Guru Pradosh Vrat 2025 Date, Muhurat And Puja Vidhi: हिंदू धर्म में वैसे तो हर दिन का अपना महत्व है, लेकिन प्रदोष व्रत की खास महत्ता है। प्रदोष व्रत पर शिवलिंग का अभिषेक करने से भक्तों के रुके हुए कार्य पूरे हो जाते हैं और घर में सुख शांति बनी रहती है। इस दिन महादेव के संग मां पार्वती की पूजा-अर्चना करना शुभ माना जाता है। अगर आप प्रदोष व्रत रखने या पूजा करने की सोच रहे हैं तो आप यहां से गुरु प्रदोष व्रत की तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि जान सकते हैं।
प्रदोष व्रत की तिथि -
पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 2 मार्च की रात 1 बजकर 43 मिनट पर शुरू हो रही है और इस तिथि का समापन अगले दिन 27 मार्च की रात 11 बजकर 13 मिनट पर हो जाएगा। प्रदोष व्रत की पूजा प्रदोष काल में की जाती है इसीलिए प्रदोष व्रत 27 मार्च, गुरुवार के दिन रखा जाएगा।
प्रदोष व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त-
प्रदोष व्रत की पूजा प्रदोष काल में की जाती है। वहीं, 27 मार्च को प्रदोष काल का मुहूर्त शाम 6 बजकर 36 मिनट पर शुरू होकर 8 बजकर 56 मिनट तक रहेगा। इस समय के बीच ही आप पूजा करें।
प्रदोष व्रत पूजा विधि-
प्रदोष व्रत की पूजा करने के लिए सुबह उठकर स्नान कर भगवान शिव का ध्यान लगाकर प्रदोष व्रत का प्रण लिया जाता है।
इसके बाद सुबह शिव जी के मंदिर जाते हैं और फिर सीधा शाम के समय भगवान शिव के मंदिर भगवान शिव की पूजा होती है।
प्रदोष व्रत पर शिवलिंग का अभिषेक करने का विधान है। शिवलिंग का अभिषेक करने के बाद लाल चंदन का लेप करना चाहिए। भगवान शिव के समझ दीपक प्रज्वलित कर आरती करें।
इसके बाद बेलपत्र, फल, फूल, चंदन और रोली भगवान शिव के समक्ष अर्पित करते हैं।
फिर पूजा संपन्न होने के बाद शिव चालीसा का पाठ किया जाता है और शिव मंत्रों का जाप होता है। अंत में शिव जी की आरती की जाती है।
