Sakat Chauth 2022 Puja Vidhi, Muhurat, Vrat Katha: कैसे करें सकट चौथ व्रत का पारण, यहां जानें पारण विधि
Sakat Chauth 2022 Puja Vidhi, Vrat Katha, Shubh Muhurat, Samagri in Hindi: माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर सकट चौथ व्रत रखा जाता है। इस व्रत को खासतौर पर संतान प्राप्ति और उसकी सुरक्षा के लिए फलदायी माना जाता है। इसं लंबोदर संकष्टी चतुर्थी भी कहते हैं।
Sakat Chauth 2022 Puja Vidhi, Vrat Katha, Shubh Muhurat: आज सकट चौथ है। माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी पर सकट चौथ व्रत आता है, जिसे तिलकुट चौथ (tilkut chauth 2022 date) और लंबोदर संकष्टी चुतर्थी भी कहते हैं। सकट चौथ के व्रत की मान्यताएं खासतौर पर संतान प्राप्ति और संतान के स्वास्थ्य से जुड़ी हुई है। सकट चौथ (sakat chauth vrat 2022) पर गणपति उपासना की जाती है। इस व्रत पर चंद्रमा की पूजा का भी विधान है।
कब है सकट चौथ 2022, tilkut chauth 2022 date
21 जनवरी 2022, शुक्रवार को सुबह 08:51 मिनट से चतुर्थी तिथि प्रारंभ होगी। इसका समापन 22 जनवरी 2022, शनिवार को सुबह 09:41 बजे होगा। उपासक इस व्रत में निर्जला रहते हैं और गणेश पूजन करते हैं। रात में चंद्रदेव को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाता है।
कैसे करें सकट चौथ व्रत पारण?
अगर आपने सकट चौथ का व्रत रखा है तो सकट चौथ की रात को चंद्र देव को अर्घ्य देने के बाद कथा का पाठ करें। कथा का पाठ करने के बाद प्रसाद वितरित करें और खुद प्रसाद ग्रहण करें। इसके बाद अगली सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें। साफ वस्त्र धारण करने के बाद गणेश जी की विधि अनुसार पूजा करें। पूजा के दौरान व्रत में हुई भूल के लिए भगवान से क्षमा मांगे। इसके बाद व्रत का पारण करें।
अर्घ्य देने के बाद करें यह कार्य
सकट चौथ पर चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद चंद्र देव से सुख-शांति की प्रार्थना करें। इसके बाद माघी चतुर्थी की कथा का पाठ करने के बाद प्रसाद वितरित अवश्य करें। सकट चौथ का प्रसाद घर के सदस्यों में जरूर बांटें और खुद ग्रहण करें।
पूजा में ना करें तुलसी के पत्ते शामिल
भगवान गणेश की पूजा में तुलसी के पत्तों को शामिल नहीं करना चाहिए। अगर आप सकट चौथ का व्रत रख रहे हैं तो इस दिन पूजा में तुलसी के पत्ते शामिल ना करें।
सकट चौथ पर ना करें यह भूल
अगर आप सकट चौथ का व्रत रख रहे हैं तो इस दिन किसी के लिए अपने मन में बुरी भावना ना रखें। इस दिन किसी को भी बुरा भला ना बोलें और महिलाओं का सम्मान करें।
मुंबई में कब निकलेगा चांद?
आज सकट चौथ का व्रत रखा जा रहा है। सकट चौथ पर भगवान गणेश और चंद्र देव की पूजा का विधान है। मुंबई में आज चांद निकलने का समय रात के 9:27 का है।
गणेश जी की आरती
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा .
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥
एक दंत दयावंत, चार भुजाधारी .
माथे पे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया .
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥
हार चढ़ै, फूल चढ़ै और चढ़ै मेवा .
लड्डुअन को भोग लगे, संत करे सेवा ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥
दीनन की लाज राखो, शंभु सुतवारी .
कामना को पूर्ण करो, जग बलिहारी ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा
आज करें गणेश स्तुति मंत्र का पाठ
ॐ श्री गणेशाय नम:।
ॐ गं गणपतये नम:।
ॐ वक्रतुण्डाय नम:।
ॐ हीं श्रीं क्लीं गौं ग: श्रीन्महागणधिपतये नम:।
ॐ विघ्नेश्वराय नम:।
गजाननं भूतगणादि सेवितं, कपित्थ जम्बूफलसार भक्षितम्।
उमासुतं शोक विनाशकारणं, नमामि विघ्नेश्वर पादपंकजम्।
दिल्ली में कब निकलेगा चांद?
आज पूरे भारत में सकट चौथ का व्रत रखा जा रहा है। दिल्ली शहर में आज चांद रात के 9:00 बजे निकलेगा। सकट चौथ पर चांद की पूजा करने का विधान है। इस दिन चंद्र देव को अर्घ्य दिया जाता है।
चंद्रदेव को इस मंत्र से दें अर्घ्य
सकट चौथ पर जब चांद नजर आए तो एक लोटे में शुद्ध जल भरकर उसमें लाल चन्दन, कुश, पुष्प, अक्षत आदि डालकर चन्द्रमा अर्घ्य दें। साथ ही इस मंत्र का जाप करें - 'गगनार्णवमाणिक्य चंद्र दाक्षायणीपते। गृहाणार्घ्यं मया दत्तं गणेशप्रतिरूपक'। अर्थात-'गगन रुपी समुद्र के माणिक्य चन्द्रमा ! दक्ष कन्या रोहिणी के प्रियतम ! गणेश जी के प्रतिविम्ब! आप मेरा दिया हुआ यह अर्घ्य स्वीकार कीजिए'।
सकट चौथ की कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार सतयुग में राजा हरीशचंद्र के राज्य में एक कुम्हार था। जब भी वह बर्तन बनाता था उसके बर्तन कच्चे रह जाते थे, ऐसे में वह अपनी समस्या लेकर एक पुजारी के पास जा पहुंचा। पुजारी की सलाह पर उसने इस समस्या को दूर करने के लिए एक छोटे बालक को मिट्टी के बर्तनों के साथ आंवा में डाल दिया। उस दिन सकट चौथ का व्रत था, बच्चे की मां ने विघ्नहर्ता भगवान गणेश जी से बच्चे की कुशलता के लिए प्रार्थना की। अगले दिन जब कुम्हार ने सुबह उठकर आंवा में देखा तो बर्तन पक गए थे और बच्चे को एक खरोंच भी नहीं आई थी। इस दिन से लोग संतान की सुख समृद्धि के लिए सकट चौथ या संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखते हैं।
सकट चौथ पर बन रहे 2 तरह के शुभ योग
इस वर्ष सकट चौथ पर दो तरह का शुभ योग बन रहा है जिसमें भगवान गणेश की पूजा करने पर बहुत ही शुभ फल की प्राप्ति होगी। सकट चौथ पर चंद्रमा पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र और सिद्धि योग में मनाया जाएगा। इसके अलावा ग्रहों के शुभ योग से सौभाग्य नाम का शुभ योग भी बना है। जिस कारण से सकट चौथ का महत्व बढ़ गया है।
हर महीने पड़ती है संकष्टी चतुर्थी
वैसे तो संकष्टी चतुर्थी का पर्व हर महीने पड़ता है, लेकिन शास्त्रों के अनुसार माघ माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया को यानी पूर्णिमा के बाद पड़ने वाले संकष्टी चतुर्थी का अलग ही महत्व है।
करीब 25 घंटे तक रहेगी तिथि
हर वर्ष सकट चौथ का व्रत माघ महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। इस बार चतुर्थी तिथि 21 जनवरी 2022, दिन शुक्रवार को सुबह 08 बजकर 51 मिनट से शुरू होकर 22 जनवरी की सुबह 09 बजकर 41 मिनट पर खत्म होगी।
इस व्रत से संतान के ऊपर के सभी संकट होते हैं दूर
इस व्रत में माताएं अपनी संतान की लंबी आयु और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के लिए उपवास रखती हैं। मान्यता है कि सकट चौथ का व्रत रखने और भगवान श्रीगणेश की पूजा-अर्चना करने से संतान के ऊपर आने वाले सभी संकट दूर हो जाते हैं।
गणपति आराधना से मिलती है बाधाओं से मुक्ति
नारद पुराण के अनुसार इस दिन भगवान गणपति की आराधना से सुख-सौभाग्य में वृद्धि तथा घर-परिवार पर आ रही विघ्न -बाधाओं से मुक्ति मिलती है एवं रुके हुए मांगलिक कार्य संपन्न होते हैं।
सकट चौथ पर है सौभाग्य योग
इस बार सकट चौथ पर सौभाग्य योग बन रहा है, जो बहुत शुभ माना जाता है। इस योग में किया गया कोई भी कार्य सफल होता है। ज्योतिषविद् के अनुसार सकट चौथ पर सौभाग्य योग दोपहर 3:06 बजे तक रहेगा और उसके बाद शोभन योग शुरू होगा। सकट चौथ के दिन सुबह से दोपहर 3.06 बजे तक सौभाग्य योग है। इसके बाद शोभन योग शुरू होगा, जो 22 जनवरी को दोपहर तक है।
इन नामों से भी प्रसिद्ध है सकट चौथ
सकट चौथ का व्रत भगवान गणेश की पूजा-आराधना करते हुए माताएं अपनी संतान की लंबी आयु और सौभाग्य में वृद्धि की कामना करते हुए रखती हैं। सकट चौथ को कई नामों से जाना जाता है जैसे- गणेश चौथ, संकष्टी चौथ,संकष्टी चतुर्थी, लंबोदर संकष्टी,माघी चौथ और तिलकुटा।
दाईं सूंड वाले गणपति की पूजा
मान्यता है कि सकट चौथ के दिन पर दाईं सूंड वाले गणपति की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। दाईं सूंड वाले गणपति कठिनाई से प्रसन्न होते हैं इसलिए सकट चौथ के दिन इनकी पूजा करनी चाहिए।
संतान की लंबी उम्र के लिए करें ये काम
सकट चौथ पर संतान की लंबी आयु के लिए निर्जला व्रत रखें। शाम के भगवान की पूजा के बाद गुड़ और तिल से बना लड्डू व पकवान का भोग भगवान को चढ़ाएं। इसके बाद चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण करें। माना जाता है कि यह व्रत करने से संतान के लंबी आयु का आशीर्वाद मिलता है।
सकट चौथ पर अपनों को दें बधाई
सकट चौथ को इन नामों से भी जाना जाता है
सकट चौथ का व्रत हर वर्ष माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन पड़ता है। सकट चौथ को संकटा चौथ के नाम से भी जाना जाता है। इसके साथ इस चौथ को लंबोदर संकष्टी चतुर्थी, माघी चौथ और तिलकुटा चौथ भी कहा जाता है।
भोग के लिए बनाएं ये चीजे
सकट चौथ पर भगवान गणपति का पूजन करें और उनके भोग के लिए लड्डू, तिल के लड्डू, तिलकुट, तिल की खीर और अन्य पकवान बनाएं।
गणेश जी की आरती
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा।।
एकदंत दयावंत चार भुजा धारी।
माथे पर तिलक सोहे मूसे की सवारी।।
पान चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा।
लड्डू के भोग लगे संत करें सेवा।।
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा।।
अंधे को आंख देत कोढिन को काया।
बांझन को पुत्र देत निर्धन को माया।।
सूर श्याम शरण आए सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा।।
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा।।
चंद्रदेव को अर्घ्य देने का मंत्र
सकट चौथ पर जब चांद नजर आए तो एक लोटे में शुद्ध जल भरकर उसमें लाल चन्दन, कुश, पुष्प, अक्षत आदि डालकर चन्द्रमा अर्घ्य दें। साथ ही इस मंत्र का जाप करें -
'गगनार्णवमाणिक्य चंद्र दाक्षायणीपते। गृहाणार्घ्यं मया दत्तं गणेशप्रतिरूपक'। अर्थात-'गगन रुपी समुद्र के माणिक्य चन्द्रमा ! दक्ष कन्या रोहिणी के प्रियतम ! गणेश जी के प्रतिविम्ब !आ प मेरा दिया हुआ यह अर्घ्य स्वीकार कीजिए'।
सकट चौथ पूजा के लिए गणेश मंत्र
संकष्टी चतुर्थी पर संकटों और परेशानियों से मुक्ति पाने के लिए 'ॐ एक दन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्तिः प्रचोदयात' का जाप करें। इसके अलावा 'ओम वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ, निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥' मंत्र का जाप करना भी फलदायी है।
सकट चौथ की व्रत कथा
मां पार्वती एक बार स्नान करने गईं तो दरवाजे पर भगवान गणपति को पहरा देने के लिए खड़ा रहने का निर्देश दिया। मां पार्वती ने गणपति जी से कहा कि जब तक वह खुद स्नान कर बाहर नहीं आतीं किसी को भी अंदर नहीं आने देना। यह सुनकर गणपति जी दरवाजे पर पहरा देने लगे। तभी शिव जी वहां पहुंचे और माता पार्वती से मिलने जाने लगे,तभी गणपति जी ने शिवजी को अंदर जाने से रोक दिया। शिव जी इससे काफी नाराज हुए और अपमानित भी। गुस्से में आ कर उन्होंने अपने त्रिशूल से गणपति जी का सिर काट दिया। इधर, शोर सुन कर जब मां पार्वती बाहर आईं तो गणपति जी का सिर धड़ से अलग पाया। ये देखते ही वह रोने लगीं और शिवजी को वापस गणपति को जीवित करने का आदेश दिया।
सकट चौथ पूजा विधि
सकट चौथ के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सभी नित्य क्रियाओं से निवृत्त हो जाइए। फिर स्नान करने के बाद भगवान गणेश जी के सामने व्रत करने का संकल्प लीजिए और पूजा कीजिए। सूर्यास्त के बाद स्नान करके साफ कपड़े पहन लीजिए और भगवान गणेश की मूर्ति की स्थापना कीजिए। मूर्ति की स्थापना करने के बाद गणेश जी को पीले वस्त्र पहनाना चाहिए। गणेश जी की मूर्ति के पास कलश में पानी भरकर रख दीजिए। अब विधि-विधान के अनुसार गणेश जी की पूजा और आरती कीजिए। भगवान गणेश को धूप, दीप, नैवेद्य, तिल, लड्डू, शकरकंद, अमरुद, गुड़ और घी अर्पित कीजिए। आरती के बिना कोई भी पूजा संपूर्ण नहीं होती है, इसीलिए पूजा को आरती करने के बाद ही समाप्त करना चाहिए।
इस दिन भगवान गणेश को तिल और गुड़ का भोग लगाना चाहिए। इस दिन तिलकुट का बकरा भी बनाया जाता है जिसे घर का ही कोई सदस्य पूजा करने के बाद काटता है। शाम के समय में चंद्रमा को अर्घ्य देकर इस व्रत का पारण कर लीजिए। अर्घ्य देते समय शहद, रोली, चंदन और रोली मिश्रित दूध दीजिए।
सकट चौथ के दिन चंद्रमा की पूजा करें
शास्त्रों के अनुसार सकट चौथ के दिन चंद्रमा की पूजा का विधान है। चंद्रमा को औषधियों का स्वामी और मन का कारक माना जाता है। इस दिन चंद्रदेव को अर्घ्य देने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि चंद्रमा को अर्घ्य देने से मन में आ रहे समस्त नकारात्मक विचार खत्म होते हैं और स्वास्थ्य लाभ मिलता है।
सकट चौथ का महत्व
सकट चौथ का सनातन धर्म में विशेष महत्व है। इस दिन विघ्नहर्ता भगवान गणेश की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और विशेष फल की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि निर्जला व्रत कर विधि विधान से गणेश जी की पूजा करने से गणपति की कृपा भक्तों पर सदैव बनी रहती है।
कब से कब तक है सकट चौथ 2022
हिंदू पंचांग के अनुसार माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को सकट चौथ का व्रत रखा जाता है। चतुर्थी तिथि 21 जनवरी 2022, शुक्रवार को सुबह 08 बजकर 51 मिनट से प्रारंभ होकर 22 जनवरी 2022, शनिवार को 09:41 AM पर समाप्त होगी। इस दिन निर्जला व्रत कर विघ्नहर्ता भगवान गणेश की पूजा अर्चना के बाद रात को चंद्रदेव को अर्घ्य देकर पारण किया जाता है।
कंदमूल वाले फल व सब्जियों का सेवन ना करें
सकट चौथ के दिन व्रती महिलाओं को कंदमूल वाले फल व सब्जियों का सेवन नहीं करना चाहिए यानी जो चीजें जमीन के अंदर से उगती हैं उनका सेवन संकष्टी चतुर्थी के दिन ना करें। साथ ही मूली, चुकंदर, गाजर, प्याज आदि का सेवन भूलकर भी नहीं करना चाहिए। ध्यान रहे चतुर्थी तिथि से एक दिन पहले व्रती या घर के सदस्य भूलकर भी मांस, मदिरा का सेवन ना करें। इस दिन सात्विक भोजन करना चाहिए।
ना करें महिलाओं का अपमान
सकट चौथ के दिन पुरुषों को ध्यान रखना चाहिए कि किसी महिला का अपमान ना करें, उन्हें अपशब्द ना कहें। अन्यथा आपको गणेश जी के क्रोध का सामना करना पड़ सकता है।
विशेष कार्य में सफलता के लिए करें ये काम
आज सकट चौथ के दिन आपको अपने किसी विशेष कार्य में सफलता चाहिए तो इस दिन गणेश जी के सामने दो सुपारी और दो इलायची रखकर गणेश जी का पूजन करें, इससे आपको सफलता मिलेगी।
क्यों दिया जाता है चंद्र देव को अर्घ्य?
सकट चौथ पर भगवान गणेश के साथ चंद्र देव की पूजा का भी विधान है। सकट चौथ पर चंद्र देव को दूध में शहद, रोली और चंदन मिलाकर अर्घ्य दिया जाता है। मान्यताओं के अनुसार, ऐसा करने से भक्तों की समस्याएं दूर हो जाती हैं। इसके साथ घर में सुख-समृद्धि का वास होता है और दरिद्रता का नाश होता है।
ना पहनें काले रंग का वस्त्र
सकट चौथ के दिन व्रत करने वाली महिलाएं गलती से भी काले रंग का वस्त्र धारण ना करें। ऐसा करने से भगवान गणेश नाराज हो सकते हैं। सकट चौथ की पूजा के लिए लाल या पीले रंग का वस्त्र पहनना शुभ माना गया है।
गणेश जी को चढ़ाएं सुपारी और इलायची
किसी भी विशेष कार्य या क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए सकट चौथ पर श्री गणेश को दो सुपारी और दो इलायची अर्पित करें। इसके बाद गणेश जी की विधि अनुसार पूजा करें। यह उपाय करने से सफलता की प्राप्ति होती है।
सकट चौथ के उपाय
घर में सकारात्मकता लाने के लिए सकट चौथ पर पूजा घर में एक तांबे के लोटे में गंगा जल भर कर उसमें सुपारी रख दीजिए। ऐसा करने से घर में सकारात्मकता बनी रहेगी।
सकट चौथ पर बन रहे हैं दो शुभ योग
इस वर्ष सकट चौथ 21 जनवरी के दिन पड़ रहा है, सकट चौथ पर दो शुभ योग बन रहे हैं। इस दिन चंद्रमा पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र रहेगा। इसके साथ इस दिन सिद्धि योग और सौभाग्य योग बनने वाला है।
सकट चौथ पर चांद का समय
सकट चौथ कल यानी 21 जनवरी को प्रातः 08:51 से शुरू होगा और 22 जनवरी को प्रातः 09:14 पर समाप्त होगा। कल चांद का समय रात के लगभग 9:00 बजे है।
सकट चौथ पर कैसे करें पूजा?
सकट चौथ पर भगवान गणेश की पूजा का विधान है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहनें। फिर भगवान गणेश के सामने व्रत करने का संकल्प लें। इसके बाद चौकी पर लाल रंग का कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश की मूर्ति या प्रतिमा को स्थापित करें। इसके बाद भगवान गणेश की पूजा प्रारंभ करें और उन्हें चावल, रोली, गुड़, घी, धूप, तिल, फूल, तिल के लड्डू, फल और जल अर्पित करें। इसके बाद माता चौथ और भगवान गणेश की कथा का पाठ करें और चांद निकलने के बाद चंद्रमा की पूजा करके उन्हें अर्घ्य दें।
सकट चौथ पर गणेश जी की पूजा का विधान
सकट चौथ भगवान गणेश को समर्पित है। इस दिन विधि अनुसार भगवान गणेश की पूजा की जाती है। मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान गणेश की पूजा करने से विवेक, बुद्धि और बल प्राप्त होता है। इसके साथ जीवन में हमेशा सुख-समृद्धि बनी रहती है और रिद्धि-सिद्धि की प्राप्ति होती है।
संकट चौथ कब से हो रहा है प्रारंभ?
इस वर्ष सकट चौथ 21 जनवरी 2022 के दिन पड़ रही है। चतुर्थी तिथि कल यानी 21 जनवरी को प्रातः 08:51 से शुरू होगी और 22 जनवरी को प्रातः 09:14 पर समाप्त होगी।
सकट चौथ के यह भी हैं नाम
सकट चौथ का व्रत हर वर्ष माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन पड़ता है। सकट चौथ को संकटा चौथ के नाम से भी जाना जाता है। इसके साथ इस चौथ को लंबोदर संकष्टी चतुर्थी, माघी चौथ और तिलकुटा चौथ भी कहा जाता है।
कब से सकट चौथ?
माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि का दिन सकट चौथ के नाम से जाना जाता है। हर वर्ष इस दिन सकट चौथ मनाई जाती है। वर्ष 2022 में सकट चौथ 21 जनवरी के दिन पड़ रही है।
यह मंत्र है बहुत प्रभावशाली
सकट चौथ पर नीचे दिए गए मंत्र का जाप अवश्य करें।
ॐ एक दन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्तिः प्रचोदयात
सकट चौथ पर करें इन मंत्रों का जाप
सकट चौथ पर ॐ गं गणपतये नमः मंत्र का जाप 108 बार करें। मान्यताओं के अनुसार, इस मंत्र का जाप करने से उच्च शिक्षा और प्रखर बुद्धि की प्राप्ति होती है। इसके साथ गणेश जी का आशीर्वाद भी अपने भक्तों पर हमेशा के लिए बना रहता है।
सकट चौथ के चमत्कारी उपाय
सकट चौथ पर सूर्य देव को अर्घ्य अवश्य दें। मान्यताओं के अनुसार, सूर्य देव को अर्घ्य देने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इसके साथ सुख-समृद्धि बनी रहती है।
सकट चौथ पर करें इन चीजों का दान
सकट चौथ पर लोगों को तिलकुट का दान करना चाहिए। सकट चौथ का व्रत करने वाले लोगों को इस दिन चांदी, स्वर्ण, गुड़, तिल, वस्त्र, नमक और अन्न का दान करना चाहिए।
सकट चौथ पर चंद्र देव की पूजा का विधान
सकट चौथ पर चंद्र देव की पूजा का विधान है। इस दिन विधि अनुसार चंद्र देव की पूजा की जाती है। मान्यताओं के अनुसार, ऐसा करने से सुख-समृद्धि आती है और दरिद्रता का नाश होता है
दाईं सूंड वाले गणपति की पूजा करें
मान्यता है कि सकट चौथ के दिन पर दाईं सूंड वाले गणपति की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। दाईं सूंड वाले गणपति कठिनाई से प्रसन्न होते हैं इसलिए सकट चौथ के दिन इनकी पूजा करनी चाहिए।
धन में वृद्धि के लिए उपाय
सकट चौथ के दिन गणेश जी की पूजा करते समय लाल कपड़े में श्रीयंत्र और उसके बीच में सुपारी रखें। इसके बाद गणेश जी के साथ इसकी भी पूजा करें। पूजा करने के बाद शाम के समय इसे तिजोरी में रख दें। माना जाता है कि ऐसा करने से घर में धन-दौलत में वृद्धि होती है।
सकट चौथ के दिन ना करें ये काम
सकट चौथ के दिन भगवान आपसे रुष्ट ना हों इसके लिए कुछ बातों का ध्यान रखना आवश्यक है। जैसे इस दिन भगवान गणपति की सवारी मूषक को परेशान ना करें। इस दिन गणेश जी को तुलसी नहीं चढ़ानी चाहिए। साथ ही इस दिन काले रंग के कपड़े पहनने से बचें।
इन नामों से भी जानी जाती है सकट चौथ
सकट चौथ को संकटा चौथ, तिलकुटा चौथ, लंबोदर संकष्टी चतुर्थी और माघी चौथ के नाम से भी जाना जाता है।
सुनें चौथ माता की कहानी
संकष्टी चतुर्थी पर सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प करें और सभी नियमों का पालन करें। दोपहर में लकड़ी के पाटे पर लाल कपड़ा बिछाकर ईशान कोण में मिट्टी के गणेश व चौथ माता की तस्वीर स्थापित करे। अब रोली, मोली, अक्षत, फल,फूल और दूर्वा अर्पित कर भगवान का पूजन करें। फिर तिल के लड्डू या तिलकुट का नैवेद्य अर्पण करें और आरती कर चौथ माता की कहानी सुनें।
संकटों से मुक्ति पाने के लिए करें ये जाप
संकष्टी चतुर्थी पर संकटों और परेशानियों से मुक्ति पाने के लिए 'ॐ एक दन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्तिः प्रचोदयात' का जाप करें।
विद्यार्थी करें इस मंत्र का जाप
संकष्टी चतुर्थी के दिन विधार्थी 'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्र का 108 बार जाप करें। इससे शिक्षा और सफलता में गणेशजी की कृपा बरसेगी।
दान करें ये चीजें
इस दिन गुड़ और तिल का तिलकुट बनाकर दान करना चाहिए। व्रत करने वालों को इस दिन दस महादान करने चाहिए जिनमें अन्न, नमक, रत्नों, चांदी, स्वर्ण, तिल, गुड, वस्त्र, गौघृत, चांदी का दान और शक्कर शामिल है। ऐसा करने से रोग, कर्ज, दरिद्रता से मुक्ति मिलती है।
चंद्रदेव को अर्घ्य देने का मंत्र
सकट चौथ पर जब चांद नजर आए तो एक लोटे में शुद्ध जल भरकर उसमें लाल चन्दन, कुश, पुष्प, अक्षत आदि डालकर चन्द्रमा अर्घ्य दें। साथ ही इस मंत्र का जाप करें -
'गगनार्णवमाणिक्य चंद्र दाक्षायणीपते। गृहाणार्घ्यं मया दत्तं गणेशप्रतिरूपक'।
अर्थात-'गगन रुपी समुद्र के माणिक्य चन्द्रमा ! दक्ष कन्या रोहिणी के प्रियतम ! गणेश जी के प्रतिविम्ब !आ प मेरा दिया हुआ यह अर्घ्य स्वीकार कीजिए'।
चंद्रमा की पूजा का विधान
मान्यताओं के अनुसार इस दिन चंद्रदेव की पूजा कर उनको अर्घ्य देने से ग्रह नक्षत्र मजबूत होते हैं। साथ में घर में सुख समृद्धि का वास होता है और दरिद्रता का नाश होता है।
सकट चौथ व्रत का महत्व
सकट चौथ व्रत को लेकर मान्यता है कि इस दिन विघ्नहर्ता भगवान गणेश की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और विशेष फल की प्राप्ति होती है। निर्जला व्रत कर विधि विधान से गणेश जी की पूजा करने से गणपति की कृपा भक्तों पर सदैव बनी रहती है।


