ़ की पूर्णिमा तिथि को गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है। इस साल गुरु पूर्णिमा का पर्व 3 जुलाई सोमवार के दिन मनाया जाएगा। पंचांग अनुसार गुरु पूर्णिमा तिथि 2 जुलाई की रात 8 बजकर 21 मिनट से शुरू होकर 3 जुलाई की शाम 5 बजकर 8 मिनट तक रहेगी।

गुरु पूर्णिमा पूजा विधि (Guru Purnima Puja Vidhi)

गुरु पूर्णिमा के दिन सुबह जल्दी उठें और घर की साफ-सफाई करके स्नान कर लें। इसके बाद पूजा का संकल्प लें और साफ स्थान पर सफेद वस्त्र बिछाकर व्यास पीठ बनाएं। इसके बाद गुरु व्यास की प्रतिमा उस पर स्थापित करके रोली, चंदन, फूल, फल से उनकी पूजा करें और उन्हें प्रसाद अर्पित करें। पूजा के समय ‘गुरुपरंपरासिद्धयर्थं व्यासपूजां करिष्ये’ मंत्र का जाप भी जरूर करें।

गुरु पूर्णिमा पर गुरुओं की ऐसे करें पूजा

गुरु पूर्णिमा के दिन अपने गुरु को व्यास जी का अंश मानकर पूजना चाहिए। इस दिन अपने गुरु की यथा संभव सेवा करनी चाहिए। उन्हें कुछ न कुछ उपहार जरूर दें। उनके प्रति सम्मान दिखाएं। गुरु से मंत्र प्राप्त करने के लिए भी ये दिन श्रेष्ठ माना जाता है।

लवीना शर्मा
लवीना शर्माauthor

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करियर की शुरुआत न्यूज 24 से हुई। इसके बाद तमाम चैनलों में काम किया। जहां स्क्रिप्ट राइटिंग, एडिटिंग और एंकरिंग का अनुभव हासिल हुआ। रफ्तार यहीं नहीं रूकी अब चाह थी कुछ नया करने की जिसके लिए मैंने डिजिटल मीडिया में स्विच किया और मैं जनसत्ता से जुड़ गई। जनसत्ता में मैंने अध्यात्म सेक्शन लीड किया। इसके बाद पत्रिका में सेवाएं दी और अब timesnowhindi.com से जु़ड़ी हूं। यहां भी मैं अध्यात्म सेक्शन में कार्यरत हूं। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और ज्योतिष शास्त्र में मेरा शुरू से ही लगाव रहा है। मेरी कोशिश रहती है कि मैं ऐसा कंटेट लिखूं जिससे बड़े बुजुर्ग ही नहीं बल्कि आज के युवा भी कनेक्ट कर सकें।

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