अध्यात्म

Ganesh Ji Ki Kahani: नाग पंचमी के दिन जरूर पढ़ें गणेश जी की ये कहानी

Ganesh Ji Ki Kahani: गणेश जी की कहानी हर व्रत-त्योहार में पढ़ी जाती है। कहते हैं इस कहानी को पढ़ने से पूजा का संपूर्ण फल प्राप्त हो जाता है। यहां पढ़ें गणेश जी की कहानी।

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Ganesh Ji Ki Kahani In Hindi

Ganesh Ji Ki Kahani In Hindi (गणेश जी की कथा): नाग पंचमी त्योहार वाले दिन नाग देवता की विधि विधान पूजा करने के बाद गणेश जी की कहानी जरूर सुनें। मान्यता अनुसार गणेश जी की कहानी सुनने या पढ़ने से व्यक्ति को पूजा का संपूर्ण फल प्राप्त हो जाता है। इसलिए नाग पंचमी के दिन पहले गणेश जी की कथा (Ganesh Ji Ki Katha) पढ़ें इसके बाद नाग पंचमी की व्रत कथा (Nag panchami Ki Katha) सुनें। चलिए जानते हैं गणेश जी की कहानी क्या है।

गणेश जी की कहानी (Ganesh Ji Ki Kahani)

एक गांव में एक बुढ़िया रहा करती थी जो बहुत गरीब थी। साथ ही दृष्टिहीन भी थी। उसके एक ही बेटा था जिसकी शादी हो गई थी। बुढ़िया भगवान गणेश की बड़ी भक्त थी। एक दिन गणेश जी प्रकट होकर बुढ़िया से बोले, बुढ़िया माई मैं तेरे से प्रसन्न हूं जो मांगना है मांग लो।

इस पर बुढ़िया बोली मुझे मांगना नहीं आता। कैसे और क्या मांगू मुझे समझ नहीं आ रहा। तब गणेश जी ने कहा कि अपने बहू बेटे से पूछ लोग क्या मांगना है। तब बुढ़िया अपने बेटे के पास गई और उसे सब बता दिया। पुत्र ने कहा कि मां तू धन मांग ले। फिर बहू से पूछा तो उसने कहा कि तू नाती मांग ले।

तब बुढ़िया ने सोचा ये तो अपने-अपने मतलब की बात कर रहे हैं। फिर बुढ़िया ने पड़ोसन से पूछा तो उसने कहा कि तेरी जिंदगी तो थोड़े ही दिन की बची है फिर धन और नाती मांगकर क्या करेगी। तू अपने लिए आंखों की रोशनी मांग लें। जिससे तेरी जिंदगी के बचे हुए दिन अच्छे से निकल पाए।

तब बुढ़िया जाकर गणेश जी से बोली अगर आप प्रसन्न हैं तो मुझे नौ करोड़ी की माया दें, निरोगी काया दें, अमर सुहाग दें, आंखों की रोशनी दें, नाती दें, पोता दें और सब परिवार को सुख दें और अंत में मोझ प्रदान करें।

तब गणेश जी कहने लगे कि बुढ़िया मां तुमने तो मुझे ठग लिया। लेकिन फिर भी मैं तेरी सारी मनोकामनाएं पूर्ण होने का आशीर्वाद देता हूं। इस तरह से बुढ़ियां माई की मांगी गई सारी मुराद पूरी हो गईं। हे गणेशजी महाराज जिस तरह आपने बुढ़िया मां को सबकुछ दिया ऐसे ही सभी को देना।

Laveena Sharma
लवीना शर्माauthor

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करियर की शुरुआत न्यूज 24 से हुई। इसके बाद तमाम चैनलों में काम किया। जहां स्क्रिप्ट राइटिंग, एडिटिंग और एंकरिंग का अनुभव हासिल हुआ। रफ्तार यहीं नहीं रूकी अब चाह थी कुछ नया करने की जिसके लिए मैंने डिजिटल मीडिया में स्विच किया और मैं जनसत्ता से जुड़ गई। जनसत्ता में मैंने अध्यात्म सेक्शन लीड किया। इसके बाद पत्रिका में सेवाएं दी और अब timesnowhindi.com से जु़ड़ी हूं। यहां भी मैं अध्यात्म सेक्शन में कार्यरत हूं। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और ज्योतिष शास्त्र में मेरा शुरू से ही लगाव रहा है। मेरी कोशिश रहती है कि मैं ऐसा कंटेट लिखूं जिससे बड़े बुजुर्ग ही नहीं बल्कि आज के युवा भी कनेक्ट कर सकें।

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