धनतेरस पर मां लक्ष्मी और कुबेर देवता की ऐसे करें पूजा, जानें मंत्र
धनतेरस पर मां लक्ष्मी और कुबेर देवता की ऐसे करें पूजा, जानें मंत्र
धनतेरस 2022 पूजा और खरीदारी मुहूर्त (Dhanteras 2022 Puja And Shopping Muhurat): 23 अक्टूबर को पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 44 मिनट से शाम 6 बजकर 5 मिनट तक रहेगा। धनतेरस खरीदारी का पहला शुभ मुहूर्त सुबह 7.51 बजे से दोपहर 12 बजे तक। दूसरा मुहूर्त दोपहर 1:30 से 3 बजे तक। तीसरा मुहूर्त शाम 6 बजे से रात 10:30 बजे तक।
Dhanteras 2022 Date, Puja Muhurat Time Live Updates
धनतेरस पूजा विधि: धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि, देवी लक्ष्मी एवं कुबेर देव की पूजा होती है। धनतेरस पर संध्या के समय उत्तर दिशा की तरफ देव कुबेर और भगवान धन्वंतरि की स्थापना करें। साथ ही माता लक्ष्मी और श्री गणेश की भी मूर्ति स्थापित करें। इसके बाद दीपक प्रज्वलित करें और विधिवत पूजन प्रारंभ करें। सभी देवी-देवताओं को तिलक लगाएं और पुष्प, फल आदि अर्पित करें। कुबेर देव को सफेद मिठाई तो धन्वंतरि देव को पीली मिठाई का भोग लगाएं। इस पूजा के दौरान 'ऊं ह्रीं कुबेराय नमः' मंत्र का जाप करते रहें। भगवान धन्वंतरि को प्रसन्न करने के लिए धनतेरस पर धन्वंतरि स्तोत्र का पाठ भी जरूर करें। इसके अलावा मां लक्ष्मी के मंत्रों का जाप भी करें। अंत में आरती कर पूजा संपन्न करें।
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कुबेर मंत्र
धनतेरस पर दान से प्रसन्न होती हैं मां लक्ष्मी:
भगवान धन्वंतरि जी की आरती:
तुम समुद्र से निकले, अमृत कलश लिए, देवासुर के संकट आकर दूर किए, स्वामी जय धन्वन्तरि देवा, ॐ जय धन्वन्तरि जी देवा।।
आयुर्वेद बनाया, जग में फैलाया, सदा स्वस्थ रहने का, साधन बतलाया,स्वामी जय धन्वन्तरि देवा, ॐ जय धन्वन्तरि जी देवा।।
भुजा चार अति सुंदर, शंख सुधा धारी, आयुर्वेद वनस्पति से शोभा भारी, स्वामी जय धन्वन्तरि देवा, ॐ जय धन्वन्तरि जी देवा।
तुम को जो नित ध्यावे, रोग नहीं आवे, असाध्य रोग भी उसका, निश्चय मिट जावे, स्वामी जय धन्वन्तरि देवा, ॐ जय धन्वन्तरि जी देवा।।
हाथ जोड़कर प्रभुजी, दास खड़ा तेरा, वैद्य-समाज तुम्हारे चरणों का घेरा, स्वामी जय धन्वन्तरि देवा, ॐ जय धन्वन्तरि जी देवा।
धन्वंतरिजी की आरती जो कोई नर गावे, रोग-शोक न आए, सुख-समृद्धि पावे, स्वामी जय धन्वन्तरि देवा, ॐजय धन्वन्तरि जी देवा।।
Laxmi Ji Ki Aarti (लक्ष्मी जी की आरती)
मैया जय लक्ष्मी माता ।
तुमको निसदिन सेवत,
हर विष्णु विधाता ॥
उमा, रमा, ब्रम्हाणी,
तुम ही जग माता ।
सूर्य चद्रंमा ध्यावत,
नारद ऋषि गाता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता...॥
दुर्गा रुप निरंजनि,
सुख-संपत्ति दाता ।
जो कोई तुमको ध्याता,
ऋद्धि-सिद्धि धन पाता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता...॥
तुम ही पाताल निवासनी,
तुम ही शुभदाता ।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशनी,
भव निधि की त्राता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता...॥
जिस घर तुम रहती हो,
ताँहि में हैं सद्गुण आता ।
सब सभंव हो जाता,
मन नहीं घबराता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता...॥
तुम बिन यज्ञ ना होता,
वस्त्र न कोई पाता ।
खान पान का वैभव,
सब तुमसे आता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता...॥
शुभ गुण मंदिर सुंदर,
क्षीरोदधि जाता ।
रत्न चतुर्दश तुम बिन,
कोई नहीं पाता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता...॥
महालक्ष्मी जी की आरती,
जो कोई नर गाता ।
उँर आंनद समाता,
पाप उतर जाता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता...॥
ॐ जय लक्ष्मी माता,
मैया जय लक्ष्मी माता ।
तुमको निसदिन सेवत,
हर विष्णु विधाता ॥
भगवान कुबेर की आरती
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धनतेरस पर घर के बाहर जलाएं दीपक
धनतेरस में अष्टधातु की मूर्ति ख़रीदें
Laxmi Ji Ki Aarti (लक्ष्मी जी की आरती)
मैया जय लक्ष्मी माता ।
तुमको निसदिन सेवत,
हर विष्णु विधाता ॥
उमा, रमा, ब्रम्हाणी,
तुम ही जग माता ।
सूर्य चद्रंमा ध्यावत,
नारद ऋषि गाता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता...॥
दुर्गा रुप निरंजनि,
सुख-संपत्ति दाता ।
जो कोई तुमको ध्याता,
ऋद्धि-सिद्धि धन पाता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता...॥
तुम ही पाताल निवासनी,
तुम ही शुभदाता ।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशनी,
भव निधि की त्राता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता...॥
जिस घर तुम रहती हो,
ताँहि में हैं सद्गुण आता ।
सब सभंव हो जाता,
मन नहीं घबराता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता...॥
तुम बिन यज्ञ ना होता,
वस्त्र न कोई पाता ।
खान पान का वैभव,
सब तुमसे आता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता...॥
शुभ गुण मंदिर सुंदर,
क्षीरोदधि जाता ।
रत्न चतुर्दश तुम बिन,
कोई नहीं पाता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता...॥
महालक्ष्मी जी की आरती,
जो कोई नर गाता ।
उँर आंनद समाता,
पाप उतर जाता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता...॥
ॐ जय लक्ष्मी माता,
मैया जय लक्ष्मी माता ।
तुमको निसदिन सेवत,
हर विष्णु विधाता ॥
