अध्यात्म

Somnath Temple: जब 1000 ब्राह्मण, 800 कलाकार और 300 नाई बढ़ाते थे सोमनाथ की शोभा, कुछ यूं भरता था मंदिर का खजाना

सोमनाथ अमृत पर्व (Somnath Amrit Parv) मनाया जा रहा है। इश खास अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमनाथ मंदिर (PM Modi in Somnath Mandir) पहुंचे हैं। सोमनाथ महादेव का यह मंदिर सदियों से सनातनी आस्था का केंद्र रहा है।

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सदियों से सनातनी आस्था का केंद्र हैं सोमनाथ (AI Image)

History of Somnath Mandir (पहले कैसा था सोमनाथ मंदिर): हिंदू धार्मिक मान्यता के मुताबिक भगवान शिव के 12 दिव्य ज्योतिर्लिंग हैं। इन ज्योतिर्लिंगों में सबसे पहला स्थान सोमनाथ महादेव का आता है। सोमनाथ मंदिर गुजरात के गिर सोमनाथ जिले के वेरावल (प्रभास पाटन) में स्थित है। सोमनाथ महादेव का यह दरबार अरब सागर के तट पर बना है। सोमनाथ मंदिर इतिहास में कई बार टूटा और कई बार बना। लेकिन टूटने और बनने की इस श्रृंखला में जो एक चीज स्थायी रही वो थी अपने आराध्य भोलेनाथ के लिए भक्तों की भक्ति।

कहा जाता है के 17 बार सोमनाथ मंदिर को लूटा गया। हालांकि इतिहासकारों के मुताबिक 7 बार मंदिर पर हमला हुआ और इसे क्षत विक्षत किया गया। लेकिन ये लोगों की आस्था और श्रद्धा की ताकत ही थी कि आज भी सोमनाथ महादेव का दरबार शान से खड़ा है। हालांकि सैकड़ों साल पहले भी मंदिर की भव्यता ऐसी थी कि पूरी दुनिया आज भी हैरान होती है।

किसने बनवाया था सोमनाथ मंदिर का सबसे भव्य मंदिर

दो बार टूटने के बाद तीसरी बार सोमनाथ मंदिर 815 ईस्वी में बना था। इस बार प्रतिहार सम्राट नागभट्ट द्वितीय ने लाल बलुआ पत्त्थरों से दिव्य और भव्य मंदिर का निर्माण कराया। करीब 200 सालों तक यह मंदिर अपनी भव्यता के साथ भक्तों का आतिथ्य करता रहा।
तीसरी बार बना सोमनाथ मंदिर था सबसे भव्य

तीसरी बार बना सोमनाथ मंदिर था सबसे भव्य

भरता और बढ़ता गया मंदिर का खजाना

फारसी इतिहासकार जकरिया अल काजविनी और मुहम्मद कासिम फारिश्ता के मुताबिक मंदिर के रखरखाव और उसकी भव्यता को बरकरार रखने के लिए करीब 10 हजार गांवों से टैक्स जुटाया जाता था। मंदिर के खजाने को चंद्रगहण के दिन भी भारी संख्या में दान मिला करता था। दरअसल चंद्रग्रहण के समय देशभर से लोग सोमनाथ मंदिर आते और पूजा अर्चना के साथ ही खूब दान दे कर भी जाते।

उन दिनों सोमनाथ का वेरावल बंदरगाह विदेशी व्यापार का बड़ा केंद्र था। यहां बड़ी संख्या में आयात और निर्यात होता। इस बंदरगाह से होने वाली अथाह कमाई का एक बड़ा हिस्सा सोमनाथ मंदिर को दान किया जाता था।

1000 ब्राह्मण, 800 कलाकार और 300 नाई

इतिहासकार बताते हैं कि तीसरी बार लाल पत्थर से बने इस सोमनाथ मंदिर में पूजा पाठ के लिए हजार से ज्यादा ब्राह्मण लगे थे। सुबह शाम मंदिर और आसपास का इलाका वैदिक मंत्रोचार की ध्वनि में डूबा रहता। बताया जाता है कि उन दिनों करीब 500 गायिकाएं और नर्तकियां मंदिर में समां बांधे रखती थीं। इसके अलावा मंदिर में करीब 300 संगीतकार और 300 नाई भी रहते।
मंदिर के लिए नियुक्त किये गए थे 300 नाई (AI Image)

मंदिर के लिए नियुक्त किये गए थे 300 नाई (AI Image)

सोमनाथ मंदिर में क्यों थे इतने नाई

सोमनाथ मंदिर में प्राचीन समय में नाई का होना मुंडन संस्कार और धार्मिक अनुष्ठानों से जुड़ा था, जहां श्रद्धालु पाप मुक्ति और आत्म-शुद्धि के लिए अपने केश अर्पित करते थे। यह मान्यता विशेष रूप से तीर्थयात्रियों के लिए अपनी इच्छाएं पूरी करने या भगवान के प्रति समर्पण दिखाने के रूप में थी, जो कि सोमनाथ जैसे पवित्र स्थल पर एक महत्वपूर्ण परंपरा रही है। इसके अलावा ऐसी मान्यता रही है कि प्रमुख ज्योतिर्लिंगों के दर्शन के दौरान मुंडन कराना भक्ति और आत्म-समर्पण की गहरी भावना को व्यक्त करता है।

महमूद गजनवी ने खत्म कर दिया था 'सब'

200 से अधिक सालों तक आस्था का केंद्र रहा यह सोमनाथ मंदिर भी विदेशी आक्रांताओं की बलि चढ गया। जनवरी 1026 में महमूद गजनवी ने लाल बलुआ पत्थर से बने इस दिव्य और भव्य मंदिर को नष्ट कर दिया। 5 हजार सैनिकों के साथ गजनवी ने मंदिर पर हमला बोला था और करीब 50 हजार सनातनियों ने सोमनाथ की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिये थे।

नागभट्ट से पहले भी आस्था का बड़ा केंद्र था सोमनाथ

भारत सरकार में केंद्रीय मंत्री के एम मुंशी ने अपनी किताब सोमनाथ: द श्राइन इटरनल में लिखा कि सोमनाथ मंदिर पहली सदी के पहले ही बन गया था, लेकिन चौथी से पांचवीं सदी के बीच इसका कोई जिक्र नहीं मिलता। इससे यह बात पुख्ता होती है कि पहली बार मंदिर को इसी समय लूटा और तोड़ा गया होगा।

7वीं सदी में मंदिर फिर से बना। मंदिर का निर्माण कराया था सौराष्ट्र के प्राचीन शहर वल्लभी के मैत्रक राजाओं ने। मंदिर बेहद भव्य बना था। इस मंदिर की खास बात ये थी कि जहां पहला मंदिर था उसी जगह दूसरे मंदिर का गर्भगृह बना।

8वीं सदी में अरब शासक हज्जाज ने अपने दामाद मोहम्मद कासिम को सिंध के ब्राह्मण राजाओं से लड़ने भेजा। इसी कड़ी में 725 ईस्वी में अरब गवर्नल जनरल अल जुनैद ने मंदिर को लूटा और तोड़ा था। इसी समय सोमनाथ का दूसरा मंदिर भी तबाह हो गया।

आज भी सनातनियों के सिर का ताज है सोमनाथ (Wikipedia)

आज भी सनातनियों के सिर का ताज है सोमनाथ (Wikipedia)

आज भी शान से खड़ा है सोमनाथ

अरबों द्वारा दूसरी बार तोड़े जाने के बाद ही नागभट्ट ने 815 ईस्वी में तीसरी बार इतिहास का सबसे दिव्य और भव्य सोमनाथ मंदिर बनवाया। इसी मंदिर पर महमूद गजनवी ने हमला कर इसे नष्ट कर दिया। गजनवी के हमले के बाद भी सोमनाथ का यह मंदिर कई बार लुटा, टूटा और बना। इन सबके बावजूद लोगों की सोमनाथ महादेव में श्रद्धा रत्ती भर कम नहीं हुई। इसी आस्था का परिणाम है कि आज भी हिंदुस्तान की धरा पर सोमनाथ महादेव का यह मंदिर अपनी पूरी दिव्यता और भव्यता के साथ शान से खड़ा है।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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