Dronacharya Mela Noida: गुरु द्रोणाचार्य के सम्मान में आयोजित होने वाला द्रोणाचार्य मेला एक वार्षिक आयोजन है। गुरु द्रोणाचार्य मेला गुरुवार, 21 अगस्त से शुरू हो रहा है और 30 अगस्त को समाप्त होगा। यह मेला आमतौर पर 10 दिनों तक ही चलता है। गुरु-शिष्य परंपरा को सम्मान देने के साथ ही भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस मेले का आयोजन ग्रेटर नोएडा के दनकौर स्थित गुरु द्रोणाचार्य मंदिर में किया जाता है। मान्यता है कि नोएडा और उसके आसपास का क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से उस स्थान से जुड़ा है जहां महाभारत काल में गुरु द्रोणाचार्य ने पांडवों और कौरवों को शिक्षा दी थी।
कौन थे गुरु द्रोणाचार्य: महाभारत के महान योद्धा और शिक्षक के रूप में गुरु द्रोणाचार्य को जाना जाता है। गुरु द्रोणाचार्य अश्वत्थामा के पिता और भृगु ऋषि के वंशज थे। शस्त्र विद्या, धनुष बाण, और रणनीति की शिक्षा उन्होंने कौरवों और पांडवों को दी थी।
इतिहास से जुड़ा नोएडा का यह हिस्सा: नोएडा के कुछ पुराने गांवों जैसे हरौला, सर्फाबाद में आज भी द्रोणाचार्य से जुड़े किस्से सुनाए जाते हैं। लोककथाओं और पुराणों के अनुसार गुरुग्राम और नोएडा क्षेत्र के बीच फैला हुआ ये क्षेत्र जिसे कभी गुरु द्रोण की तपोभूमि माना जाता था।
मेला में क्या है खास: गुरु-द्रोण की प्रतिमा की पूजा और भव्य झांकी के अलावा सांस्कृतिक कार्यक्रम, लोकगीत, नाटक और कवि सम्मेलन का आयोजन किया जाता है। स्थानीय शिल्प, भोजन और हस्तकला की प्रदर्शनी होती है।
गुरु की भूमिका को सम्मान: युवाओं को गुरु की अहमियत समझाने के एक जरिए के रूप में इस मेले को देखा जाता है। भारतीय परंपराओं की पुनर्स्थापना और सम्मान का माध्यम मौजूदा समय में यह मेला बन चुका है।
