Gemstone Tips: हीरा है सदा के लिए, लेकिन हर किसी के लिए नहीं। जी हां, बिल्कुल हीरा रत्न भले ही बेशकीमती होता है और देखने में रॉयल अहसास देता है लेकिन फिर भी ये हर राशिवाले जातक के लिए नहीं होता है। हीरा रत्न वृषभभ राशिवालाें के लिए सबसे उपयुक्त होता है। रत्न शास्त्र के अनुसार हीरा रत्न वृषभ राशिवालों के लिए एक वरदान की तरह कार्य करता है। रासायनिक विश्लेषण के अनुसार हीरा कार्बन का ठोस रूप है। रत्न सम्राट हीरा रासायनिक गुणाें से सम्पन्न अति प्रभावशाली और मूल्यवान खनिज पत्थर है। हीरा शुक्र ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है। हीरे का रंग आकाश पुंज जैसी रोशनी लिये हुए श्वेत वर्ण का होता है जिसमें से हल्की आभा निकलती रहती है।
वृषभ राशि की विशेषता
वृषभ राशि को अंग्रेजी में टॉरस कहते हैं। इस राशि वाले मनुष्य सांसारिक कामों में दक्ष, व्यवहार कुशल, विचार करके कार्य करने वाले, सौंदर्य, तथा संगीत प्रेमी होते हैं। इस राशि का स्वामी शुक्र ग्रह होता है। इसलिए वृषभ राशि वालों को हीरा धारण करना चाहिए या फिर ओपल, स्फटिक, सफेद हकीक जैसे उपरत्न धारण करने चाहिए।
हीर की विशेषता और धारण करने से लाभ
हीरा धारण करने से शुक्र ग्रह संबंधित समस्त दोष शांत हो जाते हैं। जिस व्यक्ति की कुंडली में शुक्र ग्रह निर्बल है अथवा जिनकी राशि वृषभ या तुला है वह हीरा धारण करके दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदल सकते हैं। हीरा बहुत गुणकारी होता है। जो व्यक्ति हीरे को धारण करता है उसके चेहरे पर तेज रहता है। चेहरे पर हर समय मुस्कान रहती है। जीवन में जो विशेषताएं होनी चाहिएं वह मनुष्य में अनायास ही आने लगती हैं। हीरा धारण करने से धन− धान्य में वृद्धि होती है। यह व्यक्ति की शारीरिक विवशताओं को दूर करके शरीर में नवीन क्रांति का संचार करता है। तथा मानसिक दुर्बलताओं का अंत करता है, जिससे दाम्पत्य जीवन सुखमय व्यतीत होता है। हीरा धारण करने से भूत− प्रेत व्याधा दूर होती है। जादू− टोने का असर नहीं होता है। सहवास क्रिया के समय स्तम्भन शक्ति में वृद्धि होती है। यह क्रोध को समाप्त कर अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति करवाता है।
इस तरह करें हीरा धारण
हीराम कम से कम दस सेंट का धारण करना चाहिए। वैसे हीरा जितने वजन का होगा उतना ही शुभ होगा। हीरे को सोने या चांदी की अंगूठी में जड़वा कर शुक्रवार के दिन अनामिका उंगली में धारण करना चाहिए। धारण करने से पूर्व कच्चे दूध तथा गंगाजल में धाेकर इष्टदेव के चरणाें में स्पर्श करना चाहिए। हीरा धारण करते समय ऊँ द्रां द्रीं द्रौ सः शुक्राय नमः का जाप करना चाहिए।
डिस्क्लेमर : यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्स नाउ नवभारत इसकी पुष्टि नहीं करता है।
