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Chitragupta Bhagwan Photo Hd: कौन हैं चित्रगुप्त भगवान, यहां देखें इनकी फोटो

Chitragupta Bhagwan Photo: कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को चित्रगुप्त भगवान की पूजा की जाती है। इस साल चित्रगुप्त पूजा का त्योहार 3 नवंबर को मनाया जा रहा है। इस शुभ अवसर पर देखें चित्रगुप्त जी की फोटो।

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Chitragupta Bhagwan Photo

Chitragupta Bhagwan Photo (चित्रगुप्त भगवान का फोटो): पुराणों के अनुसार चित्रगुप्त जी की पूजा करने से व्यक्ति को विष्णु लोक की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यताओं अनुसार चित्रगुप्त भगवान ही इंसान के पाप-पुण्य का लेखा-जोखा रखते हैं। इसलिए इस दिन किताब, कलम, दवात और बहीखातों की विशेष रूप से पूजा की जाती है। कहते हैं जो जातक सच्चे मन से चित्रगुप्त जी की पूजा करता है उसे विद्या का वरदान मिलता है। यहां आप देखेंगे चित्रगुप्त भगवान की फोटो।

कौन हैं चित्रगुप्त महाराज ? (Kaun Hai Chitragupta Maharaj)

पुराणों के अनुसार भगवान चित्रगुप्त जी का जन्म ब्रह्मा जी के चित्त से हुआ था। माना जाता है कि यही लोगों के कर्मों के हिसाब किताब रखते हैं। इनकी पूजा मुख्य रूप से भाई दूज के दिन की जाती है। कहते हैं भाई दूज पर जो भी जातक सच्चे मन से इनकी पूजा करता है, उसे विद्या का वरदान मिलता है।

चित्रगुप्त भगवान की फोटो (Chitragupta Bhagwan Ki Photo)

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चित्रगुप्त हिंदुओं के प्रमुख देवता में गिने जाते हैं, जो अपने दरबार में हर इंसान के पाप-पुण्य का लेखा-जोखा कर न्याय किया करते हैं।

चित्रगुप्त जी की फोटो (Chitragupta Ji Ki Photo)

Chitragupta Maharaj Ki Image

Chitragupta Maharaj Ki Image

चित्रगुप्त पूजा का शुभ मुहूर्त 3 नवंबर की दोपहर 1:10 से 3:22 बजे तक रहेगा।

Chitragupta Maharaj Ki Image

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चित्रगुप्त पूजा का त्यौहार मुख्यतः कायस्थ समाज द्वारा मनाया जाता है। मान्यताओं के अनुसार भगवान चित्रगुप्त कलम-दवात की मदद से ही समस्त जीवों के कर्मों का विवरण लिखते हैं, इसीलिये उनकी पूजा के दिन कलम-दवात और बहीखातों की पूजा भी की जाती है।

Laveena Sharma
लवीना शर्माauthor

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करियर की शुरुआत न्यूज 24 से हुई। इसके बाद तमाम चैनलों में काम किया। जहां स्क्रिप्ट राइटिंग, एडिटिंग और एंकरिंग का अनुभव हासिल हुआ। रफ्तार यहीं नहीं रूकी अब चाह थी कुछ नया करने की जिसके लिए मैंने डिजिटल मीडिया में स्विच किया और मैं जनसत्ता से जुड़ गई। जनसत्ता में मैंने अध्यात्म सेक्शन लीड किया। इसके बाद पत्रिका में सेवाएं दी और अब timesnowhindi.com से जु़ड़ी हूं। यहां भी मैं अध्यात्म सेक्शन में कार्यरत हूं। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और ज्योतिष शास्त्र में मेरा शुरू से ही लगाव रहा है। मेरी कोशिश रहती है कि मैं ऐसा कंटेट लिखूं जिससे बड़े बुजुर्ग ही नहीं बल्कि आज के युवा भी कनेक्ट कर सकें।

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