अध्यात्म

Famous Gurudwara in Delhi: ये हैं दिल्ली के पांच प्रसिद्ध गुरुद्वारे, यहां जानिए इनके बारे में सारी जानकारी

Famous Gurudwara in Delhi: गुरुद्वारा सिख धर्म का सबसे पवित्र स्थान माना जाता है। सिख समुदाय ही नहीं बल्कि अन्य धर्म के लोग भी गुरुद्वारा जाना बेहद ही पसंद करते हैं। ऐसे में चलिए आज हम आपक बताते हैं दिल्ली के पांच प्रसिद्ध गुरुद्वारे के बारे में। यहां पढ़ें सारी जानकारी।

Image

Famous Gurudwara in Delhi

Famous Gurudwara in Delhi: दिल्ली में घूमने के लिए बहुत सी जगहें हैं। इनमे से एक है बहुत ही खास दिल्ली के गुरुद्वारे। गुरुद्वारा ना केवल सिख समुदायों के लोगों की पसंदीदा जगह है,बल्कि अन्य धर्म के लोग भी यहां जाना बहुत पसंद करते हैं। गुरुद्वारे में लोगों को आत्मिक शांति का अनुभव होता है। साथ ही उसमे चलने वाली गुरु ग्रंथ का पाठ सुनकर लोग मंत्र मुग्ध भी हो जाते हैं। गुरुद्वारे में अक्सर लंगड का आयोजन किया जाता है। आज हम बात करेंगे दिल्ली के पांच प्रसिद्ध गुरुद्वारे के बारे में। यहां जानें सारी डिटेल।

ये है दिल्ली के पांच प्रसिद्ध गुरुद्वारे (Famous Gurudwara in Delhi)

गुरुद्वारा बंगला साहिब

प्रसिद्ध बंगला साहिब गुरुद्वारा दिल्ली में स्थित है। बंगला साहिब को लेकर कई मान्यताएं हैं। कहा जाता है कि यह गुरुद्वारा कभी जयपुर के महाराजा जय सिंह का बंगला था। कभी इस बंगले में सिखों के आठवें गुरु हर किशन सिंह रहते थे। इसका निर्माण 1783 में सिख जनरल सरदार भगेल सिंह ने करवाया था। दिल्ली के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक और पर्यटन स्थलों में से एक, गुरुद्वारा बंगला साहिब, दिन के 24 घंटे खुला रहता है और पूरे साल लंगर चलता है। ऐसा माना जाता है कि यहां के पानी में उपचार गुण हैं और इसे बहुत पवित्र माना जाता है।

गुरुद्वारा बाबा बंदा सिंह बहादुर

बाबा बंदा सिंह बहादुर गुरुद्वारा दिल्ली में कुतुब मीनार के पास महरौली में स्थित है। 1719 में, मुगलों ने बाबा बंदा सिंह बहादुर और उनके बेटों के साथ-साथ 40 अन्य सिखों की बेरहमी से हत्या कर दी। यह गुरुद्वारा उनकी वीरता और शहादत की याद में बनाया गया था। हर साल बैसाखी में यहां मेले का आयोजन किया जाता है।

गुरुद्वारा शीशगंज साहिब

गुरुद्वारा शीश गंज साहिब पुरानी दिल्ली के चांदनी चौक इलाके में स्थित है। इसका निर्माण 1783 में पंजाब जिले के सैन्य जनरल बाघेल सिंह ने करवाया था। यह सिखों के नौवें गुरु, गुरु तेग बहादुर की शहादत स्थल है। जब गुरु ने इस्लाम अपनाने से इनकार कर दिया, तो मुगल सम्राट औरंगजेब के आदेश पर उनकी हत्या कर दी गई। गुरुद्वारे का निर्माण गुरु तेज बहादुर की शहादत की याद में किया गया था।

गुरुद्वारा रकाबगंज

गुरुद्वारा रकाबगंज संसद भवन के पास स्थित है और इसका निर्माण 1783 में हुआ था। इस गुरुद्वारे को पूरा करने में कुल 12 साल लगे। इस गुरुद्वारे के निर्माण की अनुमति तत्कालीन मुगल शासक शाह आलम द्वितीय ने दी थी। सिख धर्म के नौवें गुरु, गुरु तेग बहादुर जी का अंतिम संस्कार भी इसी गुरुद्वारे में किया गया था।

गुरुद्वारा माता सुंदरी

गुरुद्वारे का नाम गुरु गोबिंद सिंह की पत्नी के नाम पर रखा गया है। माता सुंदरी गुरुद्वारा वह स्थान है जहां माता सुंदरी ने 1747 में अंतिम सांस ली थी। उनकी याद में इस स्थान को तीर्थस्थल घोषित किया गया था। गुरु गोबिंद जी माता की मृत्यु के बाद सुंदरी ने लगभग 40 वर्षों तक सिखों का नेतृत्व किया। सिख धर्म के लोग उनका बहुत सम्मान करते हैं और उन्हें अपना गुरु मानते हैं।

TNN Spirituality Desk
TNN अध्यात्म डेस्क author

अध्यात्म और ज्योतिष की दुनिया बेहद दिलचस्प है। यहां हर समय कुछ नया सिखने और जानने को मिलता है। अगर आपकी अध्यात्म और ज्योतिष में गहरी रुचि है और आप इस विषय से जुड़ी हर एक जानकारी जैसे गृह-नक्षत्रों में होने वाले बदलाव, आगामी व्रत त्यौहार, ज्योतिष और वस्तु उपाय आदि विषयों से अपडेट रहना चाहते हैं, तो आपको इस प्लेटफॉर्म पर ये सबकुछ एक साथ मिल जाएगा

और पढ़ें
End of Article